भारतीय राज्यव्यवस्था के महत्वपूर्ण प्रश्न (Important questions of Indian polity)

लोकसभा द्वारा पारित धन विधेयक को राज्यसभा को कितने दिन के भीतर लौटाना होता है ?

-14 दिन 

संसद में बजट कौन प्रस्तुत करता है ?

-वित्त मंत्री 

राजनीति विज्ञान का केन्द्रीय प्रतिपाद्य क्या है ?

-राज्य

संविधान सभा ने अपना स्थायी अध्यक्ष किसे चुना था ?

-डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को

 राष्ट्रीय एकता परिषद् की अध्यक्षता कौन करता है ?

-प्रधानमंत्री 

भारत के प्रधानमंत्री को कौन नियुक्त करता है ?

–भारत का राष्ट्रपति 

यूनाइटेड किंगडम (ग्रेड ब्रिटेन) में कैसा शासन है ?

-एकात्मक शासन 

राष्ट्रीय आपात् स्थिति में भारतीय नागरिकों के मूल अधिकारों को निलंबित करने का अधिकार किसको है ?

–भारत के राष्ट्रपति को 

कुछ मूल अधिकार सशस्त्र सेनाओं के सदस्यों को उपलब्ध नहीं होते हैं। इसके निर्णय का अधिकार किसको है ?

-संसद को 

किसी राज्य की विधानसभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या कितनी होती है ?

-500 

भारतीय संविधान का कौन-सा मूल अधिकार सिक्खों को कृपाण रखने का अधिकार देता है ? |

-धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार 

भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में किसकी सर्वोच्चता होती है ?

-संविधान की 

लोकसभा के अध्यक्ष को कौन हटाता है ?

-लोकसभा के बहुसंख्यक सदस्य

किसको संसद द्वारा महाभियोग के जरिए अपने पद से हटाया जा सकता है ?

–भारत के राष्ट्रपति 

राष्ट्रीय दल के रूप में मान्यता पाने के लिए किसी राजनीतिक दल को कम-से-कम कितने राज्यों में मान्यता प्राप्त करनी चाहिए ?

-चार राज्य 

लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में आधिकारिक रूप में मान्यता पाने के लिए उसके दल के सदस्यों की संख्या कम-से-कम कितनी होनी चाहिए ?

-सदन के कुल सदस्यों का 10 प्रतिशत 

राज्यसभा की एक-तिहाई जगहों को भरने के लिए चुनाव कब किए जाते हैं ?

-दो वर्ष में एक बार 

संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठकों की अध्यक्षता कौन करता है ?

-लोकसभा के अध्यक्ष

एक अपराध के दोष-सिद्ध व्यक्तियों को क्षमा करने का अधिकार किसको होता है ? -राष्ट्रपति और राज्यपाल • 

दल-बदल विरोधी कानून के अंतर्गत भारतीय संसद सदस्य या राज्य विधान मंडल के किसी सदस्य की सदस्यता समाप्त हो जाती है, यदि वह

-अपने दल की सदस्यता छोड़ देता है 

द्विसदन पद्धति किसकी सूचक है ?

-दो सदनों वाला विधान मंडल 

भारत में किस राज्य का अलग संविधान है ?

-जम्मू-कश्मीर 

भारतीय संविधान के निर्माताओं में ‘सरकार का संसदीय स्वरूप’ कहाँ से लिया था ?

-ब्रिटेन से 

केन्द्रीय मंत्रिमंडल के आकार और सदस्यता का निर्णय कौन करता है ?

-प्रधानमंत्री 

राष्ट्रपति किसकी सलाह/अनुरोध पर लोकसभा को उसकी अवधि की समाप्ति से पहले भंग कर सकता है ?

-प्रधानमंत्री 

राष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए निर्वाचन मंडल में कौन-से सदस्य शामिल होते हैं ? 

-संसद और राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य

भारत के संविधान में सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों को न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति प्रदान की गई है, जिसका मुख्य आधार है- -अनुच्छेद-13 

मुख्य निर्वाचन आयुक्त के अलावा, केन्द्र में कितने निर्वाचन आयुक्त होते हैं ?

-दो 

राज्य सरकार के कार्य किसके नाम में कार्यान्वित किए जाते हैं ?

-राज्य के राज्यपाल 

भारत के किस राज्य का अपना संविधान है ?

-जम्मू कश्मीर 

राष्ट्रपति द्वारा आपात् स्थिति की घोषणा के लिए क्या आवश्यक है ?

-तीस दिन के भीतर संसद का अनुमोदन 

भारत में शासन करने के अवशिष्ट अधिकार किसके पास हैं ?

-केन्द्र सरकार 

राष्ट्रपति के अध्यादेश की अधिकतम अवधि कितनी होती

-छः सप्ताह 

जब एक समाज सभ्यता के चरण में पहुँचता है तब उसकी सबसे बड़ी विशेषता किसका आविर्भाव होता है ?

_–संगठित सामुदायिक जीवन का

आधार पर वर्गीकृत की जाती हैं ?

-विधानमंडल और कार्यपालिका 

किस राज्य में जनता कसी राय नियन्त्रित और परिचालित नहीं की जाती है ?

-उदार प्रजातंत्रीय राज्य में

• एक उदार प्रजातंत्र में ‘समानता’ की संकल्पना में किस बात पर जोर दिया गया है ? 

-सभी व्यक्तियों को एक ही/समान नैतिक महत्व और सम्मान दोनों है 

• एक संघ मुख्य रूप से राज्य का अधीनस्थ होता है, क्योंकि

-उसको राज्य के समान सर्वोपरी शक्ति प्राप्त नहीं होती है |. 

भारत का संविधान कब से लागू हुआ ?

-26 जनवरी, 1950 से |

• भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकार दिये गये हैं

-संविधान के भाग-III में 

भारत के कौन-से राष्ट्रपति लगातार दो कार्यकाल तक अपने पद पर बने रहें ?

-डॉ. राजेन्द्र प्रसाद 

राष्ट्रीय आपात स्थिति की घोषणा जारी नहीं रहती यदि संसद उसे अनुमोदन प्रदान न कर दे

-एक माह के भीतर 

संसद के दोनों सदनों की बैठकों का सभापति कौन होता है ?

-लोकसभा अध्यक्ष 

उस संसद समिति को जो भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट का संवीक्षण करती है, कहा जाता है

-प्राक्कलन समिति 

लोकसभा की बैठक के लिए कम-से-कम कितने सदस्यों का कोरम होना चाहिए ?

-सदन के कुल सदस्य संख्या का 1/10वाँ भाग 

भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की नियुक्ति । कौन करता है ?

-राष्ट्रपति 

राज्यसभा का पदेन (Ex-officio) अध्यक्ष कौन होता है ?

-उपराष्ट्रपति 

राष्ट्रपति का पद अधिकतम कितने महीने के लिए रिक्त रह सकता है ?

-छह माह 

बराबर वोट पड़ने पर निर्णायक मत कौन देता है ?

-अध्यक्ष (Speaker) 

राज्यपाल कब तक अपने पद पर बना रह सकता है ?

-राष्ट्रपति जब तक चाहे 

• वित्त विधेयक कहाँ पेश किये जा सकते हैं ?

-केवल लोकसभा में |

• मृत्यु-दंड को कौन माफ कर सकता है ?

-राष्ट्रपति 

कौन-सा प्रजातांत्रिक देश स्वरूप में संघात्मक परंतु प्रकृति में एकात्मक कहा जाता है ?

–भारत 

सरकारों को एकात्मक और संघात्मक के रूप में वर्गीकृत करने का आधार क्या है ?

-केन्द्र और राज्यों के बीच में संबंध

संसद राज्य सूची में दिए गए विषयों के बारे में कब कानून बना सकती है ?

-दो या अधिक राज्यों के अनुरोध पर 

किसी सांविधानिक सरकार के दो मूल मूल्य क्या होते

-स्वतंत्रता और समानता 

• राज्यों के राज्यपाल कब तक अपने पद पर बने रहते हैं ?

-राष्ट्रपति का प्रसाद बने रहने तक 

यदि किसी मनुष्य को संचालन की स्वतंत्रता नहीं दी जाती है तो इसका अर्थ कौन-सी स्वतंत्रता से वंचित करना है ?

-नागरिक स्वतंत्रता 

किसी राज्य के महाधिवक्ता के रूप में नियुक्त किए जाने के लिए व्यक्ति में किसकी योग्यताएँ होनी चाहिए ?

-उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का 

अल्पकालीन अध्यक्ष का क्या कार्य होता है ?

-सदस्यों को शपथ दिलाना और नियमित अध्यक्ष के चुने जाने तक कार्य संभालना 

भारत के राष्ट्रपति पर संसद द्वारा महाभियोग लगाया जा सकता है 

-यदि वह-उस पर संविधान के उल्लंघन का आरोप लगाया जाता

• संविधान के अनुच्छेद-I में भारत को क्या कहा गया है ?

-राज्यों का संघ 

किस विधान मण्डल को संसदों की माता के रूप में सार्वभौमिक मान्यता प्राप्त है ?

-ब्रिटिश संसद 

फासिस्टवाद किसमें विश्वास करता है ?

___-जाति की श्रेष्ठता 

कानूनी समानता में यह निहित होता है कि

-कानून के सामने हरेक व्यक्ति समान है 

• सरकार वास्तव में किसका अभिकर्ता है ?

-राज्य का

 • राज्यसभा की अधिकतम सदस्या संख्या क्या है ?

-250 

संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा का अध्यक्ष बनने वाला प्रथम भारतीय कौन था ?

-वी. के. कृष्णमेनन

 • राष्ट्रपति के निर्वाचन को चुनौती कहाँ दी जा सकती है ?

-उच्चतम न्यायालय में

 • निर्वाचन आयोग किस प्रकार की संस्था है ?

-संवैधानिक संस्था 

• भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद् का अध्यक्ष कौन होता है ?

भारत का राष्ट्रपति 

संविधान के किस अंश में कल्याणकारी राज्य की अवधारणा की विस्तार से चर्चा हुई है ?

-राष्ट्रनीति के दिशासूचक सिद्धान्त में 

• उप-निरीक्षक पुलिस किसका अंग है ?

-कार्यपालिका का

भारतवर्ष में मताधिकार की आयु किस ढंग से 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की गई ? 

-संवैधानिक संशोधन द्वारा 

वित्त आयोग क्या है ?

-पंचवार्षिक निकाय 

भारत का संविधान देश को किस रूप में वर्णित करता है ?

-राज्यों का संघ 

भारत के संविधान का तिहत्तरवाँ संशोधन अधिनियम, 1992 के पारित किए जाने का क्या कारण था ?

-पंचायती राज को बल प्रदान 

करना भारतीय संविधान में राज्य की शक्तियाँ एवं कार्य किस प्रकार विभाजित किए गए हैं ? 

-तीन सूचियों में 

भारत के राष्ट्रपति द्वारा लोकसभा में एंग्लो-इण्डियन समुदाय के कितने सदस्यों को मनोनीत किया जा सकता है ?

-दो 

संसद के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन का सभापतित्व कौन करता है ?

-लोकसभा के अध्यक्ष 

प्रथम अधिनियम जिसके अंतर्गत, अपने अंतर्विवाही समूह का सदस्य न होने वाले व्यक्ति के साथ विवाह की अनुमति प्रदान करने वाला था ?

-विशेष विवाह अधिनियम 

समवर्ती सूची में लिखे विषयों पर अधिनियम बनाने का अधिकार किसके पास होता है ?

-राज्य और संघ के पास 

किसी विशेष दिन, लोकसभा में अधिकतम कितने तारांकित प्रश्न पूछे जा सकते हैं ?

-20 

• प्रेस की स्वतंत्रता किस अधिकार में निहित है ?

-भाषण-स्वातंत्र्य 

भारत में संघीय शासन प्रणाली किस अधिनियम के अंतर्गत प्रारंभ हुई ? 

-भारत सरकार अधिनियम, 1935 

राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति से संबंधित चुनाव विवादों का समझौता करने का अधिकार उच्चतम न्यायालय को है। यह उसका कैसा अधिकार है ? 

-मौलिक अधिकार 

संविधान सभा के अस्थायी अध्यक्ष कौन बने थे ?

-सच्चिदानन्द सिन्हा 

वित्त आयोग (Finance Commission) के अध्यक्ष की नियुक्ति कौन करता है ?

-राष्ट्रपति 

राज्य में मंत्रिपरिषद् सामूहिक रूपप से किनके प्रति उत्तरदायी होंगे?

-विधानसभा 

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 74 और 75 किन विषयों पर विचार करते हैं ?

-मंत्रिपरिषद 

भारतीय संविधान के प्रारूप समिति के अध्यक्ष कौन थे ?

-डॉ. बी. आर. अम्बेडकर 

चतुर्थ सम्पदा (Fourth Estate) किसको निर्दिष्ट करती है ?

-समाचार-पत्र 

राज्यसभा का एक स्थायी (Permanent) सदन होने का क्या कारण है ? -क्योंकि एक-तिहाई सदस्य प्रति दो वर्ष पर सेवानिवृत्त होते हैं

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भारतीय राज्यव्यवस्था से सम्बन्धित महत्वपूर्ण तथ्य (Important facts Indian polity)

भारतीय राज्यव्यवस्था से सम्बन्धित महत्वपूर्ण तथ्य

  1. भारतीय संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन प्रस्तावों के अनुसार किया गया। 
  2. इसके गठन के लिए जुलाई-अगस्त 1946 में चुनाव हुआ।
  3. 3 जून 1947 के भारत संविधान की योजना की घोषणा के बाद इसका पुनगर्छन हुआ तथा पुनर्गठित संविधान सभा की संख्या 299 थी। 
  4. संविधान सभा के वैधानिक सलाहकार (Constitutional Advisor) के पद पर बी. एन. राव को नियुक्त किया गया। 
  5. 29 अगस्त 1947 को संविधान सभा ने डॉ. बी. आर. अम्बेडकर की अध्यक्षता में प्रारूप समिति (Drafting Committee) का गठन किया। 
  6. 15 नवम्बर 1948 को संविधान के प्रारूप पर प्रथम वाचन प्रारम्भ हुआ। 
  7. 26 नवम्बर 1949 को संविधान के प्रारूप पर अन्तिम वाचन हुआ और इसी दिन संविधान सभा द्वारा पारित कर दिया गया। 
  8. 26 नवम्बर 1946 को संविधान के उन अनुच्छेदों को प्रस्तावित कर दिया गया जो नागरिकता निर्वाचन तथा अंतरिम संसद से सम्बन्धित थे। 
  9. संविधान सभा का अंतिम दिन 24 जनवरी 1950 था और उसी दिन संविधान पर संविधान सभा के सदस्यों द्वारा हस्ताक्षर कर दिया गया। 
  10. संविधान के निर्माण में 2 वर्ष 11 माह और 18 दिन का समय लगा। 
  11. वर्तमान में संविधान में 444 अनुच्छेद और 12 अनुसूचियाँ हैं। 
  12. “पंथनिरपेक्ष’, “समाजवाद” तथा “अखण्डता” शब्द संविधान की उद्देशिका में 42 वें संशोधन के द्वारा 1976 में जोड़े गये। 
  13. भारत की उद्देशिका में प्रयुक्त “गणतन्त्र’ शब्द का तात्पर्य यह है कि भारत का राज्याध्यक्ष वंशानुगत (hereditary) नहीं होगा। 
  14. उच्चतम न्यायालय के निर्णय के अनुसार-संविधान की उद्देशिका संविधान का एक भाग है और इसमें संशोधन किया जा सकता है (केशवानंद भारती बनाम केरल – 1973 ई.)। 
  15. प्रो. व्हीयर ने भारत के संविधान को अर्द्धसंघीय (Quasifederal) संविधान कहा है। 
  16. राज्य पुनगर्छन अधिनियम 1956 द्वारा भाषाई आधारों पर राज्यों का पुनगर्छन किया गया।
  17. भारतीय संविधान में नागरिकता शब्द को परिभाषित नहीं किया गया है तथा इसके सम्बन्ध में अनुच्देद 5 से 11 तक में प्रावधान किया गया है। 
  18. संविधान के अनुसार कुछ पद केवल भारतीय नागरिकों के लिए आरक्षित है, जैसे- राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, उच्चतम एवं उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, महान्यायवादी राज्यपाल एवं महाधिवक्ता का पद। 
  19. संविधान के 44 वें संशोधन द्वारा सम्पत्ति के मूलाधिकार को समाप्त करके इस अनुच्छेद 300(क) के अर्न्तगत रखा गया है। अब यह केवल एक विधिक (Legal) अधिकार रह गया है। 
  20. अनु. 15, 16, 19, 29 तथा 30 द्वारा प्रतयाभूत मूलाधिकार केवल नागरिकों को ही प्रदान किये गये हैं। शेष सभी मूलाधिकार नागरिकों तथा अन्य व्यक्तियों को प्रदान की गयी है। 
  21. मूल कर्तव्यों को 42वें संविधान संशोधन द्वारा 1976 में जोड़ा गया। 
  22. राष्ट्रपति अपने पद पर रहते हुये किसी भी कार्य के लिए न्यायालय में उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता है। 
  23. भारत में केवल नीलम संजीवा रेड्डी ही र्निविरोध राष्ट्रपति चुने गये। 
  24. भारत के दो राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन तथा फखरूद्दीन अली अहमद की अपने कार्यकाल के दौरान ही मृत्यु हुयी थी। 
  25. भारत के मुख्य न्यायधीश मोहम्मद हिदायतुल्लाह ने दो बार कार्यकारी राष्ट्रपति के पद का निर्वहन किया था। 
  26. भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है तथा इसी पद के कारण उसका वेतन दिया जाता है। 
  27. संघ शासन की वास्तविक शक्ति केन्द्रीय मंत्रिमंडल में निहित होती है, जिसका प्रधान प्रधानमंत्री होता है। 
  28. प्रधानमंत्री का यह कर्तव्य यह है कि संघ के शासन की जानकारी राष्ट्रपति को दे 
  29. प्रधानमंत्री लोकसभा के बहुमत दल का नेता होता है। 
  30. केन्द्रीय मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामुहिक रूप से उत्तरदायी होती है। 
  31. संसद के तीन अंग होते हैं- लोकसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति। 
  32. सरकार के तीन अंग होते हैं- विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका। 
  33. राज्यसभा का गठन 3 अप्रैल 1952 को हुआ और इसकी पहली बैठक 13 मई 1952 को हुयी।
  34. राज्यसभा के सदस्यों के पहले समूह की सेवा निवृत्ति 2 अप्रैल 1954 को हुयी। 
  35. लोकसभा के परिक्षेत्र का परिसीमन आयोग द्वारा किया जाता है। 
  36. प्रथम लोकसभा की पहली बैठक 13 मई 1952 को हुई और 4 अप्रैल 1957 को पहली लोकसभा राष्ट्रपति द्वारा विघटित कर दी गयी। 
  37. राज्यसभा तथा लोकसभा के संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करता है।
  38. लोकसभा के प्रथम अध्यक्ष गणेश वासुदेव मावलंकर थे। पं. जवाहर लाल नेहरू ने इन्हें संसद का पिता या जनक कहा था। 
  39. संयुक्त संसदीय समिति में लोकसभा को दो तिहायी तथा राज्यसभा के एक तिहायी सदस्य होते हैं। 
  40. धन विधेयक केवल लोकसभा में पेश किया जा सकता है। 
  41. धन विधेयक के सम्बन्ध में राज्यसभा को केवल सिफारिशी अधिकार है। 
  42. राज्यपाल विधान मंडल के सत्रावसान काल में अध्यादेश जारी कर सकता है। यह अध्यादेश 6 माह तक प्रभावी रहता है। 
  43. राज्यों की मंत्रिपरिषद सामुहिक रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होती है तथा प्रत्येक मंत्री व्यक्तिगत रूप से राज्यपाल के प्रति उत्तरदायी होता है। 
  44. राज्य विधानमंडल में राज्यपाल तथा विधानसभा और विधान परिषद शामिल होता है। 
  45. राज्य के विधानसभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या 500 और न्यूनतम संख्या 60 होगी।
  46. विधानसभा की गणपूर्ति संख्या कुल सदस्यों का 1/10 है। परन्तु यह किसी भी दशा में 10 सदस्य से कम नहीं होगी। 
  47. संविधान के अनुच्छेद 370 द्वारा जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया है।
  48. जम्मू-कश्मीर राज्य विधानसभा में दो महिलाओं को राज्यपाल नामजद करते हैं। 
  49. राष्ट्रपति जम्मू-कश्मीर के सम्बन्ध में वित्तीय आपात की घोषणा नहीं कर सकते। 
  50. राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों से सम्बन्धित संविधान के भाग 4 के प्रावधान जम्मू-कश्मीर राज्य केविषय में लागू नहीं होते हैं। 
  51. जम्मू-कश्मीर राज्य का अपना संविधान है, जो एक पृथक संविधान सभा द्वारा बनाया गया है और यह संविधान 26 नवम्बर 1957 को लागू कर दिया गया। 
  52. भारत में केवल दो संघ शासित राज्यां में विधान सभायें हैं- दिल्ली और पांडिचेरी। 
  53. भारत में उच्च न्यायालय की संख्या 21 है। देश में छ: ऐसे राज्य हैं जहाँ पर विधान परिषदों का गठन किया गया है- 1. उत्तर प्रदेश,  2. बिहार,  3. महाराष्ट्र,  4. कर्नाटक,  5. जम्मू-कश्मीर और  6. आन्ध्र प्रदेश।
  54. 4 अप्रैल, 2007 को आन्ध्र प्रदेश में पुनः विधानपरिषद का गठन किया गया।
  55. राष्ट्रपति प्रत्येक पाँचवे वर्ष वित्त आयोग का गठन करता है। 
  56. प्रथम वित्त आयोग का गठन 1951 में किया गया था।
  57. भारतीय संविधान के प्रवर्तित होने के बाद पहली बार राष्ट्रपति शासन पंजाब में लागू किया गया।
  58. संविधान सभा के 284 सदस्यों ने संविधान पर हस्ताक्षर किये। 
  59. जब भारत आजाद हुआ तो उस समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री क्लामेंट एटली थे। 
  60. जब भारत आजाद हुआ तो उस समय कांग्रेस के अध्यक्ष जे. पी. कृपलानी थे। 
  61. 15 अगस्त, 1947 से 26 जनवरी 1950 के मध्य भारत-ब्रिटिश राष्ट्रकुल का एक अधिराज था।
  62. भारतीय संविधान 22 भागों में विभाजित किया गया है। 
  63. भारतीय संविधान के प्रस्तावना के अनुसार भारत की शासन की सर्वोच्च सत्ता भारतीय जनता में निहित है। 
  64. भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों के स्थगन सम्बन्धी कार्यपालिका के अधिकारों को जर्मनी के संविधान से लिया गया है। 
  65. भारत संविधान संशोधन की प्रक्रिया दक्षिण अफ्रीका के संविधान से ली गयी है। 
  66. राज्य पुर्नगठन अधिनियम 1956 में पारित किया गया, इसके अध्यक्ष फजल अली थे।
  67. संविधान में प्रेस की स्वतंत्रता का अलग से प्रबन्ध नहीं किया गया है। यह अनुच्छेद 19(1)A से अंर्तनिहित है। 
  68. डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने संवैधानिक उपचारों के अधिकार को संविधान का हृदय व आत्मा कहा है। 
  69. 42वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान में मूल कर्तव्यों को शामिल किया गया है। 
  70. इन्हें संविधान के भाग IV ए और अनुच्छेद 51 ए में शामिल किया गया है। 
  71. राष्ट्रीय आपात की स्थिति में मौलिक अधिकारों का हनन हो जाता है। 
  72. संविधान में 10 मौलिक कर्तव्यों कावर्णन किया गया है। 
  73. मूल कर्तव्य (अनु0 51 क) को 42वें संविधान संशोधन 1976 में जोड़ा गया। 
  74. 86वें संविधान संशोधन द्वारा एक मूल कर्तव्य और जोड़ा गया जिससे इसकी संख्या अब ग्यारह हो गई। 
  75. “राज्य का नीति निर्देशक तत्व एक ऐसा चेक है जो बैंक की सुविधानुसार अदा किया जाएगा”- के. टी. शाह 
  76. संविधान में नीति निर्देशक तत्वों को शामिल करने का | उद्देश्य सामाजिक लोकतंत्र की स्थापना करना था।
  77. पहला संवैधानिक संशोधन 1951 में बनाया गया। 
  78. 42वें संविधान संशोधन को लघु संविधान कहा जाता है। 
  79. 42वें संविधान अधिनियम स्वर्ण सिंह समिति की रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया था। 
  80. 52वें संविधान संशोधन विधेयक 1985 दल-बदल से सम्बन्धित था। 
  81. भारतीय संविधान में सर्वाधिक बार संशोधन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी के कार्यकाल में हुये।
  82. भारत का राष्ट्रपति राष्ट्र का प्रमुख है। शासन का प्रमुख मंत्रिपरिषद और प्रधानमंत्री होता है।
  83. भारतीय संविधान के अनुसार केन्द्र की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होता है। 
  84. राष्ट्रपति के वेतन एवं भत्ते आयकर मुक्त है।
  85. राष्ट्रपति के पद के रिक्त होने से 6 माह के भीतर अगले राष्ट्रपति का चुनाव हो जाना चाहिए। 
  86. 1952 में राष्ट्रपति के निर्वाचन के समय विपक्षी दलों का उम्मीदवार श्री के.टी. शाह थे। 
  87. राष्ट्रपति पद पर सर्वाधिक समय तक रहने वाले डॉ. राजेन्द्र प्रसाद थे एवं सबसे कम समय तक रहने वाले डॉ. जाकिर हुसैन थे।
  88. राष्ट्रपति पद पर सबसे कम उम्र का राष्ट्रपति बनने का सौभाग्य नीलम संजीव रेड्डी को प्रापत हुआ तथा सबसे अधिक उम्र के. आर. वेंकट रमन राष्ट्रपति बने। 
  89. किस कार्यवाहक राष्ट्रपति ने त्यागपत्र देकर चुनाव लड़ा और विजयी हुआ- वी.वी. गिरी।
  90. नीलम संजीव रेड्डी राष्ट्रपति बनने से पूर्व लोक सभा अध्यक्ष रह चुके थे। 
  91. भारत के राष्ट्रपति की संवैधानिक स्थिति ब्रिटेन की महारानी से मिलती जुलती है। 
  92. संविधान के अनुच्छेद 123 के अर्न्तगत राष्ट्रपति अध्यादेश जारी करता है। 
  93. राष्ट्रपति द्वारा जारी अध्यादेश संसद का सभा प्रारम्भ होने के 6 सप्ताह तक प्रभावी रहता है।
  94. राष्ट्रपति द्वारा आपात काल की उद्घोषणा के 30 दिन के भीतर संसद की स्वीकृति आवश्यक होता है। 
  95. संसद के दोनों सदनों द्वारा अनुमोदन होने के 6 माह बाद,तक आपात काल प्रभावी रहता है। 
  96. आपात काल के दौरान संसद लोकसभा का कार्यकाल एक वर्ष बढ़ा सकती है। 
  97. 42वें संविधान संशोधन द्वारा आपात काल की अवधिको 6 माह से बढ़ा कर एक वर्ष कर दिया गया है। 
  98. हिन्दू आचार संहिता विधेयक को लेकर प्रधानमंत्री को डॉ. राजेन्द्र प्रसाद से विवाद हुआ था। 
  99. भारत के उपराष्ट्रपति की तुलना संयुक्त राज्य अमेरिका के उपराष्ट्रपति से की जा सकती है।
  100. सर्वाधिक समय तक उपराष्ट्रपति रहने का गौरव डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को है।
  101. मन्त्री परिषद का कोई सदस्य बिना किसी सदन का सदस्य रहे 6 माह तक मन्त्री का पद धारण कर सकता मन्त्री परिषद में तीन स्तर के मन्त्री होते हैं- 1. केबिनेट, 2. राज्य, 3. उपमंत्री 
  102. सामूहिक रूप से मन्त्री परिषद लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होता है। 
  103. प्रधानमंत्री पद पर सबसे कम समय तक रहने वाले अटल बिहारी बाजपेयी थे (13 दिन)।
  104. दो बार कार्यकारी प्रधानमंत्री के रूप में पद संभालने वाले व्यक्ति गुलजारी लाल नन्दा थे। 
  105. सबसे कम उम्र में भारत का प्रधानमंत्री राजीव गांधी बने और सबसे अधिक उम्र में मोरार जी देसाई ।
  106. प्रधान मंत्री पद से त्यागपत्र देने वाले पहले व्यक्ति मोरार जी देसाई थे। 
  107. भारत के पहले उप प्रधानमंत्री सरदार पटेल थे। 
  108. संघीय मंत्री परिषद से त्यागपत्र देने वाले पहले मंत्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी थे।
  109.  सबसे कम अवधि (5 दिन) तक मंत्री रहने का कीर्तिमान एच. आर. खन्ना के नाम है। वह विधि विभाग के मंत्री थे।
  110. भारत की सम्परीक्षा और लेखा प्रणालियों का प्रधान नियन्त्रक एवं महालेख परीक्षक (Controller and Auditor General of India) होता है। 
  111. नियन्त्रक अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है।
  112. लोक सभा संसद का निम्न सदनों (लोर हाउस) तथा राज्य सभा उच्च सदन (अपर हाउस) है। 
  113. वर्तमान में लोक सभा के सदस्यों की संख्या 545 तथा राज्य सभा के सदस्यों की संख्या 245 है।
  114. राज्य सभा के सदस्यों का चुनाव उस राज्य की विधान सभा के निर्वाचित सदस्य करते हैं। 
  115. राज्य सभा में सर्वाधिक प्रतिनिधि उत्तर प्रदेश के हैं। 
  116. राज्य सभा सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है। 
  117. राज्य सभा के उप सभापति का चुनाव राज्य सभा के सदस्य करते हैं। 
  118. मूल संविधान में लोकसभा की संख्या 525 निर्धारित की गई थी। 
  119. लोक सभा की वर्तमान सदस्य संख्या 2026 ई. तक अपरिवर्तित रहेगी। 
  120. आपात काल के दौरान संसद लोकसभा का कार्यकाल एक बार मे एक वर्ष तक बढ़ा सकती है। 
  121. लोकसभा की गणपूर्ति कुल सदस्य संख्या का 1/10 भाग प्रथम लोक सभा का अध्यक्ष जी.वी. मावलंकर थे। उन्हें लोक सभा का पिता भी कहा जाता है। 
  122. ब्रिटिश परम्पराओं के अनुसार लोक सभा अध्यक्ष बनने के बाद श्री नीलम संजीव रेड्डी ने अपनी पार्टी की सदस्यता त्याग दी थी। 
  123. लोक सभा का पहला आम चुनाव 1951-52 के शीतकाल में हुआ था। 
  124. प्रथम लोकसभा के चुनाव के लिए कुल मतदाताओं की संख्या 17.32 करोड़ थी। 
  125. दूसरी लोकसभा में सर्वाधिक (12) निर्विरोध सांसद चुने गये थे। 
  126. 1977 के लोक सभा के निर्वाचन में जनता पार्टी को 265 सीटें मिली थी।पन्द्रहवीं लोक सभा में सर्वाधिक महिलायें 59 सांसद के रूप में निर्वाचित हुई
  127. पहली लोकसभा वालों पहली बैठक 13 मई 1952 को हुई। 
  128. राज्य सभा का सर्वप्रथम गठन 3 अप्रैल 1952 को हुआ। 
  129. यदि संसद का कोई नामांकित सदस्य अपना स्थान ग्रहण करने के 6 माह के भीतर किसी राजनैतिक दल में शामिल हो जाता है तो उसकी सदस्यता बरकरार रहेगी। 
  130. दल-बदल के सम्बन्ध में अन्तिम निर्णय सदन के अध्यक्ष का होता है। 
  131. राज्य–सभा की पहली महिला महासचिव बी. एस. रमादेवी थी। 
  132. संसद का कोई सदस्य अपने अध्यक्ष की पुर्वानुमति लिये बिना 60 दिन तक सदन में नुपस्थित रहता है तो उसका स्थान रिक्त घोषित कर दिया जाता है। 
  133. लोकसभा की नियम समिति का पदेन अध्यक्ष लोक सभा का अध्यक्ष होता है। 
  134. प्रत्येक विधेयक को पारित होने से पूर्व तीन बार वाचन से गुजरना पड़ता है। 
  135. संयुक्त बैठक में विधेयक को दोनों सदनों के उपस्थित और मतदान करने वाले सभी सदस्यों के बहुमत से पारित किया जाता है।
  136. संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोक सभा का अध्यक्ष होता गैर सरकारी विधेयक शुक्रवार को पेश किये जाते हैं। 
  137. लोक सभा में मान्य विरोधी दल के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए दल के पास लोक सभा की कुल संख्या के 1/10 सदस्य होने चाहिए। 
  138. लोक सभा का विरोधी दल का प्रथम मान्यता प्राप्त नेता राम सुभग सिंह (1969 ई.) थे। ये कांग्रेस संगठन के नेता थे। 
  139. संसद के दोनों सदनों का सत्रावसान राष्ट्रपति करता है। 
  140. संविधान का व्याख्याकार और संरक्षक उच्चतम न्यायालय होता है। 
  141. संविधान के निर्माण के समय सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश के अलावा 7 न्यायाधीश थे। 
  142. वर्ष 1986 से सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश के अतिरिक्त 25 अन्य न्यायाधीशों की व्यवस्था की गई थी। 
  143. सर्वोच्च न्यायालय में तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति की परम्परा फ्रांस की न्यायिक प्रणाली से ली गई है। 
  144. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों साबित सदाचार और असमर्थता के आधार पर महाभियोग द्वारा हटाया जा सकता है। 
  145. सर्वोच्च न्यायालय ने 80 के दशक में जनहित याचिका की कार्यवाही प्रारम्भ की इसके द्वारा संविधान के अनुच्देद 32 का दायरा बहुत ही विस्तृत हो गया है। 
  146. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश वी. रामास्वामी के विरूद्ध 11 मई 1993 को लोक सभा में लाया गया महाभियोग का प्रस्ताव असफल रहा। 
  147. सर्वोच्च न्यायालय का प्रथम मुख्य यन्यायाधीश एच. जे. कानिया थे।
  148. सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद पर सर्वाधिक अवधि तक रहने वाले न्यायाधीश वाई वी. चन्द्रचूड़ थे। 
  149. सर्वोचच न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद पर सबसे कम समय तक रहने वाले न्यायाधीश के. एन. सिंह थे (17 दिन) 
  150. राष्ट्रपति ने पहली बार सर्वोच्च न्यायालय को दिल्ली विधि अधिनियम के मामले में सलाह देने के लिए निर्दिष्ट किया था। 
  151. सर्वोच्च न्यायालय की पहली महिला न्यायधीश मीरा फातिमा बीबी थी। 
  152. सर्वोच्च न्यायालय में न्यायिक कार्य के लिए अंग्रेजी भाशा का प्रयोग किया जाता है। 
  153. लोकसभा का सबसे युवा सांसद मुकुल वासनिक है। 
  154. सर्वाधिक उम्र में लोकसभा का चुनाव जीतने वाले व्यक्ति एन. जी. रंगा थे। 
  155. अब तक लोकसभा के किसी सीट को सर्वाधिक मतों से जीतने का रिकार्ड पी. वी. नरसिंह राव है। 
  156. एक ही निर्वाचन क्षेत्र से लगातार 8 बार लोकसभा चुनाव जीतने का रिकार्ड जगजीवन राम के नाम है। 
  157. लोकसभा में सरकार का मुख्य सचेतक संसदीय मामले का मंत्री होता है। 
  158. लोकसभा के पहले उपाध्यक्ष अन्नत शयनन आयंगर थे। 
  159. देश के छ: राज्यों में विधान परिषदों का गठन किया गया विधान सभा के सदस्यों की संख्या कम से कम 60 तथा अधिकतम 500 हो सकती है। 
  160. किन्तु गोवा इसका अपवाद है, वहाँ केवल 40 सदस्य हैं। 
  161. संघ शासित क्षेत्रों के लिए प्रशासकों की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है। 
  162. ऐसे संघ शासित क्षेत्र जिनकी विधायिका नहीं है उनके लिए विधियों का निर्माण संसद करती है। 
  163. संविधान के अनुच्छेद 370 के अर्न्तगत जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया है। 
  164. जम्मू-कश्मीर के संविधान को 26 नवम्बर 1957 को लागू किया गया।
  165. भारत में उच्च न्यायालयों की कुल संख्या 21 है। 
  166. सबसे अधिक खण्डपीठ गुवाहाटी उच्च न्यायालय के पास उच्च न्यायालय के न्यायधीश के पद पर नियुक्त होने वाली पहली महिला न्यायधीश दुर्गा बनर्जी थीं। 
  167. दिल्ली एक मात्र संघ शासित क्षेत्र है जिसका अपना उच्च न्यायालय है। 
  168. न्यायधीशों की सबसे कम संख्या सिक्किम उच्च न्यायालय में है। 
  169. लोकसभा में अनुसूचित जाति के लिए 79 और अनुसूचित जनजाति के लिए 40 स्थान सुरक्षित हैं। 
  170. संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाओं को शामिल किया जाता है।
  171. मूल संविधान के आठवीं अनुसूची में केवल 14 भाषाएँ थी। 
  172. बाद में संविधान द्वारा चार भाषाएँ-कोंकणी, सिन्धी, नेपाल और मणिपुरी को शामिल किया गया है। 
  173. संसद तथा विधानमंडल के सदस्यों के निर्वाचन सम्बन्धी विवादों को उच्च न्यायालय द्वारा निपटाया जाता है। 
  174. किसी राजनैतिक दल को राष्ट्रीय दल के रूप में मान्यता निर्वाचन आयोग प्रदान करता है। 
  175. इसके लिए जारी है कि उस दल को 4 राज्यों में कम से कम 4% मत मिलें। 
  176. किसी मान्यता प्राप्त राजनैतिक दल को चुनाव आयोग द्वारा चुनाव चिन्ह के आबंटन के निर्णय के विरूद्ध अपील सर्वोच्च न्यायालय में की जाती है। 
  177. प्रथम लोकसभा का चुनाव 25 अक्टूबर, 1951 से 2 फरवरी, 1952 तक सम्पन्न हुआ। 
  178. इस लोकसभा चुनाव में 14 राजनैतिक दलों को राष्ट्रीय का दर्जा प्रदान किया गया था। 
  179. योजना आयोग का अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है। 
  180. केन्द्र-राज्य सम्बन्धों के सम्पूर्ण ढांचे पर विचार विमर्श के लिए 1983 में केन्द्र सरकार ने सरकारिया आयोग का गठन किया था। 
  181. देश में पंचायती राज व्यवस्था का आरम्भ बलवन्त राय मेहता समिति की रिर्पोट के आधार पर किया गया है। 
  182. देश में सर्वप्रथम पंचायती राज व्यवस्था 1959 में राजस्थान के नागौर से शुरू की गयी।  इनका ढांचा त्रि-स्तरीय है। 
  183. अशोक मेहता समिति ने पंचायती राज संस्थानों के द्वि-स्तरीय ढाँचे का सुझाव दिया था। 1
  184. 953 में गठित राज्य पुर्नगठन आयोग के अध्यक्ष फजल अली थे। 
  185. लोक सभा का सचिवालय लोकसभा के अध्यक्ष के अर्न्तगत कार्य करता था। 
  186. भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी का चुनाव चिन्ह 1952 के आम चुनाव से अब तक अपरिवर्तित है।
  187. पहली बार राष्ट्रपति ने मुख्य चुनाव आयुक्त की सहायता के लिए दो अन्य चुनाव आयुक्तों एस.एस. धनोबा व वी. एस. सहगल की 1983 में नियुक्ति की थी। 
  188. संसद ने 1950 में भारत की आकस्मिक निधि का गठन किया था। 
  189. भारत के संविधान के अनुच्छेद 394 (क) के अनुसरण में हिन्दी में संविधान का प्रधिकृत पाठ प्रकाशित किया गया। 
  190. इसे 58वां संविधान संशोधन द्वारा 1987 में तैयार किया गया। 
  191. 1955 में गठित राजभाषा आयोग के पहले अध्यक्ष बी.जी. खेर थे। 
  192. केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण की स्थापना 2 अक्टूबर 1985 को हुयी। 
  193. अन्तर्राष्ट्रीय परिषद के गठन की सिफारिश सरकारिया आयोग ने की थी।
  194. 1966 में दिल्ली उच्च न्यायालय के गठन से पूर्व दिल्ली राज्य क्षेत्र इलाहाबाद उच्च न्यायालय की अधिकारिता में था। 
  195. संविधान लागू होने के बाद पहली बार त्रिशुंक संसद का गठन 1989 में हुआ। 
  196. भारत में पहली बार मतपत्र और अमिट स्याही का प्रयोग तीसरे निर्वाचन (1962) में किया गया। 
  197. किसी भी उच्च न्यायालय की पहली महिला मुख्य |
  198. न्यायधीश बनने का सौभाग्य न्यायमूर्ति लीला सेठ की है। 
  199. 1952 में भारत में सामुदायिक विकास कार्यक्रम की शुरूआत अमेरिका के तकनीक सहयोग से हुयी। 
  200. लोकसभा में मान्य विरोधी दल का दर्जा किसी भी दल का प्रापत करने के लिए सदस्यों की संख्या सदन की कुल संख्या का 1/10 भाग होना चाहिए। 
  201. संसद में सबसे अधिक अधिनियम 1976 में पारित किये गये। 
  202. सर्वप्रथम अनुच्छेद 356 का प्रयोग केरल में 1956 में किया गया।
  203. संघीय मंत्रिपरिषद का कोई भी मंत्री लोकसभा या राज्यसभा से 4 से अधिक समितियों का सदस्य नहीं बन सकता है। 
  204. भारत के राष्ट्रपति के निर्वाचन में संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य तथा राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं। 
  205. संविधान की दसवीं अनुसूची में दल-बदल के आधार पर किसी सांसद/विधायक को अयोग्य ठहराए जाने का प्रावधान है। 
  206. पंचवर्षीय योजनाओं का अनुमोदन तथा पुनर्निरीक्षण राष्ट्रीय विकास परिषद द्वारा किया जाता है। 
  207. भारत के महान्यायवादी को संसद की कार्यवाहियों में भाग लेने तथा सभी न्यायालयों में सुने जाने का अधिकार प्राप्त संघ संविधान समिति के अध्यक्ष जवाहर लाल नेहरू थे। 
  208. डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने गोलमेज सम्मेलन की तीनों बैठकों में भाग लिया था। 
  209. संविधान बनाने वाली प्रारुप समिति के अध्यक्ष डॉ. अम्बेडकर थे। 
  210. संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसम्बर, 1946 को हुई। 
  211. संविधान की सूचियों में शिक्षा समवर्ती सूची में है। राज्य सूची के किसी विषय को राष्ट्रीय महत्व का घोषित करने का विशेष अधिकार राज्य सभा को प्राप्त है। 
  212. 2/3 बहुमत से राज्य सभा अखिल भारतीय सेवाओं का सृजन कर सकता है। 
  213. संविधान का अनुच्छेद 40 राज्य सरकारों को पंचायतों को गठित करने का निर्देश देता है। उपराष्ट्रपति के चुनाव में संसद के दोनों सदनों के सदस्य भाग लेते हैं। 
  214. राज्य सभा का सभापति सदन का सदस्य नहीं होता।
  215. संविधान के भाग- III को भारत का मैग्नाकार्टा कहा जाता है। 
  216. भारतीयों को सत्ता के हस्तान्तरण का उल्लेख सर्वप्रथम क्रिप्स प्रस्ताव 1942 में किया गया ।
  217. भारतीय राज्यों के नाम और सीमा क्षेत्र में परिवर्तन का अधिकार संसद को प्राप्त है।
  218. भारतीय संविधान का सबसे बड़ा स्रोत भारतीय शासन अधिनियम, 1935 को माना जाता है। 
  219. भारत की स्वतन्त्रता के समय ब्रिटेन में लेबर पार्टी की सरकार थी। प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली थे। 
  220. भारत का संविधान 22 भागों में विभक्त है। केन्द्रीय निर्वाचन आयुक्त अधिकतम 65 वर्ष की आयु तक पद पर रह सकता है। 
  221. संसद के दो अधिवेशनों के मध्य अधिकतम 6 महीने का अन्तराल हो सकता है। 
  222. संसद के किसी सदस्य की असदस्यता 60 दिन तक लगातार अनुपस्थित रहने पर समाप्त हो जाती है। 
  223. भारतीय संविधान में निर्धारित किए गए के अनुसार लोकसभा में सदस्यों की संख्या अधिकतम 552 हो सकती है। 
  224. भारत सरकार का संवैधानिक अध्यक्ष राष्ट्रपति होता है। 
  225. लोक सभा अध्यक्ष का चुनाव लोकसभा के सदस्य करते हैं। 
  226. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता उन्मूलन से सम्बन्धित है। 
  227. नए केन्द्रीय मन्त्रालय/विभाग का निर्माण प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति करता है। 
  228. संविधान में अनुच्देद 12 से 35 तक भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकारों का वर्णन है। 
  229. व्यक्ति, निगम अथवा अधीनस्थ अभिकरण जिस कार्य को करने के लिए आबद्ध है उस कार्य को करने के लिए परमादेश (Mandamus) की रिट जारी की जाती है। 
  230. कर्मचारी चयन आयोग का गठन 1 जुलाई, 1976 को हुआ। 
  231. राजभाषा विभाग गृह मन्त्रालय के अनतर्गत कार्य करता 73वाँ संविधान संशोधन (1992) पंचायत राज के सृदृढ़ीकरण से सम्बन्धित है। 
  232. वर्तमान में सात राजनीतिक दल भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय दल हैं। 
  233. मौलिक अधिकारों की सुरक्षा हेतु न्यायालय पाँच प्रकार के लेख (रिट) जारी कर सकता है। 
  234. राष्ट्रपति के निर्वाचन से सम्बन्धित विवादों का विनिश्चय उच्चतम न्यायालय करता है। 
  235. संसद के संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता लोक सभा अध्यक्ष करता है तथा उसकी अनुपस्थिति में लोकसभा का उपाध्यक्ष करता है। 
  236. लोक सभा की वर्तमान सदस्य संख्या 2026 तक अपरिवर्तनीय है।
  237. यदि मृत्यु, त्यागपत्र अथवा हटाए जाने की स्थिति में भारत के राष्ट्रपति का पद रिक्त हो जाए तो उस पद का कार्यभार उपराष्ट्रपति संभालता है। 
  238. संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य की पदावधि छ: वर्ष या | 65 वर्ष की आयु जो भी पहले हो होती है। 
  239. 42वें संविधान संशोधन (1976) को ‘मिनी कंस्टीट्यूशन’ कहा जाता है। 
  240. संविधान में संशोधन की प्रक्रिया का उल्लेख अनुच्देद 368 में किया गया है। 
  241. दादर और नागर हवेली भारत में शामिल होने से पूर्व पुर्तगाल के उपनिवेश थे। 
  242. 36वें संविधान संशोधन द्वारा सिक्किम को भारत संघ में पूर्ण राज्य के रूप में शामिल किया गया। 
  243. केन्द्र व राज्यों के मध्य वित्त का बँटवारा वित्त आयोग की सिफारिश पर होता है। 
  244. संविधान से राज्य द्वारा 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को निःशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराने का प्रावधान है। 
  245. यदि किसी विधि या संवैधानिक संशोधन को 9वीं अनुसूची में रख दिय जाए तो वह न्यायालय में बाद योग्य नहीं रह जायेगा। 
  246. भारत में पहली बार राष्ट्रीय आपात काल 1962 में किया गया। 
  247. संविधान के अनुच्छेद 360 में वित्तीय आपात स्थिति लागू करने का प्रावधान है। 
  248. राज्य सभा में राष्ट्रपति 12 सदस्यों को मनोनीत कर सकता है। 
  249. स्वतन्त्र भारत में राज्य सभा के प्रथम सभापति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन थे। 61वें संविधान संशोधन द्वारा मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गयी। 
  250. संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना की संस्तुति पर किया गया था। 
  251. संविधान का भाग IV (अनुच्छेद 36 से 51 तक) राज्य के नीति निर्देशक तत्व से सम्बन्धित हैं। 
  252. कलकत्ता, मुम्बई और मद्रास उच्च न्यायलयों की स्थापना 1861 में की गई। 
  • 1854 का शिक्षा पर चार्ल्स वुड डिस्पैच :- चार्ल्स वुड जो अर्ल ऑफ एवरडीन की मिली जुली सरकार में बोर्ड ऑफ कन्ट्रोल के अध्यक्ष थे, ने 1854 में भारत की भावी शिक्षा के लिए एक वृहद योजना बनाई जिसमें अखिल भारतीय आधार पर शिक्षा की नियामक पद्धति का गठन किया गया।  इसे प्रायः भारतीय शिक्षा का मैग्ना कार्टा कहा जाता है।
  • हन्टर शिक्षा आयोग 1882-83 :- शिक्षा के क्षेत्र में 1854 के पश्चात हुई प्रगति की समीक्षा करने के लिए 1882 में सरकार ने डब्ल्यू डब्ल्यू हण्टर की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया। इसका कार्य केवल प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा समीक्षण तक ही सीमित था।
  • सैडलर वि0 वि0 आयोग 1917-19 :- इस आयोग को कलकत्ता विश्वविद्यालय के प्राथमिक से विश्वविद्यालय स्तर तक की शिक्षा पर अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया। 
  • हार्टोग समिति, 1929 :- सन् 1929 में भारतीय परिनियत (Statutory) आयोग ने सर फिलिप हार्टोग की अध्यक्षता में एक सहायक समिति नियुक्त की जिसे शिक्षा के विकास पर रिपोर्ट देने को कहा गया। 
  • राधाकृष्णन आयोग 1948-49 :- नवम्बर, 1948 में सरकार ने डॉ. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक आयोग नियुक्त किया जिसे विश्व विद्यालयी शिक्षा पर अपनी रिपोर्ट और उसके सुधार के लिए सिफारिशें देनी थीं।
  • कोठारी शिक्षा आयोग 1964-66 :- जुलाई 1964 में एक आयोग डी. एस. कोठारी की अध्यक्षता में नियुक्त किया गया जिसे सरकार को शिक्षा के सभी पक्षों तथा प्रक्रमों के विषय में राष्ट्रीय नमूने की रूप रेखा, साधारण सिद्धान्त तथा नीतियों की रूप रेखाबनाने का आदेश था।
  • शिक्षा की राष्ट्रीय नीति :- मुख्यतः कोठारी आयोग की सिफारिशों पर आधारित करके 1968 में भारत सरकार ने शिक्षा पर एक प्रस्ताव पारित किया।
  • नवीन शिक्षा नीति 1986 :- नवीन शिक्षा नीति का उद्देश्य हमारे गतिहीन समाज को ऐसे गतिशील समाज में परिवर्तित करना है जिसमें विकास तथा परिवर्तन के प्रति वचनबद्धता हो।
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संविधान संशोधन ( Constitutional amendment )

संविधान संशोधन (अनु. 368) :

संविधान के अनुच्छेद 368 में संशोधन की प्रक्रिया को बताया गया है। संविधान संशोधन की तीन विधियों को अपनाया गया है। 

1. साधारण बहुमत द्वारा संशोधन 

2. विशेष बहुमत द्वारा संशोधन

3. विशेष बहुमत तथा आधे से अधिक राज्य के विधान मंडलों के अनुमोदन द्वारा संशोधन 

  • 1. साधारण विधि : संसद के साधारण बहुमत द्वारा पारित विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने पर कानून बन जाता है। इसके अन्तर्गत राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति मिलने पर निम्न संशोधन किए जा सकते हैं। (1) नये राज्यों का निर्माण (2) राज्य क्षेत्र, सीमा और नाम में परिवर्तन 
  • 2. विशेष बहुमत द्वारा संशोधन : यदि संसद के प्रत्येक सदन द्वारा कुल सदस्यों का बहुमत तथा उपस्थित और मतदान में भाग लेने वाले सदस्यों के 2/3 मतों से विधेयक पारित हो जाए तो राष्ट्रपति तो राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलते ही वह संशोधन संविधान का अंग बन जाता है। न्यायपालिका तथा राज्यों के अधिकारों तथा शक्तियों जैसी कुछ विशिष्ट बातों को छोड़कर संविधान की अन्य सभी व्यवस्थाओं में इसी प्रक्रिया के द्वारा संशोधन किया जाता है। 
  • 3.संसद के विशेष बहुमत एवं राज्य विधान मंडलों की स्वीकृति से संशोधन : संविधान के कुछ अनुच्छेदों में संशोधन के लिए विधेयक को संसद के दोनों सदनों के विशेष बहुमत तथा राज्यों के कुल विधान मण्डलों में से आधे द्वारा स्वीकृति आवश्यक है। इसके द्वारा किए वाले संशोधन के विषय प्रमुख है। 
  • (i) राष्ट्रपति का निर्वाचन 
  • (ii) राष्ट्रपति निर्वाचन की कार्य पद्धति 
  • (iii) संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार 
  • (iv) राज्यों की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार 
  • (v) संविधान संशोधन की प्रक्रिया से सम्बन्धित प्रावधान

प्रमुख संशोधन 

भारतीय संविधान में संशोधित हुए प्रमुख संशोधन हैं

चौथा संशोधन (1955) : इसके अनुसार व्यवस्था की गई कि राज्य किसी सरकारी उद्देश्य को पूरा करने के लिए व्यक्तिगत जायदाद का अधिगृहण कर सकता है। इसके अतिरिक्त मुआवजे के लिए निर्धारित की गई राशि की मात्रा को न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है।

नौवां संशोधन (1960) : इसके द्वारा संविधान की प्रथम अनुसूची में परिवर्तन किया गया। इस परिवर्तन की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि 1958 के भारत-पाकिस्तान सीमा समझौते | के मध्य भारत का कुछ भाग पाकिस्तान को देना था।

दसवां संशोधन (1961) : पुर्तगाली बस्तियों दादरा एवं | नगर हवेली को भारत संघ में शामिल करके शासन का भार | राष्ट्रपति को सौंपा गया। 

16वा संशोधन (1963) : इस संशोधन द्वारा राज्यों की सरकारों को अधिकार दिया गया कि वह देश की एकता और अखंडता के लिए मूल अधिकारों के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा सकती है।

26वां संशोधन (1971) : इस संशोधन द्वारा भारतीय रियासतों | के शासकों के ‘प्रिवीपर्स’ और विशेषाधिकारों को समाप्त किया गया। | यह संशोधन माधव राव के मामले में उच्चतम न्यायालय के निर्णय के परिणामस्वरूप पारित किया गया।31वां संशोधन (1973) : इसके अन्तर्गत लोकसभा की चुनी जाने वाली सीटों की संख्या 525 से बढ़ाकर 545 की गई और दो आंग्ल भारतीय सदस्यों का मनोनयन राष्ट्रपति द्वारा किया जाना जारी रहेगा।

36वां संशोधन (1975) : सिक्किम को भारतीय संघ का पूर्ण सदस्य बनाने और उसे संविधान की प्रथम अनुसूची में शामिल करने और सिक्किम को राज्यसभा और लोकसभा में एक-एक स्थान देने के लिए यह अधिनियम बनाया गया।

42वां संशोधन (1976) : इस संशोधित विधेयक की निम्न शर्ते हैं संविधान की प्रस्तावना में प्रभुत्व सम्पन्न लोकतन्त्रात्मक गणराज्य के स्थान पर प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी धर्म निरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य शब्द और ‘राष्ट्र की एकता’ और अखंडता’ शब्द रखे गये।।

44वां संशोधन (1978) : संपत्ति के अधिकार को, जिसके कारण संविधान में कई संशोधन करने पड़े, मूल अधिकार के रूप में हटाकर केवल वैधिक अधिकार बना दिया गया। अनुच्छेद 352 का अनुशोधन किया गया कि आपात स्थिति की घोषण के लिए एक कारण ‘सशस्त्र विद्रोह’ होगा। व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को और अधिक शक्तिशाली बनाया गया। इसके अनुसार निवारक नजरबंदी कानून के आधीन व्यक्ति को किसी भी स्थिति में 2 महिने से अधिक अवधि के लिए नजरबंद नहीं रखा जा सकता, जब तक कि सलाहकार बोर्ड यह रिपोर्ट नहीं देता कि ऐसी नजरबंदी के पर्याप्त कारण है।

45वां संशोधन (1980) : संसद और राज्य विधान मण्डलों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जाति के लिए सीटों का आरक्षण और एंग्लो-भारतीयों के लिए नामजदगी की सुविधा को दस वर्ष बढ़ाया गया।

52वां संशोधन (1985) : यह संशोधन ‘दल-बदल रोक बिल’ के नाम से जाना गया। इसके अनुसार यदि कोई संसद सदस्य या विधान सभा का सदस्य राजनीतिक दल बदलता है या दल द्वारा निकाल दिया जाता है जिसने उसे चुनाव में खड़ा किया था या कोई निर्दलीय उम्मीदवार जो चुने जाने के बाद 6 महिने के अंदर किसी राजनैतिक दल का सदस्य बन जाता है वह सदन का सदस्य होने के अयोग्य कराकर दिया जाएगा इस अधिनियम में राजनीतिक दलों के विभाजन और विलय के संबंध में व्यापक व्यवस्था है।

55वां संशोधन (1986) : इसमें केन्द्रशासित प्रदेश अरुणाचल प्रदेश को राज्य का दर्जा दिये जाने के भारत सरकार के प्रस्ताव को लागू किया गया।

61वां संशोधन (1989) : अनुच्छेद 326 का संशोधन करके मताधिकार की आयु 21 से घटाकर 18 कर दी गई। 

62वां संशोधन (1989) : अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों का आरक्षण और ‘एंग्लो इंडियन’ समुदाय का मनोनयन द्वारा प्रतिनिधित्व का प्रावधान जो 40 वर्षों तक था, उसे दस वर्ष और जारी किया जाएगा।

63वां संशोधन (1989) : 59वें संशोधन के तहत 1983 में पंजाब में आपात स्थिति के संबंध में जो प्रावधान किए गये थे उनकी अब आवश्यकता न होने के कारण अनुच्छेद 356 की धारा (5) और अनुच्छेद 359 (क) को हटा दिया गया।

69वां संशोधन (1991) : भारत ने दिल्ली केन्द्र शासित प्रदेश के प्रशासन को चुस्त करने के लिए 24 दिसम्बर 1987 में एक कमेटी गठित की और सिफारिश की गई कि ‘दिल्ली’ एक केन्द्र शासित प्रदेश रहेगी साथ ही इसमें विधान सभा तथा एक मंत्री परिषद भी होगी। 1991 का अधिनियम इन सिफारिशों को लागू करने के लिए पारित किया गया।

76वां संशोधन (1994) : शैक्षिक संस्थाओं में तथा लोकसेवा के पदों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़े वर्ग को आरक्षण प्रदान किया गया। नवम्बर 1992 में सर्वोच्च न्यायालय में इस आरक्षण की अधिकतम सीमा 50% निर्धारित की।

77वां संशोधन (1995) : अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति को पदोन्नति में आरक्षण।

81वां संशोधन (2000) : अनुच्छेद 16 की किसी भी व्यवस्था के अधीन अनुसूचित जातियों ओर अनुसूचित जनजातियों की खाली सरकारी पद आरक्षित है। यदि वे नहीं भरे जाते हैं तो अगले वर्ष पृथक समझी जायेगी।

83वां संशोधन (2000) : इसके अन्तर्गत 243 ए में संशोधन कर व्यवस्था की गई है कि अरुणाचल प्रदेश में अनुसूचित जातियों के लिए पंचायतों में आरक्षण करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि अरुणाचल पूर्ण रूप से अनुसूचित जातियों से आबाद हैं।

84वां संशोधन (2001) : इसमें 1991 की जनगणना के अनुसार सुनिश्चितकी गई आबादी के आधार पर प्रत्येक राज्य केलिए आबंटित लोक सभा व विधान सभा सीटों की संख्या में परिवर्तन किये बिना राज्यों के निर्वाचन क्षेत्र को परिवर्तित व पुनर्गठित किया जा सके।

85वां संशोधन (2001) : इस कानून द्वारा संविधान के अनुच्छेद 16(4a) में संशोधन किया गया है ताकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सरकारी कर्मचारियों को आरक्षण नियमों के तहत पदोन्नति के मामले में आनुषंगिक वरीयता प्रदान की जा सके। इसे 17 जून 1995 से प्रभावी माना गया है।

87वां संशोधन (2002) : 6 वर्ष से 14 वर्ष तक के बच्चों को शिक्षा का मौलिक अधिकार दिया गया है इसमें अनुच्छेद 21 अ जोड़ा गया है, जिसके तहत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों की शिक्षा मुफ्त व अनिवार्य बना दी गई है।

89वाँ संशोधन (2003) : 89वें संविधान संशोधन द्वारा अनु. 338 में संशोधन किया गया है और एक नया अनु. 338क जोड़ा गया है। अनु. 338 में संशोधन करके अनुसूचित जातियों के लिए एक आयोग की स्थापना का उपबन्ध किया गया है। अनु. 338 के हाशिए के शीर्षक के स्थान पर “राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग’ रखा जाएगा।

91वां संशोधन : मंत्रीपरिषद में प्रधानमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या सदन के सदस्यों की कुल संख्या के 15 | प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिये। यह व्यवस्था राज्यों के लिए भी लागू है। बशर्ते कि राज्य में मंत्रियों की कुल संख्या मुख्यमंत्री सहित 12 से कम न हों।

92वां संशोधन (2003) : इस संशोधन द्वारा संविधान की 8वीं अनुसूची में संशोधन करके 4 भाषाओं को राजभाषा के रूप में जोड़ दिया गया है जो इस प्रकार है- बोड़ो, डोंगरी, मैथिली और संथाली। इसके पश्चात् 8वीं अनुसूची में अब कुलभाषाओं की संख्या 22 हो गई है।

93वां संशोधन (2005) : शिक्षा संस्थानों में अनुसूचित जाति जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के नागरिकों के दाखिले के लिए सीटों में आरक्षण की व्यवस्था है। ।

94वां संशोधन (2006) : मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 | और बिहान पुनर्गठन अधिनियम, 2000 द्वारा झारखण्ड और छत्तीसगढ़ दो नए राज्य बनाए गए हैं। छत्तीसगढ़ और झारखण्ड राज्यों के पुनर्गठन के परिणामस्वरूप बिहार और मध्य प्रदेश का सम्पूर्ण अनुसूचि क्षेत्र झारखण्ड में स्थानान्तरित कर दिया गया है। अतः इस संशोधन अधिनियम द्वारा अनुच्देद 164 के खण्ड (1) में बिहार राज्य के स्थान पर ‘छत्तीसगढ़ और झारखण्ड’ शब्दों को रखा गया है।

95वां संशोधन (2009) : इस संशोधन द्वारा संविधान के अनुच्छेद 334 में संशोधन करके शब्दावली 60 वर्ष के स्थान पर शब्दावली 70 वर्ष जोड़ दिया गया है अर्थात् अब इन वर्गों के | लिये लोकसभा और राज्य विधान सभाओं में आरक्षण 70 वर्ष तक अर्थात् 2010 के पश्चात् तक चलता रहेगा। 

96वां संशोधन (2011) : आठवीं अनुसूची की 15वीं प्रविष्टि में उड़िया की जगह ओडिया शब्द स्थापित किया जाता है।97वा संशोधन (2011) : भारतीय संविधान के भाग 3 के अनुच्छेद 19(1)(ग) में ‘सहकारी समितियां’ शब्द जोड़ा गया है। अब अनुच्छेद 19(1)(ग) के अनुसार, सभी नागरिकों को संगम या संघ या सहकारी समितियां बनाने का अधिकार होगा।

संविधान के भाग 4 (राज्य की नीति के निदेशक तत्व) में अनुच्छेद 43 ख जोड़ा गया है। नये अनुच्छेद 43ख के अनुसार, “राज्य सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन (voluntary formation), लोकतांत्रिक नियंत्रण (democratic control) तथा व्यवसायिक प्रबंधन (professional management) को विकसित करने का प्रयास करेगा।” 

भारत में पंचायती राजव्यवस्था :

भाग-9 पंचायत Part IX-The panchayat (क से ण) तथा अनुसूची 11 में प्रावधान किया गया है।

पंचायती राज का शुभारम्भ स्वतंत्र भारत में 2 अक्टूबर, 1959 ई. को भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के द्वारा राजस्थान राज्य के नागौर जिला में हआ। इसके बाद । 1959 में आन्ध्रप्रदेश में पंचायती राज शुरू हुआ। 

पंचायती राज के सम्बन्ध में संवैधानिक प्रावधान :

संविधान के अनु. 40 में राज्यों के गठन का निर्देश दिया गया है इसके साथ ही संविधान की 7वीं अनुसूची (राज्य सूची) की प्रविष्टि 5 में ग्राम पंचायतों को शामिल करके इसके सम्बन्ध में कानून बनाने का अधिकार राज्य को दिया गया है। 

73वाँ संविधान संशोधन : 

73वाँ संविधान 1993 संशोधन की प्रमुख बातें

1. इसके द्वारा पंचायती राज की त्रिस्तरीय ढाँचे का प्रावधान किया गया हैं 

  • ग्राम या नगर पंचायत 
  • तहसील पंचायत
  • जिला पंचायत 

2. पंचायती राज संस्था के प्रत्येक स्तर में एक तिहाई स्थानों पर महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गयी हैं 

3. ग्राम पंचायत का कार्यकाल 5 वर्ष तक के लिये होता है। 

यह अनुसूची संविधान में 74वें संवैधानिक संशोधन (1993) के द्वारा जोड़ी गई है। इसमें शहरी क्षेत्र की स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को कार्य करने के लिए 18 विषय प्रदान किए गए हैं। इसके द्वारा संविधान के भाग 9 (क) अनुच्छेद 243 (त से य छ तक) एवं 12वीं अनुसूची का प्रावधान किया गया है। 74वाँ संविधान संशोधन की प्रमुख बातें

(a) नगरपालिकाएँ तीन प्रकार की होगी

1. नगर पंचायत : ऐसे ग्रामीण क्षेत्र जो नगर क्षेत्र में परिवर्तित हो रहा है। 

2. नगर परिषद : छोटे नगर क्षेत्र के लिए 

3. नगर निगम : बड़े नगर क्षेत्र के लिए 

Note : नगर निगम की स्थपना सर्वप्रथम मद्रास 1687 ई. में की गयी है। 

राष्ट्रीय दल का दर्जा हासिल करने के लिए आवश्यक शर्ते : 

(a) लोक सभाआम चुनाव अथवा राज्य विधान सभा चुनाव में किन्हीं चार अथवा अधिक राज्यों में कुल डाले गए वैध मतों का छह प्रतिशत प्राप्त करना जरूरी होगा। 

(b) इसके अलावा इसे किसी एक राज्य अथवा राज्यों से विधान सभा की कम से कम चार सीटें जीतनी होंगी। 

(c) लोक सभा में दो प्रतिशत सीटें हो और ये कम से कम तीन विभिन्न राज्यों में हासिल की गयी हों। 

74वाँ संविधान संशोधन : 1992 में यह संशोधन किया गया और इसके द्वारा स्थानीय नगरीय शासन के सम्बन्ध में व्यवस्था का प्रावधान किया गया और बारहवीं अनुसूची जोड़कर उसे 18 विषय आबंटित किये गये। इसमें भी महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गई है। यह अधिनियम 1 जून, 1993 को लागू किया गया।

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भारतीय संविधान विविध ( Indian Constitution Miscellaneous )

संविधान सभा की प्रमुख समितियाँ एवं उनके अध्यक्ष

1. संचालन समितिडॉ. राजेन्द्र प्रसाद
2. संघ संविधान समितिपं. जवाहर लाल नेहरू
13. प्रान्तीय संविधान समितिसरदार बल्लभ भाई पटेल
4. | प्रारूप समितिडॉ. भीम राव अम्बेडकर
5. | झण्डा समितिजे. बी. कृपलानी
6. | संघ शक्ति समितिपं. जवाहर लाल नेहरू

शपथ एवं त्यागपत्र

पद शपथत्यागपत्र
राष्ट्रपतिमुख्य न्यायाधीशउपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपतिराष्ट्रपतिराष्ट्रपति
राज्यपाल राज्य उच्च राष्ट्रपति न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रपति
मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रपतिराष्ट्रपति
प्रधानमंत्री राष्ट्रपतिराष्ट्रपति
लोकसभा अध्यक्षशपथ नहीं होताउपाध्यक्ष

पंचायती राजव्यवस्था में सुधार हेतु गठित समितियाँ

बलवन्त राय मेहता समिति1957 ई.
अशोक मेहता समिति1977 ई.
पी. वी. के. राय समिति1985 ई.
एल. एम. सिंधवी समिति1986 ई.
64वाँ संविधान संशोधन1989 ई.
73वाँ संविधान संशोधन1993 ई.

वर्तमान में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दल

1. | भारतीय जनता पार्टी कमल
2. | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसपंजा
3. | भारतीय साम्यवादी दलहंसिया और बाली
4. | राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी घड़ी
5. | बहुजन समाज पार्टीहाथी (असम को छोड़कर)
6. | मार्क्सवादी साम्यवादी दलहसियां हथौड़ा एवं तारा
7. | राष्ट्रीय जनता दललालटेन

कैबिनेट मिशन (1945 ई.) के प्रस्ताव पर गठित अन्तरिम मंत्रिमण्डल

1. जवाहर लाल नेहरू कार्यकारी परिषद के उपाध्यक्ष विदेशी मामले तथा राष्ट्रमण्डल
2. बलदेव सिंहरक्षा
3.| बल्लभ भाई पटेलगृह, सूचना तथा प्रसारण
4. सी. राज गोपालचारीशिक्षा
5. जगजीवन रामश्रम
6. जॉन मथाईउद्योग तथा आपूर्ती
7. राजेन्द्र प्रसादखाद्य एवं कृषि

राज्य सभा सदस्य, जो प्रधानमंत्री बने |

1. इंदिरा गाँधी1966-67
2. एच. डी. देवगौड़ा1996-97
3. | आई. के. गुजराल1997-98
4. | डॉ. मनमोहन सिंह 2004

महत्वपूर्ण अधिकारियों का मासिक वेतन |

1. | राष्ट्रपति1,50,000 रुपये
2. | उपराष्ट्रपति1,25,000 रुपये
3. | लोकसभा अध्यक्ष1,25,000 रुपये
4. | राज्यपाल1,10,000 रुपये
सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश90,000 रुपये
6. | उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश90,000 रु
7. | उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीश80,000 रुपये
8. | नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक90,000 रुपये
9. | मुख्य चुनाव आयुक्त90,000 रुपये
10. | महान्यायवादी90,000 रुपये

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राज्य विधानमंडल :-विधानसभा, विधान परिषद् (State Legislature)

  • संविधान के अनुच्छेद 168 में प्रत्येक राज्य के लिए एक विधानमंडल का प्रावधान किया गया है जो राज्यपाल तथा एक या दो सदनों को मिलाकर बनता है।
  • वर्तमान समय में सिर्फ छह राज्यों में ही दो सदनों की  व्यवस्था है। आंध्र प्रदेश, जम्मू कश्मीर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, बिहार 

राज्य विधानमंडल के ये दो सदन हैं

1. विधानसभा और 2. विधान परिषद्

विधानसभा

राज्यस्थान अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित स्थानअनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित स्थान
1. आन्ध्र प्रदेश2943915
2. अरुणाचल प्रदेश6039
3. असम126816
4. बिहार2434828
5. झारखण्ड81
6. गोवा401
7. गुजरात1821326
8. हरियाणा9017
9. हिमांचल प्रदेश68163
10. जम्मू कश्मीर1006
11. कर्नाटक224332
12. केरल110131
13. मध्य प्रदेश2304475
14. छत्तीसगढ़90
15. महाराष्ट्र2881822
16. मणिपुर6019
17. मेंघालय6059
18. मिजोरम 4039
19. नागालैंड6059
20. उड़ीसा1472234
21. पंजाब11729
22. राजस्थान2003324
23. सिक्किम 32212
24. तमिलनाडु234433
25. त्रिपुरा60717
26. उत्तर प्रदेश403921
27. उत्तरांचल (उत्तराखण्ड)70
28. पश्चिम बंगाल2945917

संघ राज्य क्षेत्र

1. पाण्डिचेरी305
2. दिल्ली70

नोट : जम्मू-कश्मीर में विधान सभा सदस्यों की संख्या 100 है, लेकिन 24 चुनाव क्षेत्र पाकिस्तान द्वारा अधिगृहित क्षेत्र में हैं।


रचना:

  • विधानसभा एक जनप्रतिनिधि सभा होती है जिसके सदस्यों का चुनाव प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र के आधार पर राज्य की जनता द्वारा किया जाता है। 
  • किसी राज्य की विधानसभा में अधिकतम 500 और न्यूनतम 60 सदस्य हो सकते हैं। सिक्किम (32), गोवा (40), और मिजोरम (40) की विधान सभा में इससे कम की संख्या नहीं हो सकती।
  • सबसे अधिक सदस्य संख्या उत्तर प्रदेश की विधानसभा का है जबकि सिक्किम विधानसभा के सदस्यों की संख्या सबसे कम है। 
  • राज्यपाल के मत में यदि आंग्ल भारतीय समुदाय के सदस्यों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है तो वह आंग्ल भारतीय समुदाय को एक सदस्य को राज्य विधानसभा में मनोनित कर सकता है।

 विधानसभा का सदस्य बनने के लिए आवश्यक है कि व्यक्ति

  • 1. भारत का नागरिक हो 
  • 2. कम से कम 25 वर्ष की आयु का हो 
  • 3. भारत सरकार अथवा राज्य सरकार के अधीन कोई। लाभ का पद न धारण किया हो। 
  • 4. विकृतचित्त अथवा दिवालिया न हो 
  • कोई व्यक्ति एक ही समय में राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों या एक से अधिक विधानमंडलों का सदस्य नहीं हो सकता है। 
  • राज्य विधानमंडल का कोई सदस्य सदन की अनुमति के बिना 60 दिन तक अधिवेशनों से दूर रहता है, तो सदन द्वारा उसका स्थान रिक्त घोषित किया जा सकता है। 

अवधि:

  • विधानसभा की अवधि उसकी पहली बैठक से लेकर 5 वर्षों तक की होती है।
  •  आपातकाल में विधानसभा की अवधि एक वर्ष के लिए बढ़ायी जा सकती है 
  • किन्तु आपातकाल की समाप्ति के पश्चात् किसी भी स्थिति में 6 माह से अधिक नहीं बढ़ायी जा सकती। 
  • जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है। वहाँ की विधानसभा में राज्यपाल 2 महिलाओं का मनोनयन करता है।

विधानसभा के पदाधिकारी 

  • लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की भाँति राज्य विधानसभा में भी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष होते हैं। 
  • अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव विधानसभा के सदस्य अपने ही सदस्यों में से करते हैं।
  • अध्यक्ष या उपाध्यक्ष की विधानसभा की सदस्यता समाप्त हो जाने पर उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ता है। 
  • वे त्यागपत्र देकर भी पदमुक्त हो सकते हैं। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष अपना त्यागपत्र एक-दूसरे को देते हैं। 
  • यदि विधानसभा अपने सदस्यों के बहुमत से अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष को हटाये जाने का संकल्प पारित कर दे तो उन्हें अपना पद त्यागना पड़ता है।
  • ऐसे संकल्प को पारित करने के लिए 14 दिन पहले सूचना देना आवश्यक होता है। 
  • जब अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष को उनके पद से हटाये जाने से संबंधित प्रस्ताव पर सदन में विचार हो रहा होता है तो वे सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते।
  • विधानसभा भंग हो जाने पर अध्यक्ष द्वारा अपना पद रिक्त नहीं कर दिया जाता, अपितु नयी विधानसभा द्वारा अपना अध्यक्ष चुन लिये जाने तक वह अपने पद पर बना रहता है। 
  • अध्यक्ष का प्रमुख कार्य विधानसभा की बैठकों की अध्यक्षता करना तथा उसकी कार्यवाहियों को विनियमित करना होता है। 
  • सदन में किसी मसले पर वाद-विवाद के दौरान वह व्यवस्था बनाये रखता है तथा सदन के नियमों की व्याख्या करता है। 
  • सदन में पेश किया गया विधेयक धन विधेयक है अथवा नहीं इसे प्रमाणित करने की शक्ति अध्यक्ष के ही पास होता है। 
  • अध्यक्ष की अनुपस्थिति अथवा पद रिक्तता की दशा में सदन की अध्यक्षता उपाध्यक्ष करता है। 
  • अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों का पद रिक्त हो जाये तो सदन द्वारा नियुक्त सदस्य अध्यक्ष के रूप में कार्य करता है।

विधान परिषद्

रचना:

  • किसी राज्य में विधान परिषद् की स्थापना अथवा उसके उत्पादन का दायित्व राज्य की विधानसभा पर छोड़ा गया है। 
  • यदि किसी राज्य की विधानसभा अपने कुल सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत द्वारा संकल्प पारित कर दे तो संसद विधि बनाकर उस राज्य में विधान परिषद का सृजन तथा विद्यमान विधान परिषद् अंत कर सकती है। 
  • भारत में 7 राज्यों में विधान परिषदों का अस्तित्व हैउत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आन्ध्रप्रदेश, तमिलनाडु और जम्मू-कश्मीर । 
  • नवीन विधान परिषद् के सृजन अथवा विद्यमान विधान परिषद् की समाप्ति से संबंधित प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 169 में किया गया है। 
  • विधान परिषद् में उस राज्य के विधान सभा के एक तिहाई से अधिक सदस्य नहीं हो सकते, लेकिन किसी भी दशा में विधान परिषद् की सदस्य संख्या 40 से कम नहीं हो सकती। 

विधान परिषद् के सदस्यों का चुनाव निम्नलिखित ढंग से होता है

  • 1. एक तिहाई सदस्यों का चुनाव नगरपालिका, जिला परिषद् तथा स्थानीय निकाय के सदस्यों द्वारा किया जाता है।
  • 2. एक तिहाई सदस्यों का चुनाव राज्य विधानसभा के सदस्यों द्वारा किया जाता है। 
  • 3. 1/12 सदस्यों का चुनाव माध्यमिक शिक्षा संस्थाओं के सेवारत शिक्षकों द्वारा किया जाता है। 
  • 4. 1/12 सदस्यों का चुनाव कम से कम 3 वर्ष पूर्व के स्नातकों द्वारा किया जाता हैं .
  • 5. 1/6 सदस्यों का मनोनयन राज्यपाल द्वारा साहित्य, विज्ञान, कला, समाज सेवा तथा सहकारिता आंदोलन के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त व्यक्तियों में से किया जाता है। 

विधान परिषद् राज्यसभा की ही तरह स्थायी सदन है। अतः इसे भंग नहीं किया जा सकता है। प्रति दो वर्ष बाद इसके एक तिहाई सदस्य सेवा निवृत्त हो जाते हैं। इस प्रकार विधान परिषद् के प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है।

विधान परिषद् का सदस्य चुने जाने के लिए आवश्यक है कि व्यक्ति

  • 1. भारत का नागरिक हो 
  • 2. न्यूनतम 30 वर्ष की आयु का हो 
  • 3. केन्द्र अथवा राज्य सरकार के अंतर्गत किसी लाभ के पद पर न हो 
  • 4. विकृतचित्त अथवा दिवालिया न हो

पदाधिकारी 

  • सभापति और उपसभापति विधान परिषद् के दो महत्वपूर्ण पदाधिकारी है। 
  • सभापति और उपसभापति का चुनाव विधान परिषद के सदस्यों द्वारा अपने ही सदस्यों में से किया जाता है। 
  • उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय उपराष्ट्रपति की तरह विधान परिषद् का कोई पदेन सभापति नहीं होता है। 
  • यदि विधान परिषद् के सदस्य अपने बहुमत से सभापति अथवा उपसभापति को उनके पद से हटाये जाने का संकल्प पारित कर दें तो उनहें अपना पद त्यागना पड़ता है। 
  • सभापति अथवा उपसभापति को उन्हें उनके पद से हटाये जाने संबंधी प्रस्ताव पेश करने की सूचना 14 दिन पूर्व दे देनी आवश्यक होती है। 
  • सामान्य विधेयक के सम्बन्ध में गतिरोध पैदा होने पर विधानमण्डल (विधान सभा और विधान परिषद) की संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नहीं है। साधारण विधेयक को विधान परिषद मात्र 3 माह तक रोक सकती है और धन विधेयक को वह 14 दिन तक रोक सकती है।

संघशासित क्षेत्रों का प्रशासन 

  • भारत में राज्यों के अतिरिक्त कुछ संघशासित प्रदेश भी हैं, जिनका प्रशासन केन्द्र द्वारा किया जाता है। 
  • भारत में सात केन्द्र शासित प्रदेश है। दिल्ली, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादर ओर नगर हवेली, दमन और द्वीव, लक्षद्वीप, पांडिचेरी और चंडीगढ़ 
  • अनुच्छेद 239 के अनुसार संघ शासित क्षेत्रों का प्रशासन राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है। राष्ट्रपति संघशासित क्षेत्रों का प्रशासन अपने द्वारा नियुक्त प्रशासक के माध्यम से करता है। 
  • राष्ट्रपति संघ शासित क्षेत्रों में प्रशासन के लिए किसी पड़ोसी राज्य के राज्य पाल को भी नियुक्त कर सकता है। 
  • राष्ट्रपति द्वारा संघ शासित क्षेत्रों के प्रशासन की शक्ति संसद द्वारा बनायी गयी विधि के अधीन होती है। 
  • अनुच्छेद 239(क) के अनुसार संसद विधि बनाकर किसी संघ शासित प्रदेश के लिए विधानमंडल तथा मंत्रिपरिषद् का उपबंध कर सकती है। 
  • वर्तमान में पांडिचेरी और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के लिए विधानमंडल और मंत्रिपरिषद् का उपबंध किया जा चुका है। 
  • राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त प्रशासक मंत्रिपरिषद् के सलाह के बिना संसद द्वारा बनायी गयी विधि के अनुसार संघ शासित क्षेत्र का प्रशासन करता है।
  • राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त प्रशासक को उप-राजयपाल अथवा मुख्य आयुक्त नाम दिया गया है। 
  • संघ शासित क्षेत्रों से संबंधित विधि बनाने की शक्ति संसद को प्राप्त है।
  • उन राज्यों के अतिरिक्त जहाँ कि विधान मंडल है, अन्य सभी संघ शासित क्षेत्रों के लिए राष्ट्रपति को नियम बनाने की शक्ति प्राप्त है। 
  • राज्यों के राज्यपालों की भाँति संघ शासित क्षेत्रों के प्रशासकों को भी अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्राप्त हैं 
  • अनुच्छेद-241 में संसद को यह शक्ति प्रदान की गई है कि वह विधि बनाकर किसी संघशासित क्षेत्र के लिए उच्च न्यायालय का गठन कर सकती है। 
  • वर्तमान में दिल्ली एकमात्र ऐसा संघ शासित प्रदेश है जिसके लिए उच्च न्यायालय का गठन किया गया है।

अन्तर्राज्यीय परिषद (अनु. 263) : • 

अन्तर्राज्यीय परिषद का गठन 1990 में प्रधानमंत्री बी. पी. सिंह के कार्यकाल में किया गया था। 

वित्त आयोग (अनु. 280) :

  • इसका गठन राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है। इसमें एक अध्यक्ष और 4 अन्य सदस्य होते हैं। आयोग के अध्यक्ष को सार्वजनिक मामलों में पर्याप्त अनुभव होना चाहिए।
  • आयोग के पहले अध्यक्ष के. सी. नियोगी (1952-57) थे। 

संघ की भाषा : • 

संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की भाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी लेकिन संविधान के प्रवर्तन के 15 वर्षों बाद अर्थात 1965 तक संघ के भाषा के रूप में अंग्रेजी का प्रयोग किया जाना था। पहला राजभाषा आयोग 1955 में बी. जी. खेर की अध्यक्षता में गठित किया गया था। 

1. असमिया 2. बंग्ला 3. गुजराती 4. हिन्दी 5. कन्नड़ 6. कश्मीरी 7. कोंकणी  8. मलयालम 9. मणिपुरी 10. मराठी 11. नेपाली 12. उड़िया 13. पंजाबी 14. संस्कृत  15. सिन्धी 16. तमिल 17. तेलुगु  18. उर्दू  19. बोडो  20. मैथिली, 21. डोंगरी  22. संथाली 

नोट : मूल संविधान में आठवीं अनुसूची में केवल 14 भाषायें थीं।

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मुख्यमन्त्री ( Chief Minister )

मुख्यमन्त्री ही राज्य की कार्यपालिका का वास्तविक प्रधान

मुख्यमन्त्री की नियुक्ति :

संविधान के अनुच्छेद 164 में कहा गया है कि मुख्यमयन्त्री की नियुक्ति राज्यपाल करेगा। व्यवहार के अन्तर्गत राज्यपाल के द्वारा विधानसभा के बहुमत दल के नेता को ही मुख्यमन्त्री पद पर नियुक्त किया जाता है।

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राज्यपाल / राज्यकार्य पालिका ( Governor / State Executive Council )

राज्य कार्यपालिका 

  • भारत में तीन स्तर पर सरकारें कार्य करती हैं- एक केन्द्र की सरकार, दूसरी राज्य सरकार तथा तीसरी स्थानीय सरकार। 
  • राज्य सरकारें भी केन्द्र के ही अनरूप गठित की जाती हैं। जिस प्रकार केन्द्र सरकार का औपचारिक संवैधानिक प्रमुख राष्ट्रपति होता है और व्यवहारिक वास्तविक शक्तियाँ मंत्रिपरिषद् में विहित होती हैं, जिसका अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है, उसी प्रकार राज्य सरकारों का औपचारिक, संवैधानिक प्रमुख राज्यपाल होता है और वास्तविक शक्तियाँ राज्य मंत्रिपरिषद् के पास होती हैं, जिसका अध्यक्ष मुख्यमंत्री होता है।

राज्यपाल (अनु. 153-167) 

राज्यपाल राज्य की कार्यपालिका का वैधानिक प्रधान होता है। मन्त्रिपरिषद राज्य की कार्यपालिका सत्ता की वास्तविक प्रधान होती है जिसका अध्यक्ष मुख्यमंत्री होता है। 

योग्यताएं: 

  • • वह भारत का नागरिक हो।
  • • उसकी आयु कम-से-कम 35 वर्ष हो। 
  • • उसे विधानसभा के सदस्य की योग्यता रखनी चाहिए। 
  • • उसे लाभ का पद नहीं धारण करना चाहिए। 

राज्यपाल की नियुक्ति (अनु. 155) :

राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है। संविधान द्वारा स्थापित संसदीय व्यवस्था में राज्यपाल केवल संवैधानिक प्रधान है। अतः राज्यपाल पद के सम्बन्ध में निर्वाचन के स्थान पर मनोनयन की पद्धति को अपनाया गया है। 

शपथ . राज्यपाल को हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश शपथ दिलवाता है। 

कार्यकाल (अनु. 156): • राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यन्त पद पर बना रह सकता है। परम्परा रूप में उसकी पदावधि 5 वर्ष निर्धारित है। संविधान के अनुसार एक ही व्यक्ति दो या दो से अधिक राज्यों का राज्यपाल भी नियुक्त किया जा सकता है। 

वेतन : राज्यपाल का वेतन 1,10,000 रु. प्रतिमाह है। यदि वह एक से अधिक राज्यों के राज्यपाल पद का निर्वहन कर रहा है तो उसके वेतन को राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित किया जाता है। 

राज्यपाल की शक्तियाँ :

  • वह मुख्यमंत्री की नियुक्ति करता है तथा उसके परामर्श से अन्य मन्त्रियों की नियुक्ति करता है। वह महाधिवक्ता और राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों की नियुक्ति करता है। 
  • वह व्यवस्थापिका का अधिवेशन बुलाता, स्थगित करता | ओर व्यवस्थापिका के निम्न सदन “विधानसभा’ को भंग कर सकता है। 
  • वह विधानमण्डल की पहली बैठक को सम्बोधित करता है ओर उसके बाद भी वह विधानमण्डल को सन्देश भेज सकता है। 
  • राज्य विधानमण्डल द्वारा पारित विधेयक पर राज्यपाल की स्वीकृति आवश्यक है। वह विधेयक को अस्वीकृत कर सकता है या उसे पुनर्विचार के लिए विधानमण्डल को लौटा सकता है। यदि विधानमण्डल दूसरी बार विधेयक पारित कर देता है तो राज्यपाल को स्वीकृति देनी होगी। कुछ विधेयकों को वह राष्ट्रपति के विचार के लिए सुरक्षित रख सकता है। 
  • यदि राज्य के विधानमण्डल का अधिवेशन न हो रहा हो, तो राज्यपाल अध्यादेश जारी कर सकता है। (अनु. 213) यह अध्यादेश विधानमण्डल की बैठक प्रारम्भ होने के छ: सप्ताह बाद तक लागू रहता है। यदि छ: सप्ताह पूर्व ही विधानमण्डल इस अध्यादेश को अस्वीकृत कर दे, तो उस अध्यादेश को उसी समय समाप्त समझा जायेगा।
  • जिन राज्यों में विधान परिषद् भी है वहाँ का राज्यपाल विधानपरिषद् के 1/6 सदस्यों को ऐसे लोगों में से नामजद करता है जिन्हें साहित्य, कला, विज्ञान, सहकारिता आन्दोलन तथा समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष तथा व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हो। 
  • राज्य विधानसभा में राज्यपाल की पूर्व स्वीकृति के बिना कोई भी धन विधेयक प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। वह व्यवस्थापिका के समक्ष प्रति वर्ष बजट प्रस्तुत करवाता है ओर उकसी अनुमति के बिना किसी भी अनुदान की मांग नहीं की जा सकती है। 
  • जिन विषयों पर राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार होता है उन विषयों सम्बन्धी किसी विधि के विरुद्ध अपराध करने वाले व्यक्तियों के दण्ड को राज्यपाल कम कर सकता, स्थगित कर सकता, बदल सकता या उन्हें क्षमा प्रदान कर सकता है। 
  • अगर वह देखता है कि राज्य का प्रशासन संविधान के उपबन्धों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता है तो वह राष्ट्रपति को राज्य में संवैधानिक तन्त्र की विफलता के सम्बन्ध में सूचना देता है और उसकी रिपोर्ट के आधार पर अनुच्छेद 356 के अन्तर्गत राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होता है। संकटकालीन स्थिति में वह राज्य में राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है।
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भारत की न्यायपालिका (Judiciary of india)

उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश

न्यायाधीशकार्यकाल
1. हीरालाल जे. कानिया26-01-1950 से 06-11-1951
2. एम. पतंजलि शास्त्री1951-1954
3. मेहर चन्द्र महाजन

1954
4. बी. के. मुखर्जी1954-1956
5. एस. आर. दास1956-1959
6. भुवनेश्वर प्रसाद सिन्हा1959-1964
7. पी. वी. गजेन्द्र गणकर1964-1966
8. ए. के. सरकार1966
9. के. सुब्बाराव1966-1967
10. के. एन. वान्चू1967-1968
11. मोहम्मद हिदायतुल्ला1968-1970
12. जे. सी. साह1970-1971
13. एस. एम. सीकरी1971-1973
14. अजीत नाथ रे1973-1977
15. एम. एच. बेग1977-1978
16. वाई. वी. चन्द्रचूड़1978-1985
17. पी. एन. भगवती1985-1986
18. आर. एस. पाठक1986-1989
19. ई. एस. वेंकट रमन1989
20. सव्यसांची मुखर्जी1989-1990
21. रंगनाथ मिश्रा (राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के प्रथम अध्यक्ष)1990-1991
22. के. एन. सिंह1991
23. एम. एच. कानिया1991-1992
24. ललित मोहन शर्मा1992-1993
25. एम. एन. वेंकट चलैया1993-1994
26. ए. एम. अहमदी1994-1997
27. जगदीश प्रसाद वर्मा1997-1998
28. मदन मोहन पुंछी1998
29. आदर्श सेन आनन्द1998-2001
30. एस. पी. भरूचा2001-2002
31. वी. एन. कृपाल 6 मई, 2002 से 7 नवम्बर 2002
32. गोपाल बल्लभ पटनायक8 नवम्बर, 2002 से दिस. 2010
33. वी. एन. खरे2002-2004
34. एस. आर. बाबू.2004
35. आर. सी. लाहोटी2004-2005
36. यो. कु. सभरवाल2005-2007
37. के. जी. बालाकृष्णन2007-2010
38. एस. एच. कपाड़िया2010-2012
39. अल्तमस कबीर2012-18 जुलाई 2013
40 पी सतशिवम 19 जुलाई 2013-26 अप्रैल 2014
41 राजेन्द्र मल लोढ़ा26 अप्रैल 2014-27 सितम्बर 2014
42 एच एल दत्तु28 सितम्बर 2014-2 दिसम्बर 2015
43 टी एस ठाकुर3 दिसम्बर 2015-3 जनवरी 2017
44 जगदीश सिंह खेहर4 जनवरी 2017-27 अगस्त 2017
45 दीपक मिश्रा28 अगस्त 2017-2 अक्टूबर 2018
46 रंजन गोगोई3 अक्टूबर 2018-17 नवम्बर 2019
47 शरद अरविंद बोबडे18 नवम्बर 2019 से अब तक
  • यद्यपि भारत एक संघात्मक राज्य है तथापि यहाँ एकीकृत न्यायपालिका को अपनाया गया है।
  • जबकि भारत में सघात्मक व्यवस्था के अनुरुप केन्द्र और राज्य के लिए अलग-अलग कार्यपालिका और विधानमण्डल हैं और संविधान में उनकी शक्तियों का स्पष्ट विभाजन किया गया है, लेकिन न्यायपालिका के विषय में इस तरह का विभाजन नहीं किया गया है। 
  • भारत में अमरीका आदि देशों की भाँति केन्द्र और राज्यों के लिए अलग-अलग न्यायालय नहीं हैं और ना ही विभिन्न न्यायालयों के बीच शक्तियों का बँटवारा किया गया है।
  • भारतीय न्यायपालिका की संरचना एक पिरामिट की भाँति है जिसमें सबसे ऊपर सर्वोच्च न्यायालय स्थित है। प्रत्येक ऊपरी न्यायालय अपने नीचे के न्यायालय पर नियंत्रण रखता है। अतः हमारी न्याय व्यवस्था एकात्मक है। 
  • संरचना के विषय में भारतीय न्यायपालिकाा ब्रिटिश न्यायपालिका के समान है, जबकि शक्तियों के विषय में यह संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यायपालिका के समान है। 
  • ब्रिटेन में संसद सर्वोच्च है तथा USA में संविधान।

उच्चतम न्यायालय (Supreme Court)

  • • संविधान के अनुच्छेद 124-147 में केन्द्रीय न्यायपालिका से संबंधित प्रावधान हैं। 
  • न्यायाधीशों की संख्या : • प्रारंभ में सर्वोच्च न्यायालय में 1 मुख्य न्यायाधीश तथा 7 अन्य न्यायाधीश थे। 1 + 7/ 
  • 1985 में मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर अन्य न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाकर 25 कर दी गई। 25 + 1 
  • वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय में न्ययाधीशों की कुल संख्या 26 से बढ़ाकर 31 कर दी गई है। 30 + 1 
  • सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या में बढ़ोत्तरी या कमी करने की शक्ति केन्द्रीय संसद् में निहित है। 
  • यदि राष्ट्रपति उचित समझे तो सर्वोच्च न्यायालय में तदर्थ न्यायाधीशों (Adhoc Judges) की नियुक्ति भी कर सकता है। 
  • सर्वोच्च न्यायालय का वरिष्ठतम न्यायाधीश भारत का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाता है। शपथ राष्ट्रपति दिलवाता है। 

न्यायाधीशों की नियुक्ति :

राष्ट्रपति द्वारा ये नियुक्तियाँ सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श के आधार पर की जाती हैं। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश इस प्रसंग में राष्ट्रपति को परामर्श देने के पूर्व अनिवार्य रूप से ‘चार वरिष्ठम न्यायाधीशों के समूह’ से परामर्श प्राप्त करते हैं तथा न्यायाधीशों से प्राप्त परामर्श के आधार पर राष्ट्रपति को परामर्श देते हैं। 

न्यायाधीशों की योग्यताएँ :

  • वह भारत का नागरिक हो। 
  • वह किसी उच्च न्यायालय अथवा दो या दो से अधिक न्यायालयों में लगातार कम-से-कम 5 वर्ष तक न्यायाधीश के रूप में कार्य कर चुका हो अथवा किसी उच्च न्यायालय या न्यायालयों में लगातार 10 वर्ष तक अधिवक्ता रह चुका हो अथवा राष्ट्रपति की दृष्टि में कानून का उच्च
  • कोटि का ज्ञाता हो। 

कार्यकाल तथा महाभियोग :

  • साधारणत : सर्वोच्च न्यायालय का प्रत्येक न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु तक अपने पद पर आसीन रह सकता है। इस अवस्था के पूर्व वह स्वयं त्यागपत्र दे सकता है। 
  • इसके अतिरिक्त सिद्ध कदाचार अथवा असमर्थता के आधार पर संसद के द्वारा न्यायाधीश को उसके पद से हटाया जा सकता है। वी. रामस्वामी पर 1992 में महाभियोग नहीं पारित हो सका था। सौमित्रसेन (कलकत्ता हाईकोर्ट) पर 7 नवम्बर, 2010 को महाभियोग प्रस्ताव आया। पी. वी. दिनकरन (सिक्किम हाईकोर्ट) पर 2011 में महाभियोग प्रस्ताव आया।

वेतन, भत्ते और अन्य सुविधाएँ 

वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को 1,00,000 रुपये प्रति माह व अन्य न्यायाधीशों को 90,000 रुपये प्रति माह वेतन प्राप्त होता है। न्यायाधीशों के लिए पेंशन व सेवानिवृत्ति वेतन की व्यवस्था भी है। उन्हें वेतन व भत्ते भारत की संचित निधि से दिये जाते हैं। 

सर्वोच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार :

प्रारम्भिक एकमेव क्षेत्राधिकार : इसका आशय उन विवादों | से है, जिनकी सुनवाई केवल भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा |ही की जा सकती है। इसके अन्तर्गत निम्न विषय आते हैं

  • (i) भारत सरकार तथा एक या एक सह अधिक राज्यों के बीच विवाद
  • (ii) भारत सरकार, संघ का कोई राज्य या राज्यों तथा एक या अधिक राज्यों के बीच विवाद
  • (iii) दो या दो से अधिक राज्यों के बीच संवैधानिक विषयों के सम्बन्ध में उत्पन्न कोई विवाद।

अपीलीय क्षेत्राधिकार : 

सर्वोच्च न्यायालय भारत का अंतिम अपीलीय न्यायालय है। उसे समस्त राज्यों के उच्च न्यायालयों के निर्णयों के विरुद्ध अपीलें सुनने का अधिकार है।

  • अपील के लिए विशेष आज्ञा देने का अधिकार पुनर्विचार सम्बन्धी क्षेत्राधिकार 
  • परामा सम्बन्धी क्षेत्राधिकार 
  • अभिलेख न्यायालय 
  • मौलिक अधिकारों का रक्षक
  • न्यायिक क्षेत्र का प्रशासन

समीक्षा की शक्ति 

  • अनुच्छेद 137 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय को अपने निर्णयों की समीक्षा की शक्ति प्राप्त है। 
  • उच्चतम न्यायालय अपने ही निर्णय अथवा आदेश पर पुनर्विचार कर सकता है।

अभिलेख न्यायालय 

  • संविधान के अनुच्छेद 129 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय को अभिलेख न्यायालय घोषित किया गया है। 
  • अभिलेख न्यायालय का तात्पर्य ऐसे न्यायालय से होता है जिसके निर्णय और कार्यवाहियाँ लिखी जाती हैं। भविष्य में इन्हें किसी भी न्यायालय के साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। इन्हें चुनौती नहीं दी जा सकती है और न ही इसकी वैधता पर प्रश्न चिन्ह लगाया जा सकता है।

उच्च न्यायालय न्यायाधीशों की नियुक्ति  

  • प्रत्येक उच्च न्यायालय में एक प्रमुख न्यायाधीश व कुछ
  • अन्य न्यायाधीश होते हैं जिनकी संख्या निश्चित करने का अधिकार राष्ट्रपति को है। 
  • मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायाधीश और उस राज्य के राज्यपाल के परामर्श से होती है तथा अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति में सम्बन्धित राज्य के मुख्य न्यायाधीश का भी परामर्श लेना होता है। 
  • भारत के मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति व स्थानान्तरण के सम्बन्ध में सर्वोच्च न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों के समूह की सर्वसम्मत राय के आधार पर ही राष्ट्रपति को परामर्श देंगे।

इस समय भारत में कुल 21 उच्च न्यायालय हैं। 

उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को शपथ राज्यपाल दिलवाता है।

विशिष्ट उच्च न्यायालय 

देश में कुल 6 उच्च न्यायालय ऐसे हैं जिनका क्षेत्राधिकार एक से अधिक राज्यों तक विस्तृत है

  • 1. कलकत्ता उच्च न्यायालय (1862 ई.) : पश्चिम बंगाल, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह । 
  • 2. बम्बई उच्च न्यायालय (1862 ई.) : महाराष्ट्र, गोवा, दमन और द्वीव, दादरा और नागर हवेली। 
  • 3. मद्रास उच्च न्यायालय (1862 ई.): तमिलनाडु और पांडिचेरी। 
  • 4. केरल उच्च न्यायालय (1958 ई.) : केरल और लक्षद्वीप समूह। 
  • 5. पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय (1975 ई.) : पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़। 
  • 6. गोहाटी उच्च न्यायालय (1948 ई.) : असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैण्ड और अरुणाचल प्रदेश। 
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संसद :- राज्य सभा, लोकसभा ( Parliament :- Rajya Sabha, Lok Sabha)

संघीय विधान मंडल भारत में केन्द्रीय विधायिका के दो सदन हैं 1. राज्य सभा और 2. लोकसभा 

राज्यसभा को द्वितीय और उच्च सदन कहते हैं, जबकि लोकसभा प्रथम और निम्न सदन है।

इसके अतिरिक्त राष्ट्रपति भी केन्द्रीय विधायिका का अंग होता है। 

Parliament = Rajya Sabha + Lok Sabha + President

राज्यसभा

संसद : राज्यसभा

राज्यस्थानों की संख्या
1.आंध्र प्रदेश18
2. तमिलनाडु18
3. मध्य प्रदेश11
4. छत्तीसगढ़5
5. पश्चिम बंगाल16
6. उड़ीसा10
7. राजस्थान10
8. असम7
9. बिहार16
10. झारखण्ड6
11. गोवा1
12. गुजरात11
13. हरियाणा5
14. केरल9
15. महाराष्ट्र19
16. कर्नाटक12
17. पंजाब7
18. उत्तर प्रदेश31
19. उत्तराखण्ड3
20. जम्मू और कश्मीर4
21. नागालैण्ड1
22. हिमांचल प्रदेश3
23. मणिपुर1
24. त्रिपुरा1
25. मेघालय1
26. सिक्किम1
27. मिजोरम1
28. अरुणाचल प्रदेश1
29. पांडीचेरी1
30. संघ शासित प्रदेश दिल्ली में3
  • राज्यसभा संसद का उच्च सदन है। धनिको की सभा। 
  • संविधान के अनुच्छेद 80 के अनुसार राज्यसभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या 250 (238 निर्वाचित + 12 मनोनीत) हो सकती है परन्तु वर्तमान में यह संख्या 245 (233+12) है। 
  • इनमें 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा नामजद किए जाते हैं। ये ऐसे व्यक्ति होते हैं जिन्हें कला, साहित्य, विज्ञान, समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष ज्ञान और अनुभव प्राप्त हो। शेष सदस्य जनता द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से MLA द्वारा निर्वाचित होते हैं। इनके चुनाव विभिन्न राज्यों और संघ क्षेत्रों की
  • विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा किया जाता है।

सदस्यों की योग्यताएं :

  • वह भारत का नागरिक हो।
  • उसकी आयु 30 वर्ष से कम न हो।
  • वह किसी लाभ के पद पर न हो, विकृत मस्तिष्क का या दिवालिया न हो। 
  • ऐसी अन्य योग्यताएँ रखता हो जो संसद के किसी कानून द्वारा निश्चित की जाएं। 
  • राज्य सभा का उम्मीदवार होने के लिए उस राज्य में संसदीय क्षेत्र का मतदाता होना आवश्यक है जिस राज्य से वह चुनाव लड़ रहा हो। 

कार्यकाल :

  • राज्यसभा एक स्थायी सदन हैं यह कभी भंग नहीं होता बल्कि इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो वर्ष बाद अवकाश ग्रहण कर लेते हैं और इनके स्थान पर नए सदस्यों का चुनाव हो जाता है। इस प्रकार राज्यसभा के प्रत्येक
  • सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है।

पदाधिकारी :

भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है तथा राज्यसभा अपने में से किसी एक सदस्य को उपसभापति निर्वाचित करती है। सभापति की अनुपस्थिति में उपसभापति सभापति के कर्तव्यों का पालन करता है।

 उपसभापति को राज्य सभा के सदस्यों द्वारा अपने कुल बहुमत से प्रस्ताव पारित कर हटाया जा सकता है। 

राज्यसभा के कार्य तथा शक्तियाँ : 

  • संविधान संशोधन की शक्ति 
  • राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव में भाग लेते हैं। 
  • राज्यसभा के सदस्य लोकसभा के सदस्यों के साथ मिलकर उपराष्ट्रपति का चुनाव करते हैं।
  • राज्यसभा लोकसभा के साथ मिलकर राष्ट्रपति, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों तथा न्य कुछ पदाधिकारियों पर महाभियोग लगा सकती है। 
  • राज्यसभा लोकसभा के साथ मिलकर बहुमत से प्रस्ताव पास कर उपराष्ट्रपति को उसके पद से हटा सकती है। 
  • एक माह से अधिक अवधि तक यदि आपातकाल लागू रखना हो तो उस प्रस्ताव का अनुमोदन लोकसभा तथा राज्यसभा दोनों से पारित होना आवश्यक है। 
  • राज्य सूची में दिए गए विषयों पर कानून बनाने का अधिकार- संविधान के अनुच्छेद 249 के अनुसार यदि राज्यसभा उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों के दो तिहाई बहुमत स यह संकल्प पारित कर दे कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक है कि संसद राज्य सूची में वर्णित किसी विषय के सम्बन्ध में कानून बनाये, तो संसद को उस विषय के सम्बन्ध में कानून बनाने का अधिकार मिल जाता है। इस प्रकार बनाया गया कानून केवल एक वर्ष तक प्रवर्तन में रहता है परन्तु राज्यसभा पुनः संकल्प पारित करके एक वर्ष के समय को और एक वर्ष तक के लिए बढ़ा सकती है तथा बार बार संकल्प पारित करके इस अवधि को असीमित कर सकती है। राज्यसभा ने इस अधिकार का अब तक दो बार प्रयोग किया है
  • (क) 1952 में 1952 में राज्यसभा ने संकल्प पारित करके संसद को व्यापार, वाणिज्य, उत्पादन, वस्तुओं की उपलब्धि तथा वितरण के सम्बन्ध में कानून बनाने का अधिकार दिया था। 
  • (ख) 1986 में 1986 में राज्यसभा ने संकल्प पारित करके संसद को अन्तर्राष्ट्रीय सीमा के साथ सुरक्षा क्षे की व्यवस्था करने के सम्बन्ध में कानून बनाने का अधिकार दिया था। 
  • अखिल भारतीय सेवाओं की व्यवस्था- संविधान के अनुच्छेद 312(1) के अधीन यह प्रावधान किया गया है कि राज्यसभा अपने उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों के दो तिहाई बहुत से यह संकल्प पारित कर दे कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक है संसद संघ और राज्यसभा के लिए सम्मिलित एक या अधिक अखिल भारतीय सेवाओं का सृजन करे तो संसद को ऐसा अधिकार मिल जाता है। इस शक्ति का प्रयोग करके राज्यसभा ने निम्नलिखित अखिल भारतीय सेवा का सुजन किया है
  • (क) 1961 में- भारतीय इन्जीनियर्स सेवा, भारतीय वन सेवा, भारतीय चिकित्सा सेवा 
  • (ख) 1965 में भारतीय कृषि सेवा तथा भारतीय शिक्षा सेवा ।

लोकसभा

लोकसभा सिटी

राज्यस्थानअनुसूचित जाति के लिए आरक्षित स्थानअनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित स्थान
1. आन्ध्र प्रदेश4262
2. अरुणाचल प्रदेश 2
3 असम1412
4. बिहार 4062
5. झारखण्ड1415
6. गोवा2
7. गुजरात 2624
8. हरियाणा 102
9. हिमांचल प्रदेश41
10. जम्मू-कश्मीर6
11. कर्नाटक 284
12. केरल202
13. मध्य प्रदेश 2946
14. छत्तीसगढ़1114
15. महाराष्ट्र4834
16. मणिपुर21
17. मेघालय 2
18. मिजोरम 11
19. नागालैण्ड1
20. उड़ीसा2135
21. पंजाब133
22. राजस्थान2543
23. सिक्किम1
24. तमिलनाडु 397
25. त्रिपुरा 21
26. उत्तर प्रदेश 8017
27. उत्तराखण्ड 51
28. पश्चिमी बंगाल4282

संघ राज्य क्षेत्र

1. अंडमान तथा निकोबार 1
2. चंडीगढ़11
3. दादरा और नागर हवेली1
4. दिल्ली71
5. दमन और दीव1
6. लक्षद्वीप11
7 पाण्डिचेरी1

संघीय संसद का निम्न अथवा लोकप्रिय सदन है। 

  • लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या (530 + 20 + 2) = 552 हो सकती है। वर्तमान में इसकी व्यावहारिक सदस्य संख्या (530 + 13 + 2) = 545 है। 
  • 91वाँ संशोधन (2003)- कैबिनेट का आकार 15% होगा (सदन का)। 1/3 सदस्य से कम यदि दल-बदल करेंगे तो सदस्यता समाप्त होगी। 
  • 12 से कम नहीं होगी। 84वाँ संशोधन (2000)- लोकसभा क्षेत्रों का आबंटन 2026 तक यथावत रहेगा। 

निर्वाचकों की योग्यताएं :

लोकसभा के चुनाव में उन सभी सदस्यों को मतदान का अधिकार होगा जो भारत के नागरिक हैं, (61वें संविधान संशोधन 1989 के अनुसार) जिनकी आयु 18 वर्ष (इससे पहले यह आयु 21 वर्ष थी) या अधिक है, जो पागल या दिवालिया नहीं है और जिन्हें संसद के कानून द्वारा किसी अपराध, भ्रष्टाचार या गैर-कानूनी व्यवहार के कारा मतदान से वंचित नहीं कर दिया गया है। 

संसद के विपक्षी दल- संसदीय लोकतन्त्र में विपक्ष का विशिष्ट महत्व है। यह सरकार की जन विरोधी नीतियों की आलोचना कर वैकल्पिक नीति प्रस्तुत करता है तथास जनतंत्र को सुरक्षित रखता है। स्वतन्त्रता प्राप्ति के पहले से ही भारत में कई दल थे, जो स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद सत्ताधारी दल (कांग्रेस) तथा विपक्षी दल (अन्य दल) के रूप में विभाजित हो गये। प्रथम आम चुनाव (1952) के पहले कुछ नये दलों का गठन हुआ, जिनमें से कुछ तो कांग्रेस से ही अलग होकर गठित किये गये थे और नये दल के रूप में जनसंघ अस्तित्व में आया था। लेकिन चुनाव में विपक्षी दल नगण्य ही रहे और 1969 के पहले किसी भी नेता को विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता नहीं मिली। यहां यह उल्लेखनीय है कि विपक्ष के नेता के रूप में उस दल के नेता को मान्यता मिलती है, जिस दल की सदस्य संख्या सदन के कुल सदस्यों के दसवें भाग के बराबर होती है। सबसे पहले 1969 में संगठन कांग्रेस के राम सुीग सिंह को लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता मिली और इसके बाद 1977 में कांग्रेस के यशवंत राव बलवन्त राव चव्हाण को लोकसभा में तथा कमलापति त्रिपाठी को राज्यसभा में विपक्ष नेता के रूप में मान्यता दी गयी। इसके बाद कांग्रेस का विभाजन हुआ, फलस्वरूप सी. एम. स्टीफन विपक्ष के नेता के रूप में लोकसभा में प्रतिस्थापित किये गये। 1979 में जब चरण सिंह को कांग्रेस (आई.) ने अपना समर्थन देकर प्रधानमंत्री पद पर आसीन करवाया, तब लोकसभा में जगजीवन राम विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता प्राप्त किये। 1980 के चुनाव तथा 1984 के चुनाव में किसी भी विरोधी राजनीतिक दल को इतना सीन प्राप्त नहीं हुआ कि उसके नेता को विपक्ष का नेता माना जाय। 1989 के आम चुनाव में राजीव गांधी तथा बाद में लालकृष्ण आडवानी विपक्ष के नेता बने ।

1991 के आम चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी के लालकृष्ण आडवाणी विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता प्राप्त किये हुए हैं। 

राज्यसभा में अब तक जिन नेताओं को विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दी गयी है, वे हैं- 1. कमला पति त्रिपाठी (कांग्रेस), 2. पी. शिवशंकर (कांग्रेस), 3. एस. जयपाल रेड्डी (जनता दल) तथा 4. सिकन्दर बख्त (भारतीय जनता पार्टी) 

सदस्यों की योग्यताएँ

  • वह व्यक्ति भारत का नागरिक हो। 
  • उसकी आयु 25 वर्ष या इससे अधिक हो। 
  • भारत सरकार अथवा किसी राज्य सरकार के अन्तर्गत वह कोई लाभ का पद धारण न किए हुए हों। 
  • वह किसी न्यायालय द्वारा दिवालिया न ठहराया गया हो तथा पागल न हो। 
  • वह संसद द्वारा बनाए गए किसी
  • कानून द्वारा अयोग्य न ठहराया गया हो।
  • संसद के कानून द्वारा निर्धारित अन्य योग्यताएँ हों। 

कार्यकाल:

  • लोकसभा का कार्यकाल 5 वर्ष है किन्त प्रधानमन्त्री के परामर्श के आधार पर राष्ट्रपति के द्वारा लोकसभा को समय से पूर्व भी भंग किया जा सकता है।
  • संकटकाल की घोषणा लागू होने पर संसद विधि द्वारा लोकसभा के कार्यकाल में वृद्धि कर सकती है जो एक बार में एक वर्ष से अधिक नहीं होगी। 
  • यदि कोई व्यक्ति संसद के दोनों सदनों के लिए चुना जाता है और दोनों सदनों में से किसी में अपना स्थान ग्रहण नहीं किया है, तो वह अपने चुने जाने की तिथि से 10 दिन के अन्दर आयोग के सचिव को लिखित सूचना देगा कि वह किस सदन का सदस्य बना रहना चाहता है। जिस सदन का वह सदस्य बना रहना चाहता है, उसके अतिरिक्त दूसरे सदन का उसका स्थान रिक्त हो जाएगा। यदि व्यक्ति चुनाव आयोग के सचिव को ऐसी सूचना नहीं देता, तो उसका राज्यसभा का स्थान स्वतः 10 दिन बाद समाप्त हो जाएगा। 
  • यदि कोई व्यक्ति संसद के दोनों सदनों में से किसी में या राज्य के विधानमण्डल में से किसी के लिए एक स्थान से अधिक स्थान के लिए निर्वाचित हो जाता है, तो उसे एक स्थान को छोड़कर अन्य स्थानों से 14 दिन के अन्तर्गत त्यागपत्र दे देना चाहिए। यदि वह ऐसा नहीं करता तो उसके सभी स्थान स्वतः रिक्त हो जायेंगे। 

अधिवेशन :

लोकसभा और राज्यसभा के अधिवेशन राष्ट्रपति के द्वारा ही बुलाए और स्थगित किए जाते हैं। इस सम्बन्ध में नियम केवल यह है कि लोकसभा की दो बैठकों में 6 माह से अधिक का अन्तर नहीं होना चाहिए। 

संसद के सदनों में गणपूर्ति- संसद के सदनों को कार्यवाही प्रारम्भ करने के लिए गणपूर्ति आवश्यक है। गणपूर्ति के लिए सदन के कुल सदस्यों के दसवें भाग का सदन में उपस्थित रहना आवश्यक है। यदि किसी समय संसद के किसी सदन की गणपूर्ति नहीं होती, तो अध्यक्ष या सभापति तग तक के लिए सदन की कार्यवाही को स्थगित कर सकता है, जब तक सदन की गणपूर्ति न हो जाये। 

कुल वैध मतों का 1/6 मत जमानत बचाने के लिए पाना अनिवार्य है।

पदाधिकारी

  • लोकसभा स्वयं ही अपने सदस्यों से एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष का निर्वाचन करेगी। इनका कार्यकाल लोकसभा के कार्यकाल तक अर्थात् समय से पूर्व भंग न होने की स्थिति में 5 वर्ष होता है परन्तु इस अवधि के अन्दर अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष स्वेच्छा से अपने पदों से त्यागपत्र दे सकते हैं तथा उन्हें उनके पद से हटाया भी जा सकता है। 
  • अब तक विधेयक को पारित करने के सम्बन्ध में संसद की संयुक्त बैठक में तीन बार विधेयक, यथा दहेज प्रतिषेध विशेयक 1961, बैंककारी सेवक आयोग (निरसन) विधेयक, 1978 तथा 2002 ई. में पोटा (POTA) पारित किये गये है
  • धन विधेयक को राष्ट्रपति की सहमति से लोकसभा में पेश किया जाता है। लोकसभा द्वारा पारित किये जाने के बाद धन विधेयक को राज्यसभा में भेजा जाता है। जब राज्यसभा को विधेयक भेजा जाता है, तब उसके साथ लोकसभाध्यक्ष का यह प्रमाणपत्र संलग्न होता है कि वह विधेयक धन विधेयक ही है। लोकसभाध्यक्ष को ही यह निर्णीत करने की शक्ति है कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं राज्यसभा को धन विधेयक के सम्बन्ध में बहुत कम अधिकार हैं। राज्यसभा, लोकसभा द्वारा पारित धन विधेयक में संशोधन नहीं कर सकती लेकिन उसके सम्बन्ध में अपनी सिफारिश दे सकती है। यह लोकसभा पर निर्भर करता है कि वह राज्यसभा की सिफारिश को स्वीकार करे या न करे। यदि लोकसभा, राज्यसभा की किसी सिफारिश को स्वीकार करती है या अस्वीकार करती है, तो दोनों स्थिति में विधेयक को पारित किया गया माना जाएगा। उसके अतिरिक्त राज्यसभा धन विधेयक को अपने यहां 14 दिन से अधिक नहीं रोक सकती। यदि राज्यसभा धन विधेयक को 14 दिन से अधिक रोकती है, तो विधेयक को उस रूप में पारित माना जाएगा, जिस रूप में लोकसभा ने पारित किया था। 

विनियोग विधेयक- संसद विनियोग विधेयक पारित करके भारत सरकार को भारत की संचित निधि से धन निकालने की अनुमति देती है। इस विधेयक को केवल लोकसभा में ही पेश किया जाता है। इस विधेयक पर विचार-विमर्श केवल उन्हीं मदों तक सीमित होता है, जिन्हें अनुदानों और आगणनों के विचार-विमर्श में शामिल न किया गया हो। विनियोग विधेयक के पूर्व लोकसभा ने जिन अनुदानों को स्वीकार कर लिया हो। उन पर न तो कोई-संशोधन पेश किया जा सकता है औन न ही अनुदान के लक्ष्य को बदला जा सकता है तथा न ही उस धनराशि में परिवर्तन किया जा सकता है, जिसकी अदायगी भारत की संचित निधि से की जानी होगी। लोकसभा द्वारा विधेयक को पारित किये जाने पर इसे राज्यसभा को भेजा जाता है। राज्यसभा विनियोग विधेयक को अपने यहां 14 दिनों से अधिक रोक नहीं सकती और न ही उसमें कोई संशोधन कर सकती है लेकिन सिफारिश कर सकती है, किन्तु यह लोकसभा पर निर्भर करता है कि वह राज्यसभा की सिफारिश को स्वीकार करे या न करे। इसके बाद विधेयक को पारित मान करके राष्ट्रपति की सहमति के लिए भेजा जाता है। 

कार्यकारी अध्यक्ष (Protem Speaker)– शपथ हेतु वरिष्ठ सदस्य। 

प्रथम लोकसभाध्यक्ष – गणेश वासुदेव मावलंकर (1952-56)

लोकसभा की शक्तियाँ व कार्य 

संविधान संशोधन सम्बन्धी शक्ति।

  • लोकसभा तथा राज्यसभा मिलकर राष्ट्रपति तथा सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के विरुद्ध महाभियोग का प्रस्ताव पास कर सकती है। 
  • राज्यसभा द्वारा पारित उपराष्ट्रपति को पदच्युति के प्रस्ताव पर लोकसभा का अनुमोदन आवश्यक है। 
  • राष्ट्रपति द्वारा की गई संकटकाल की घोषणा को एक | माह के अन्दर संसद से स्वीकृत होना आवश्यक है।

संसदीय प्रस्ताव

  • ध्यानाकर्षण प्रस्ताव : अध्यक्ष की अनुमति से जब कोई संसद सदस्य किसी मन्त्री का ध्यान सार्वजनिक हित की दृष्टि से अत्यावश्यक विषय की ओर आकर्षित करता है तो उसे ध्यानाकर्षण प्रस्ताव कहते हैं।
  • विशेषाधिकार प्रस्ताव : यदि किसी मंत्री ने तथ्यों को छिपाकर या गलत जानकारी देकर संसद सदस्यों के विशेषाधिकार का हनन किया है तो संसद सदस्य मंत्री के विरुद्ध विशेषाधिकार प्रस्ताव’ रख सकते हैं।
  • कार्य स्थगन प्रस्ताव : जब कोई विशेष घटना घटित हो या देश में कोई विशेष स्थिति उत्पन्न हो जाए तो संसद सदस्य प्रस्ताव कर सकता है कि सदन की वर्तमान कार्यवाही को स्थगित कर इस विशेष घटना, स्थिति या प्रश्नपर विचार किया जाना चाहिए। इसे ही कार्य स्थगन प्रस्ताव कहते हैं।
  • कटौती प्रस्ताव : बजट की माँगों में कटौती हेतु रखे गए प्रस्ताव को ‘कटौती प्रस्ताव’ कहते हैं। इस प्रस्ताव को विचार के लिए स्वीकृति देना अध्यक्ष के स्वविवेक पर निर्भर करता है।
  • निन्दा प्रस्ताव : शासन या किसी विशेष मंत्री द्वारा अपनायी गई नीति या उसके कार्यों की आलोचना करने के लिए ‘निन्दा प्रस्ताव’ लाया जाता है।
  • अविश्वास प्रस्ताव : अविश्वास प्रस्ताव लोकसभा में विपक्षी दल या दलों द्वारा प्रस्तुत किया जा सकता है। यदि लोकसभा के कम-से-कम 50 सदस्य प्रस्ताव का समर्थन करते हैं तो अध्यक्ष उसे विचार हेतु स्वीकार करते हैं। यदि लोकसभा अपने बहुमत से अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दे तो मन्त्रिपरिषद् को त्यागपत्र देना होता है।

संसद के सत्र, स्थगन, सत्रावसान तथा विघटन

संविधान के अनुच्छेद-85 के अधीन राष्ट्रपति को समय-समय पर संसद के प्रत्येक सदन को आहूत करने, उसका सत्रावसान करने और लोकसभा का विघटन करने की शक्ति है। 

संसद के सत्र : राष्ट्रपति समय-समय पर संसद के प्रत्येक सदन को अधिवेशन के लिए आहूत करता है लेकिन एक सत्र की अंतिम बैठक और उसके बाद के सत्र की पहली बैठक के बीच 6 महीनों से अधिक का अंतराल नहीं होना चाहिए। इस प्रकार, एक वर्ष में दो बार संसद का अधिवेशन बुलाया जाना आवश्यक है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर संसद का अधिवेशन बुलाता है।

सामान्यतया वर्ष में तीन सत्र होते हैं

1. बजट सत्र (फरवरी-मई) 

2. वर्षाकालीन सत्र (जुलाई-सितंबर) 

3. शीतकालीन सत्र (नवम्बर-दिसम्बर) 

संसद का सत्रावसान : सदन का सत्रावसान राष्ट्रपति करता है। संसद के किसी विशेष सत्र को समाप्त करना ही सत्रावसान कहलाता है। उल्लेखनीय है कि सदन के सत्रावसान के परिणामस्वरूप उसमें लम्बित विधेयक के कार्य समाप्त नहीं होते हैं। 

संसद का विघटन : विघटन सदन की कालावधि को ही समाप्त कर देता है। इसके बाद नये लोकसभा के गठन के लिए निर्वाचनहोना आवश्यक हो जाता है। सामान्यतः राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद् की सलाह से ही विघटन करता है। ध्यान रहे कि राज्यसभा एक स्थायी सदन है इसलिए उसका विघटन नहीं हो सकता। 

लोकसभा के विघटन का प्रभाव : जब लोकसभा का विघटन हो जाता है तो- लोकसभा में लम्बित सभी विधेयक समाप्त हो जाते हैं।

राज्यसभा में लम्बित विधेयक, जिसको लोकसभा ने पारित नहीं किया है, समाप्त हो जाते हैं। राज्यसभा में लम्बित विधेयक, जिसे लोकसभा ने पारित कर दिया है, समाप्त नहीं होंगे, यदि राष्ट्रपति यह घोषणा कर दे कि इस विधेयक के संबंध में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक होगी।

संसद में सामान्य प्रक्रिया

प्रश्नकाल : आमतौर पर प्रतिदिन सदन की कार्यवाही का | प्रथम घण्टा (11 से 12 बजे) प्रश्नकाल होता है। इस काल में प्रश्नों के माध्यम से राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय सभी बातों के सम्बन्ध में सूचना प्राप्तकी जा सकती है।

  • प्रश्न तीन प्रकार के होते हैं
  • (1) तारांकित प्रश्न द्वारा सदस्य सदन में मौखिक उत्तर चाहता है। 
  • (2) अतारांकित प्रश्न की स्थिति में सम्बद्ध मंत्री द्वारा सदन के पटल पर लिखित उत्तर रखा जाता है। 
  • (3) अल्प सूचना प्रश्न का सम्बन्ध लोक महत्व के किसी तात्कालिक मामले से होता है जो किसी प्रश्न के लिए निर्धारित समय की सूचना के बजाय कम समय की सूचना पर पूछा जा सकता है। 

  • शून्यकाल : सामान्यतः प्रश्नकाल के बाद लगभग 1 घण्टे का समय (12 से 1 बजे) ‘शून्यकाल’ के रूप में रखा जाता है। इस समय में विचार के लिए विषय’ पहले से निर्धारित नहीं होता। इस समय में बिना पूर्व सूचना के सदस्य द्वारा सार्वजनिक हित का ऐसा कोई भी प्रश्न उठाया जा सकता है | जिस पर तुरन्त विचार आवश्यक समझा जाए। यह नाम | समाचार-पत्रों द्वारा दिया गया है।
  • सामूहिक उत्तरदायित्व : अनु. 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद लोक सभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होगी। इसका अभिप्राय यह है कि वह अपने पद पर तब तक बनी रह सकती है जब उसे निम्न सदन अर्थात लोक सभा के बहुमत का समर्थन प्राप्त हो।
  • अविश्वास प्रस्ताव : अविश्वास प्रस्ताव सदन में विपक्षी दल के किसी सदस्य द्वारा रखा जता है। प्रस्ताव पक्ष में कम से कम 50 सदस्यों का होना आवश्यक है तथा प्रस्ताव प्रस्तुत किये जाने के 10 दिन के अन्दर इस पर चर्चा होना भी आवश्यक है। चर्चा के बाद अध्यक्ष मतदान द्वारा घोषणा करता है।

अध्यादेश : राष्ट्रपति अथवा राज्यपाल संसद अथवा विधान मंडल के सत्रावसान की स्थिति में आवश्यक विषयों से संबंधित अध्यादेश जारी करते हैं। अध्यादेश को 6 सप्ताह से ज्यादा लागू होने के लिये जब संसद या विधान मण्डल फिर से अस्तित्व में आती है तो उसे इसे 6 सप्ताह के भीतर इस अध्यादेश का अनुमोदन करना आवश्यक है।

बैक बेंचर (Back Bencher) : सदन में आगे के स्थान प्रायः मंत्रियों, संसदीय सचिवों तथा विरोधी दल, के नेताओं के लिए आरक्षित रहते हैं। गैर सरकारी सदस्यों के लिए पीछे का स्थान नियत रहता है। पीछे बैठने वालों को ही बैंक बेंचर कहा जाता

न्यायिक पुनर्विलोकन : भारत में न्यायिक पुनर्विलोकन की शक्ति प्राप्त है। न्यायिक पुनर्विलोकन के अनुसार न्यायालयों को यह अधिकार प्राप्त है कि यदि विधान मंडल द्वारा पारित की गयी विधियाँ अथवा कार्यपालिका द्वारा दिये गये आदेश संविधान के विरोध में हैं तो वे उन्हें निरस्त घोषित कर सकते

अनुपूरक अनुदान : यदि विनियोग द्वारा किसी विशेष सेवा पर चालू वर्ष के लिए व्यय किये जाने के लिए प्राधिकृत कोई राशि अपर्याप्त पायी जाती है या वर्ष के बजट में उल्लिखित न की गई किसी नयी सेवा पर खर्च की आवश्यकता उत्पन्न हो जाती है तो राष्ट्रपति एवं अनुपूरक अनुदान संसद के समक्ष पेश करवायेगा। अनुपूरक अनुदान औरविनियोग विधेयक दोनों के लिए एक ही प्रक्रिया विहित की गई है।

लेखानुदान : जैसा की हमें पता है, विनियोग विधेयक के पारित होने के बाद ही संचित निधि से कोई रकम निकाली जा सकती है किन्तु सरकार को इस विधेयक के पारित होने के पहले ही रुपयों की आवश्यकता हो सकती है। इसलिये 116(क) के अन्तर्गत लोक सभा लेखा अनुदान (Vote on account) पारित कर सरकार के लिए अग्रिम राशि मंजूर कर सकती है।

अधिक अनुदान : जब किसी वित्तीय वर्ष के दौरान किसी सेवा पर उस वर्ष और उस सेवा के लिए अनुदान की गयी रकम से कोई धन व्यय हो गया हे तो राष्ट्रपति लोकसभा में अधिक अनुदान की मांग रखता है।

गणपूर्ति (Chuorum) : सदन में किसी बैठक के लिए गणपूर्ति अध्यक्ष सहित कुल सदस्य संख्या का दसवां भाग होती है बैठक शुरू होने के पूर्व यदि गणपूर्ति नहीं है तो गणपूर्ति घंटी बजायी जाती है। अध्यक्ष तभी पीठासीन होता है जब गणपूर्ती हो जाती है।प्रश्नकाल : दोनों सदनों में प्रत्येक बैठक के प्रारम्भ के एक घण्टे तक प्रश्न किये जाते हैं और उनके उत्तर दिये जाते हैं। इसे प्रश्न काल कहा जाता है। प्रश्न काल के दौरान सदस्यों को सरकार के कार्यों पर आलोचना का समय मिल जाता है। इसके दो लाभ हैं- एक तो सरकार जनता की कठिनाइयों एवं अपेक्षाओं के प्रति सजग रहती है। दूसरे इस दौरान सरकार अपनी नीतियों एवं कार्यक्रमों की जानकारी सदन को देती है।

संसद की समितियाँ 

  • सार्वजनिक लोक लेखा समिति सार्वजनिक लेखा समिति का गठन प्रत्येक वर्ष संसद के प्रथम सत्र में किया जाता है। 
  • इस समिति का मुख्य कार्य देश के वित्तीय मामलों से संबंधित अपव्यय, भ्रष्टाचार,अकुशलता अथवा कार्य संचालन की त्रुटियों की जाँच करना है। 
  • सार्वजनिक लेखा समिति का अध्यक्ष लोकसभा के अध्यक्ष द्वारा नियुक्त किया जाता है, विपक्षी यदि लोकसभा का उपाध्यक्ष इसका सदस्य होता है, तो वहीं इसका अध्यक्ष होता है। 
  • लोक लेखा समिति : प्राक्कलन समिति की ‘जुड़वा बहन’ के रूप में ज्ञात इस समिति में 22 सदस्य होते हैं, जिनमें से 15 सदस्य लोकसभा के सदस्यों द्वारा तथा 7 सदस्य राज्य सभा के सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं। 1967 से स्थापित प्रथा के अनुसार इस समिति के अध्यक्ष के रूप में विपक्ष के किसी सदस्य को नियुक्त किया जाता है।

प्राक्कलन समिति 

  • लोकसभा की प्राक्कलन समिति : इस समिति में लोकसभा के 30 सदस्य होते हैं और इसमें राज्यसभा के सदस्यों को शामिल नहीं किया जाता। यह सबसे बड़ी समिति होती
  • प्राक्कलन समिति एकमात्र लोकसभा की समिति होती है और इसमें राज्य सभा के सदस्य सम्मिलित नहीं होते। 
  • इस समिति के सभापति की नियुक्ति लोकसभा के अध्यक्ष द्वारा किया जाता है। 
  • यह समिति मितव्ययिता, कार्यकुशलता तथा सांगठनिक सुधार के बारे में अपनी रिपोर्ट देती है। 
  • इस समिति का मुख्य कार्य नियंत्रक महालेखापरीक्षक के प्रतिवेदनों तथा सार्वजनिक प्रतिष्ठानों के लेखा एवं प्रतिवेदनों की समीक्षा करना है। 
  • लेखानुदान : विनियोग विधेयक को पारित करने के पहले जब सरकार को धन की आवश्यकता होती है, तब लोकसभा लेखानुदान के माध्यम से सरकार के व्यय के लिए अग्रिम धनराशि की व्यवस्था करती है।

विशेषाधिकार समिति

  • इस समिति में लोकसभा के 15 सदस्य होते हैं।
  • सदस्यों की नियुक्ति लोकसभाध्यक्ष द्वारा की जाती है। 
  • प्रधानमंत्री तथा वित्तमंत्री भी इस समिति में सम्मिलित किये जाते हैं। 
  • इस समिति का मुख्य कार्य विशेषाधिकारों के उल्लंघन से संबंधित मामलों की जाँच करना है।

अन्तर्राज्य परिषद 

  • संविधान के अनु. 263 के अन्तर्गत केन्द्र एवं राज्यों के बीच समतय स्थापित करने के लिए राष्ट्रपति एक अन्तर्राज्य परिषद की स्थापना कर सकता है। 
  • पहली बार जून, 1990 ई. में अन्तर्राज्य परिषद की स्थापना की गई जिसकी पहली बैठक 10 अक्टूबर, 1990 ई. को हुयी।
  • इसमें निम्न सदस्य होते हैं- प्रधानमंत्री तथा उनके द्वारा मनोनीत छह कैबिनेट स्तर के मंत्री, सभी राज्यों व संघ राज्य क्षेत्रों के मुख्यमंत्री एवं संघ राज्य क्षेत्र के प्रशासक।
  • अन्तर्राज्य परिषद की बैठक वर्ष में तीन बार की जायेगी जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री या उसकी अनुपस्थिति में प्रधानंत्री द्वारा नियुक्त कैबिनेट स्तर का मंत्री करता है।

वित्त आयोग 

  • संविधान के अनु. 280 में वित्त आयोग के गठन का प्रावधान किया गया है।
  • वित्त आयोग के गठन का अधिकार राष्ट्रपति को दिया गया है। 
  • वित्त आयोग में राष्ट्रपति द्वारा एक अध्यक्ष एवं चार अन्य सदस्य नियुक्त यि जाते हैं।
  • नोट : पहला वित्त आयोग 1951 ई. में गठित किया गया था इसके अध्यक्ष के. सी. नियोगी।

लोक सेवा आयोग 

  • भारत में सन् 1919 ई. के भारत सरकार अधिनियम के अधीन सर्वप्रथम 1926 इ. में लोक सेवा आयोग की स्थापना की गयी लोक सेवा आयोग की स्थापनाक लिए 1924 ई. में विधि आयोग ने सिफारिश की थी। 
  • संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों की संख्या निर्धारित करने की शक्ति राष्ट्रपति को है वर्तमान में इसकी संख्या 10 है।

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केन्द्रीय मंत्रिपरिषद (Central Council of Ministers)

केन्द्रीय मंत्रिपरिषद

मन्त्रिपरिषद में एक प्रधानमंत्री तथा आवश्यकतानुसार अन्य मंत्री होते हैं। मन्त्रियों की संख्या संविधान के द्वारा निश्चित नहीं की गयी है। 

91वाँ संशोधन के द्वारा केन्द्र में मंत्रियों की संख्या लोकसभा के कुल सदस्यों के 15 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकती। 

मन्त्रिपरिषद में प्रधानमंत्री, कैबिनेट मंत्री, राज्यमंत्री और उपमंत्री- इन चारों श्रेणियों के मंत्री सम्मिलित होते हैं लेकिन मन्त्रिमण्डल में प्रधानमंत्री और कैबिनेट स्तर के मंत्री ही सम्मिलित होते हैं।

महान्यायवादी (अनु. 76) 

महान्यायवादी भारत सरकार का प्रथम विधि अधिकारी होता है। 

महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और पारिश्रमिक भी राष्ट्रपति निर्धारित करता है। 

महान्यायवादी पद के लिए वही अर्हताएँ होनी चाहिए जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की होती है और राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यन्त पद धारण कर सकता है। 

भारत का महान्यायवादी मंत्रिपरिषद् का सदस्य नहीं होता है, लेकिन उसे किसी भी सदन में बोलने का अधिकार है। 

वह संसद के किसी भी सदन में मत देने का अधिकारी नहीं होता है। 

महान्यायवादी का मुख्य कार्य राष्ट्रपति द्वारा भेजे गये विधि संबंधी प्रश्नों पर सलाह देना है। 

अपने कर्त्तव्यों के पालन में उसे देश के किसी भी न्यायालय में सुनवाई का अधिकार प्राप्त होता है। 

भारत में महान्यायवादी का पद एक स्वतंत्र पद है, जबकि ब्रिटेन में वह वहाँ के मंत्रिमण्डल का सदस्य होता है।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (अनु. 148-151) 

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 में नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक के पद की व्यवस्था की गई है। 

नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

उसका वेतन उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के बराबर होता है जो भारत की संचित निधि से दिया जाता है। 

नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक 6 वर्ष की अवधि के लिए नियुक्त किया जाता है लेकिन यदि इस अवधि को पूरा करने के लिए वह 65 वर्ष की आयु का हो जाता है, तो अवकाश प्राप्त कर लेता है। 

नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक को महाभियोग की प्रक्रिया से ही हटाया जा सकता है। 

नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक के विरुद्ध महाभियोग लाने के दो आधार हैं- 1. साबित कदाचार और 2. असमर्थता 

नियंत्रक तथा महालेखापरीक्षक ओर संघ एवं राज्यों के समस्त वित्तीय प्रणाली का नियंत्रक होता है। 

नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक भारत एवं उसके सभी राज्यों एवं संघ शासित प्रदेशों की संचित निधि से किये जाने वाले व्यय की संपरीक्षा करता है और उन पर यह प्रतिवेदन देता है कि ऐसा व्यय विधितः किया गया है अथवा नहीं। 

वह संघ तथा राज्यों के आकस्मिक निधियों तथा सार्वजनिक लेखाओं के सभी व्ययों की भी संपरीक्षा करता है तथा उन पर अपना प्रतिवेदन देता है। 

वह संघ तथा राज्यों के सभी विभागों द्वारा किए गए सभी व्यापार और विनिर्माण संबंधी हानि और लाभ-हानि लेखाओं की भी संपरीक्षा कर उन पर अपना प्रतिवेदन देता है। 

उल्लेखनीय है कि नियंत्रक और महालेखापरीक्षक भारत की संचित निधि से निकाले जाने वाले धन पर कोई नियंत्रण नहीं लगा सकता। वह व्यय किये जा चुके धन की ही संपरीक्षा कर सकता है।

भारत की संचित निधि (अनु. 266(1)) 

भारत की संचित निधि पर भारित व्यय निम्न हैं

राष्ट्रपति का वेतन एवं भत्ता और अन्य व्यय ।

राज्य सभा सभापति और उपसभापति तथा लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन एवं भत्ते । 

सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का वेतन भत्ता तथा पेंशन।। 

भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक का वेतन, भत्ता तथा पेंशन। 

ऐसा ऋण जिसे देने का भार भारत सरकार पर हैं 

भारत सरकार पर किसी न्यायालय द्वारा दी गयी डिग्री या पंचाट। 

कोई अन्य व्यय जो संविधान द्वारा या संसद विधि द्वारा इस प्रकार भारित घोषित करें। 

भारत की आकस्मिकता निधि 267 संविधान का अनु. 267 संसद और राज्य विधान मंडल को अपनी स्थिति के अनुसार भारत या राज्य की आकस्मिकता निधि सर्जित करने की शक्ति देता है।

यह निधि 1950 द्वारा गठित की गई है। यह निधि कार्यपालिका के व्यय के लिये बनायी गयी है।

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