राजस्थान के दुर्ग ( Forts of Rajasthan )

(1) गागरोन का किला :

  • – वर्तमान झालावाड़ जिले में काली सिंध व आबू नदियों के किनारे स्थित हैं। 
  • – गागरोन का किला एक जलदुर्ग हैं। 
  • – इसका निर्माण डोड परमार शासकों ने करवाया था, इसलिए इसे डोडगढ़ भी कहते हैं। इसे धूलरगढ़ भी कहते हैं। 
  • – देवेनसिंह खीची ने बजीलदेव डोड को हराकर इस पर अधिकार कर लिया था। (चौहान कुल कल्पद्रुम के अनुसार)

जैत्रसिंह

  • 1303में। जैत्रसिंह के समय अलाउदीन ने आक्रमण किया था।
  • – संत हमीदुद्दीन चिश्ती जैत्रसिंह के समय गागरौण आए थे, जिन्हें हम ‘मीठे साहब’ के नाम से जानते हैं इनकी दरगाह गागरौण के किले में बनी हुयी हैं।

प्रतापसिंह

  • इन्हें हम संत पीपा के नाम से जानते हैं। 
  • – इनके समय में फिरोज तुगलक ने गागरौण पर विफल आक्रमण किया था। 
  • – संत पीपा की छतरी गागरौण में बनी हुयी हैं।
  • अचलदास – 1423 ई. में मालवा का सुलतान होशगंशाह गागरोन पर आक्रमण करता हैं। इस समय गागरौण के किले का पहला साका होता हैं। 
  • – अचलदास खिंची अपने साथियों के साथ लड़ता हुआ मारा जाता हैं। 
  • – लाला मेवाड़ी ने नेतृत्व में जौहर किया जाता हैं। 
  • – अचलदास खीची की अन्य रानी का नाम – उमा सांखला (जांगलू) 
  • – शिवदास गाडण ने ‘अचलदास खीची री वचनिका’ नामक ग्रन्थ लिखा हैं।

पाल्हणसिंह (अचलदास का बेटा, कुम्भा का भांजा) 

  • – 1444 ई. में मालवा का सुल्तान महमूद खिलजी गागरोण पर आक्रमण करता हैं। 
  • – कुम्भा अपने सेनानायक धीरज दवे को भेजकर पाल्हणसिंह की सहायता करता हैं। 
  • – इस समय गागरोण के किले का दूसरा साका होता हैं। महमूद खिलजी ने गागरौण का किला महाराणा सांगा (मेवाड़) के अधिकार में आ गया था। 
  • – सांगा ने अपने मित्र मेदिनी राय (चन्देरी) को यह किला दे दिया।
  • – 1567-68 के चित्तौड़ आक्रमण के समय अकबर इसके किले में ठहरता हैं और फैजी इससे मुलाकात करता हैं। 
  • – बाद में अकबर ने यह किला पृथ्वीराज राठौड़ को दे दिया। 
  • – पृथ्वीराज राठौड़ ने इसी किले में ‘बेलिक्रिसण रूक्मिणी’ की रचना की। 
  • – शाहजहां ने यह किला कोटा महाराजा माधोसिंह को दे दिया था 
  • – कोटा महाराजा दुर्जनसाल ने यहां मधुसुदन का मंदिर बनवाया। 
  • – जालिमसिंह झाला ने यहां जालिम कोट (परकोटा) का निर्माण करवाया। 
  • – औरंगजेब ने यहां बुलन्द दरवाजे का निर्माण करवाया।
  • – इस किले में एक जौहर कुंड अंधेरी बावड़ी हैं यहां बंदियों को सजा दी जाती थी। 
  • – गागरोण का किला बिना नीव के (चट्टानों पर) खड़ा हैं। 
  • – कोटा राज्य की टकसाल यहीं पर थी।

(2) चित्तौड़गढ़ का किला:

  • दुर्गो का सिरमौर 
  • – दुर्गो का तीर्थस्थल 
  • – राजस्थान का गौरव – ‘ओ गढ़ नीचो किम झुकै, ऊँचों जस गिर वास। हर झाटै जौहर जठै, हर भाठे इतिहास’ 
  • – इस किले का निर्माण चित्रागंद मौर्य ने किया था। (कुमारपाल प्रबन्ध के अनुसार) 
  • – 743 ई. में बापा रावल ने मान मौर्य को हराकर चित्तौड़ के किले पर अधिकार कर लिया। 
  • – 1559 ई. में उदयपुर की स्थापना तक चितौड़ मेवाड़ की राजधानी रहा हैं। यह राजस्था का सबसे बड़ा आवासीय किला हैं। 
  • – चित्तौड़ के किले में तीन साके हुए। 
  • 1. 1303 ई. में 
  • 2. 1535 ई. 
  • – कुम्भा में कुम्भश्याम। कम्भा स्वामी का मंदिर, श्रृंगार चंवरी का मंदिर बनवाया। 
  • – मोकल ने (समिद्वेश्वर) मंदिर का पुनर्निमाण करवाया। 
  • – बनवीर ने नवलखा भंडार बनवाया। 
  • – बनवीर ने तुलजा भवानी का मंदिर बनवाया। 
  • – चित्तौड़ के किले में :- रत्नेश्वर तालाब, भीमलत तालाब, मीरा मंदिर, कालिका मंदिर, लाखोटा बारी आदि प्रमुख
  • 3. 1568 ई. में।
  • – चित्तौड़ का किला मेसा पठार पर मीनाकृति में बना हुआ हैं। 
  • – धान्वन दुर्ग को छोड़कर इसमें अन्य सभी विशेषताएं हैं। 
  • – यह किला गम्भीरी व बेड़च नदियों के किनारे बसा हुआ हैं। 
  • – महाराणा कुम्भा ने इसमें विजयस्तम्भ (कीर्ति स्तम्भ) का निर्माण करवाया। 
  • – चित्तौड़ के किले में एक जैन कीर्ति स्तम्भ बना हुआ हैं। 
  • – यह राजस्थान की प्रथम इमारत हैं, जिसपर 15 अगस्त 1949 को एक रूपये का डाक टिकट जारी किया गया था।

(3) कुम्भलगढ़ का किला:

  • – महाराणा कुम्भा ने 1448 ई. के बीच करवाया। 
  • – कुम्भलगढ़ का वास्तुकार मडंन था। 
  • – कुम्भलगढ़ वर्तमान राजसमंद जिले में स्थित हैं। 
  • – कुम्भलगढ़ के किले को मेवाड़-मारवाड का सीमा प्रहरी कहते हैं 
  • – अत्यधिक ऊँचाई पर बना हुआ होने के कारण अबुल फजल ने कहा था कि इस किले को नीचे से ऊपर की ओर देखने पर पगड़ी गिर जाती हैं। 
  • – कुम्भलगढ़ के शीर्ष भाग में कटारगढ़ बना हुआ हैं, जो कुम्भा का निजी आवास था। कटारगढ़ को मेवाड़ की आंख कहते हैं।
  •  – कुम्भलगढ़ के किले में उद्धा ने कुम्भा की हत्या (मामदेव कुंड के पास) की थी। 
  • – उड़नाराजकुमार पृथ्वीराज की छतरी बनी हुयी हैं। (12 खम्भों की) 
  • – पन्नाधाय उदयसिंह को लेकर कुम्भलगढ़ के किले में आयी थी उदयसिंह का रातिलक यहीं हुआ था।
  • – प्रताप ने भी अपना शुरूआती शासन कुम्भलगढ़ से चलाया था। 
  • – कुम्भलगढ़ के किले को मेवाड़ के शासकों की ‘संकटकालीन राजधानी’ कहते हैं। 
  • – कुम्भलगढ़ के किले में भी कुम्भा स्वामी का मंदिर बना हुआ हैं। 
  • – इसी किले में झाली रानी का मालिया बना हुआ हैं। 
  • – कुम्भलगढ़ के दीवार की लम्बाई – 36 किलोमीटर हैं। 
  • – चौड़ाई इतनी हैं कि आठ घोडे समानान्तर दौड़ सकते हैं। 
  • – कर्नल जेम्स टॉड ने इसकी तुलना (यूरोप) के एट्रस्कन’ से की हैं।

(4) रणथम्भौर का किला:

  • वर्तमान में सवाई माधोपुर में स्थित। 
  • – 8 वीं शताब्दी में चौहान शासकों द्वारा निर्मित। 
  • – अण्डाकार आकृति में निर्मित। 
  • – गिरि व वन दोनों दुर्गा की विशेषता रखता हैं।
  • – अबुल फजल:- ‘बाकी सब किले नंगे हैं, पर रणथम्भौर दुर्ग बख्तरबंद हैं।’ 
  • – हम्मीर के समय जलालुदीन खिलजी ने यहां एक विफल आक्रमण किया था। इस विफलता के बाद खिलजी ने कहा था। 
  • – ऐसे 10 किलों को मैं मुसलमान के बाल के बराबर भी नहीं समझता। . 
  • – 1301 ई.’ में अलाउदीन ने रणथम्भौर किले पर आक्रमण किया। उस समय रणथम्भौर का पहला साका (हम्मीर के नेतृत्व में) हुआ। 
  • – रणथम्भौर का किला हम्मीर हठ के लिए प्रसिद्ध हैं। – “रण लडियों रण नीति सुं, रणथल रणथम्भौर। हठ राख्यौ हम्मीर रो, कट-कट खांगा कोर।।” 
  • – इस किले में जोगी महल, सुपारी महल, रणत भंवर गणेश जी का मंदिर (शादी की पहली कुमकुमपत्री याहं भेजी जाती हैं।), पद्म तालाब, जौरा-भौंरा महल, पीर सद्दीन की दरगाह। 
  • – अकबर कालीन टकसाल यहां स्थित हैं।

मेहरानगढ:

  • – यह किला जोधपुर में मयूर आकृति में बना हुआ हैं, इसलिए इसे मयूर ध्वज गढ़ भी कहते हैं। 
  • – इस किले का निर्माण राव जोधा ने 1459 ई. में करवाया था। 
  • – इस किले की नींव करणी माता ने रखी थी। 
  • – मेहरानगढ़ किले की नींव में राजाराम नामक व्यक्ति की बलि दी गयी थी। 
  • – मालदेव के समय शेरशाह सूरी ने इस किले पर अधिकार कर लिया था। तथा एक मस्जिद का निर्माण करवाया था। 
  • – मालदेव ने किले में लोहा पोल का निर्माण करवाया था।
  • अजीतसिंह ने मुगल खालसे की समाप्ति पर फतेह पोल का निर्माण करवाया। 
  •  मानसिंह ने किले में पोल का निर्माण करवाया। (इस पोल के दरवाजे निमाज का ठाकुर ‘अमरसिंह उदावत’ अहमदाबाद से लाया था।) 
  • – मेहरानगढ़ के किले में ‘कीरतसिंह सोढ़ा’ की छतरी बनी हुयी हैं। 
  • – धन्ना- भीवा की छतरी बनी हुयी हैं। (मामा-‘भान्जा की छतरी) 
  • – महाराजा सूरसिह ने मोती महल का निर्माण करवाया।
  • – सूरसिंह ने ही एक तलहटी महल (अपनी रानी सौभाग्यवती के लिए) बनवाया। 

– जैसलमेर दुर्गः

  • – जैसलमेर के राजा जैसल ने 1155ई. में इस किले का निर्माण करवाया। 
  • – “गढ़ दिल्ली गढ़ः आगरों, अर गढ़ बीकानेर। भलो चिणायों भाटियां, सिरे गढ़ जैसलमेर” 
  • – जैसलमेर के किले में 77 बुर्जे बनी हुयी हैं। 
  • – जैसलमेर का किला त्रिभुजाकार (त्रिकुट) आकृति में बना हुआ हैं। 
  • – “दूर से देखने पर ऐसा लगता हैं मानों रेत के समन्दर में जहाज ने अपना लंगर डाल रखा हो।” 
  • – जैसलमेर का किला अंगडाई लेते शेरे के समान प्रतीत होता हैं। 
  • – जैसलमेर के किले को ‘स्वर्णगिरी का किला’ कहते हैं। इसे सोनार का किला भी कहते हैं। 
  • – सत्यजीत रे ‘सोनार किला’ नामक डॉक्यूमेन्ट्री फिल्म बनायी थी। 
  • – जैसलमेर के किले में दोहरा परकोटा बना हुआ हैं, जिसे कमर कोट कहा जाता हैं। 
  • – जैसलमेर का किला अपने ढाई साको के लिए प्रसिद्ध हैं। 
  • – अबुल फजल ने कहा था- पत्थर की टांगे ही आपको जैसलमेर के किले तक पहुंचा सकती हैं।  – “शरीर किजे काठ रा, पग कीजे पाषाण। बस्तर कीजे लौह का, तब पंहुचे जैसाण।।” 
  • – इस किले में चूने का उपयोग नहीं किया हैं। 
  • – जैसलमेर के किले की छत लकड़ी की बनी हुयी हैं। 
  • – बादल महल बना हुआ हैं। 
  • – जवाहर विलास महल। 
  • -‘ 2009 ई. में जैसलमेर किले में 5 रू. का डाक टिकट जारी किया गया।

बीकानेर दुर्गः (चतुष्कोण आकृति) 

  • – बीकानेर के किले को जूनागढ़ किला कहा जाता हैं। 
  • – इस किले का निर्माण महाराजा रायसिंह ने करवाया था। 
  • – इसमें 37 पुर्जे बनी हुयी हैं। 
  • – जूनागढ़ के किले को ‘जमीन का जेवर’ कहते हैं। 
  • – जूनागढ़ में सूरजपोल के पा सजयमल फता की मूर्तियां लगी हुयी हैं। 
  • – जूनागढ़ किले में 33 करोड़ देवी – देवताओं का मंदिर हैं। 
  • – बादल महल , अनूप महल (बीकानेर के राजाओं का रातिलक किया जाता था।) निर्माण महाजा डूंगरसिंह ने करवाया था। , हरमंदिर – जूनागढ़ किले के चारों तरफ खाई बनी हुई हैं। 
  • – आमेर किले के चारों तरफ खाई बनी हुई हैं। 
  • – आमेर व बीकाने दो ऐसे किले हैं, जो जिस वंश के द्वारा निर्मित किए गए थे, हमेशा उसी वंश के अधिकार में रहे।

भटनेर का किला:

  • – हनुमानगढ़ जिले में स्थित हैं। (भूपत भाटी ने इसका निर्माण शुरू करवाया था।) 
  • – भाटी शासकों ने इसका निर्माण करवाया था। महमूद गजनवी ने इस पर आक्रमण किया था।
  • – तैमूर ने भी यहां आक्रमण किया था इस आक्रमण के समय यहां हिन्दू महिलाओं के साथ-साथ मुस्लिम महिलाओं ने भी जौहर किया था। 
  • – तैमूर इसे भारत का सर्वश्रेष्ठ किला बताता हैं।
  • – तैमूर के आक्रमण के समय यहां का शासक दूलचन्द भाटी था। 
  • – हूँमायुं के भाई कामरान ने यहां आक्रमण किया था। उस समय यहां का किलेदारन खेतसिंह कांधल था। 
  • – अकबर ने भी यहां आक्रमण किया था। कल्याणमल का भाई ठाकुरसिंह लड़ता हुआ मारा गया। 
  • – रायसिंह के बेटे दलपतसिंह व उसकी पांच रानियों के स्मारक बने हुए हैं। (दलपतसिंह ने अपने पिता रायसिंह के विरूद्ध भी विद्रोह किया था।) 
  • – मनोहर कच्छवाहा ने यहां मनोहर पोल का निर्माण करवाया। 
  • – 1805 ई. में बीकानेर महाराजा सूरतसिंह ने इस पर अधिकार कर लिया उस दिन मंगलवार था, इसलिए भटनेर के
  • किले का नाम बदलकर हनुामनगढ़ कर दिया। 
  • – भारत में सबसे अधिक आक्रमण झेलने वाला किला। 
  • – भटनेर के किले को ‘उत्तरी सीमा का प्रहरी’ कहा जाता हैं। 
  • – बलबन के भाई शेर खां की कब्र हैं।

जालौर का किला 

  • सूकड़ी नदी के किनारे स्थित। 
  • – सुवर्णगिरी के किले के नाम से विख्यात। 
  • – प्रतिहार शासक नागभट्ट प्रथम ने इसका निर्माण करवाया। 
  • – कान्हड़देव सोनगरा ने यहां पुनर्निमाण करवाया। 
  • – 1311 ई. में जालौर के किले में शाका हुआ था। 
  • – अलाउदीन खिलजी ने यहां अलाई मस्जिद व खिलजी मीनार बनवाई थी। जालौर का नाम जलालाबाद रख दिया था। 
  • – जोधपुर महाराजा मानसिंह अपने संघर्ष के दिनों में जालौर के किले में रहा था। (मानसिंह महल) 
  • – जालौर के किले में तोपखाना मस्जिद बनी हुयी हैं। जो पूर्व में भोज परमार द्वारा बनायी गयी एक संस्कृत पाठशाला थी। कान्हड़देव की बावड़ी, वीरमदे की चौकी, जलंधर नाथ जी का मंदिर। मलिक शाह की दरगाह।

सिवाणा का किला:

  • बाड़मेर जिमें मे स्थित। 
  • – वीर नारायण पंवार ने इसका निर्माण करवाया था।
  • कूमट झाड़ी की अधिकता के कारण इसे कूमट दुर्ग भी कहते हैं। 
  • – सिवाण का किला राठौड़ो की शरणस्थली कहलाता हैं। 
  • – अलाउदीन के आक्रमण के समय सातल व सोम के नेतृत्व में साका हुआ था। 
  • – अकबर के आक्रमण के समय कल्ला रायमलोत के नेतृत्व में साका हुआ था।
  • “किलों अणखलों यूं कहे, आव कल्ला राठौड़। मळारे तो मेहणो उतरे, तोहे बधे सिर मोड़।।” 
  • – सिवाणा के किले में मांडेलाव तालाब बना हुआ हैं।

आमेर का किला:

  • – इसे काकिलगढ़ भी कहा जाता हैं। 
  • – मानसिंह I ने इसका निर्माण करवाया था। 
  • – आमेर के किले में सुहाग मंदिर हैं। यह रानियों क हास-परिहास का स्थान था। 
  • – सुख मंदिर :- एक जैसे 12 कमरे हैं, जो मिर्जा राजा जयसिंह ने बनवाए थे। 
  • – दौलाराम का बाग 
  • – मावठा जलाशय 
  • – शिला माता का मंदिर 
  • – जगत शिरोमणि मंदिर 
  • – आम्बिकेश्वर मंदिर 
  • – बारहदरी महल 
  • – दीवान – ए – आम 
  • – दीवान ए खास 
  • – केसर क्यारी बगीचा

जयगढ़ का किला:

  • – पहले इस स्थान को चील्ह का टोला कहते हैं। 
  • – मानसिंह प्रथम ने इसक निर्माण कार्य शुरू करवाया था। 
  • – मिर्जा राजा जयसिंह ने इसका निर्माण पूरा करवाया व इसका नाम जयगढ़ रखा। 
  • – सवाई जयसिंह ने इस में जयबाण तोप रखवायी। 
  • – जयगढ़ का किला अपने पानी के विशाल टांकों के लिए प्रसिद्ध हैं। 
  • – इसमें आमेर के कछवाहों शासकों का शस्त्रागार व खजाना था। 
  • – इन्दिरा गांधी ने यहां 1975-76 में यहां खुदाई करवायी। 
  • – इस किले में सुरंगे बनी हुयी हैं। इस कारण इस किले को रहस्यमय दुर्ग भी कहते हैं। 
  • – इसे जयपुर का संकटमोचक किला कहते हैं। 
  • – विजयगढ़ी:- राजनैतिक जेल, सवाई जयसिंह ने अपने छोटे भाई (चीमाजी) विजयसिंह को यहां गिरफ्तार करके रखा था, इस कारण इसका नाम विजयगढ़ी पड़ गया।

नाहरगढ़ का किला:

  • – इस किले का निर्माण सवाई जयसिंह ने करवाया था। 
  • – जगतसिंह द्वितीय की प्रमिका रसकपूर को यहीं गिरफ्तार करके रखा गया था। 
  • – सवाई माधोसिंह द्वितीय ने अपनी 9 पासी । पासवानों के लिए 9 एक जैसे महल बनवाए। 
  • – इसे जयपुर का पहरेदार किला कहते हैं। 
  • – प्रारम्भ में इसका नाम सुदर्शनगढ़ था, बाद में नाहरसिंह भौमियाजी के नाम पर इसका नाम नाहरगढ़ पड़ गया।

बाला किला:

  • – अलवर जिले में स्थित हैं। 
  • – निकुम्भ चौहानों ने इसका निर्माण करवाया था। 
  • – कोकिल देव के बैटै अलधुराय ने इसका पुनर्निमाण करवाया था। 
  • – हसन खां मेवाती ने इसकी मरम्मत करवायी।
  • – इसमें :- निकुम्भ महल, जल महल 
  • – जहाँगीर इस किले में ठहरता था। इसलिए इसे सलीम महल भी कहते हैं। 
  • – करणी माता का मंदिर बना हुआ हैं। (बख्तावरसिंह)

तारागढ़ (अजमेर):

  • – इस किले का निर्माण चौहान शासक अजयराज ने करवाया। उड़ना राजकुमार पृथ्वीराज ने अपनी पत्नी तारा के नाम पर इसका नाम तारागढ़ रख दिया। 
  • – पृथ्वीराज चौहान का स्मारक बना हुआ हैं। पृथ्वीराज चौहान के घोड़े नाट्य रम्भा का स्मारक बना हुआ हैं। – मीरान साहब की दरगाह बनी हुयी हैं। 
  • – यह किला मराठों के अधिाकर में भी रहा था। 
  • – इसव किले में नाना साहब का झालरा बना हआ हैं। 
  • – मराठों से यह किला अग्रेजों ने छीन लिया। 
  • – विलियम बैंटिक ने इसे ‘आरोग्य सदन’ में बदल दिया। 
  • – दारा शिकोह ने यहां शरण ली थी। 
  • – रूठी उमा दे ने भी अपना कुछ समय यहां बिताया था। 
  • – हिजडे की मजार बनी हुयी है। 
  • – इसे राजस्थान का जिब्राल्टर कहते हैं। 
  • – गढ़ बीठली किला भी कहते हैं।

अकबर का किला:

  • 1570 ई. में ख्वाजा मुइनदीन के प्रति सम्मान प्रकट करने केलिए अकबर ने इस किले का निर्माण करवाया। 
  • – हल्दीघाटी युद्ध से पहले यहां पर युद्ध की अंतिम योजना बनायी गयी थी। 
  • – जाहंगीर मेवाड़ अयान के दौरान तीन साल यहां ठहरा था। 
  • – 10 जनवरी 1616 को ‘टॉमस रो’ जहांगीर से मिलता हैं। 
  • – इस महल को अकबर का दौलतखाना भी कहते हैं। 
  • – अग्रेजों ने इसे शस्त्रागार में बदल दिया था, इसलिए इसे मैगजीन का किला भी कहते हैं। 
  • – इसमें राजपूताना म्यूजियम बना हुआ हैं।

चुरू का किला :

  • – इस किले में बीकानेर के राजा सूरतसिंह ने यहां आक्रमण किया, उस समय चुरू का ठाकुर स्योजीसिंह (शिव जी सिंह) था। 
  • – इस आक्रमण के समय किले में सीसा समाप्त होने पर चांदी के गोले दागे गये थे (बीकानेर का सेनापति अमरचन्द सुराणा) 
  • – “बीको फीको पड़ गयो, बण गोरा हमगीर। चांदी गोळा चालिया, आ चुरू री तासीर”

भरतपुर का किला (लोहागढ़) 

  • – 1733 ई. में सूरजमल ने इस किले का निर्माण करवाया। 
  • – भरतपुर के राजा जवाहरसिंह ने इस किले में दिल्ली आक्रमण से लूट कर लाए हुये अष्ट धातु के दरवाजे लगवाए। तथा इस जीत की स्मृति में जवाहर बुर्ज बनवायी। 
  • – महाराजा रणजीतसिंह ने जसवंत राव होल्कर को इस किले में शरण दी थी। 
  • – अनेक प्रयासों के बावजूद अग्रेज इस किले को जीत नहीं सकें, इसी कारण भरतपुर के किले को लोहागढ़ कहा जाता हैं।
  • – रणजीतसिंह ने इस जीत की स्मृति में ‘फतह बुर्ज’ का निर्माण करवाया। 
  • – चार्ल्स मेटकॉफ ने अंग्रेजों की इस विफलता पर कहा था। 
  • – “अग्रेजी की प्रतिष्ठा भरतपुर के दुर्भाग्यपूर्ण घेरे में दबकर रह गई।” इसी किले के बारें में कहा जाता हैं। 
  • – “आठ फिरंगी नौ गौरा, लड़े जाट का दो छोरा।।” 
  • – किशोरी महल, दादी मां का महल, वजीर की कोठी, गंगा मंदिर, लक्ष्मण मंदिर।

बयाना का किला:

  • – इस किले का निर्माण विजयपाल ने करवाया था। 
  • – इसे बादशाह का किला, बाणासुर किला, विजय मंदिर गढ, के नाम से जाना जाता हैं। 
  • – खानवा के युद्ध के बाद बाबर इस किले में आया था। 
  • – इसमें:- लोदी मीनार, अकबर की छतरी, जहांगीरी दरवाजा, सादुल्ला सराय, दाउद खां की मीनार। 
  • – बयाना में समुद्रगुप्त में विजय स्तम्भ का निर्माण करवाया। 
  • – रानी चित्रलेखा (समुद्रगुप्त के सामत की पत्नी) ने ऊषा मंदिर का निर्माण करवाया। 
  • – समुन्द्रगुप्त के सामन्त विष्णुवर्धन ने भीमलाट ऊषालाट का निर्माण करवाया था।

तारागढ़ (बूंदी):

  • – इस किले का निर्माण हाड़ा शासक बरसिंह ने करवाया था। 
  • – दूर से देखने पर यह तारे के समान दिखायी देता हैं। 
  • – इसमें:- सुख महल , छत्र महल, रानी जी की बावड़ी, 84 खम्भों की छतरी, फूल सागर तालाब। 
  • – सूरसागर तालाब- बंदी, बीकानेर – बूंदी का तारागढ़ किला अपने भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध हैं। 
  • – रूडयार्ड किपलिंग :
  • – इसे देखकर लगता हैं कि इसको भूतों द्वारा निर्माण करवाया गया हैं। 
  • – जेम्स टॉड:- बूंदी के महलों को राजस्थान का सर्वश्रेष्ठ महल बताता हैं। 
  • – गर्म गुंजन:- तोप रखी हुयी हैं।
  • मांडलगढ:- वर्तमान भीलवाड़ा जिले में स्थित हैं। 
  • – इस किले का निर्माण चादंना / चानणा गुर्जर ने माण्डिया भील की स्मृति में करवाया था। 
  • – माडंलगढ़ में जगन्नाथ कछवाहा की 32 खम्भों की छतरी बनी हुयी हैं। 
  • – राणा सांगा की छतरी भी यहीं स्थित हैं। 
  • – मानसिंह हल्दीघाटी युद्ध से पहले मांडलगढ़ में रूकता हैं। 
  • – इस में उडेश्वर महादेव का मंदिर बना हुआ हैं। 
  • – शीतला माता का मंदिर भी हैं। 
  • – मांडलगढ़ में मण्डल आकृति में बना हुआ हैं, इसलिए भी इसे मांडलगढ़ कहते हैं।

अचलगढः

  • – इस किले का निर्माण परमार शासकों ने करवाया था।
  • – महाराणा कुम्भा ने इसका पुनर्निर्माण करवाया व कुम्भा स्वामी का मंदिर बनवाया। 
  • – सावन भादों की मूर्तियां (कुम्भा – ऊदा) लगी हुयी हैं।
  • अचलेश्वर स्वामी का मंदिर हैं, इसमें शिव जी के अंगूठे की पूजा की जाती हैं। इस मंदिर के ठीक सामने दूरसा आढ़ा की मूर्ति लगी हुयी हैं। 
  • – अचलगढ़ को ‘भँवराथल’ कहते हैं, क्योंकि महमूद बेगठा के आक्रमण के समय यहां पर मधुमक्खियों ने
  • उसकी सेना पर आक्रमण कर दिया था।

शेरगढ़ः

  • – यह किला बारां जिले में परवन नदी के किनारे स्थित हैं। 
  • – इसे कोषवर्धनगढ़ भी कहते हैं। (जल दुर्ग)

शेरगढ़ः– (धौलपुर) :

  • – इसका निर्माण कुषाण काल में हुआ था। 
  • – शेरशाह सूरी ने इसका नाम शेरगढ़ रख दिया था। 
  • – इस किले में सैय्यद हुसैन की दरगाह हैं। 
  • – हुनुहुँकार तोप भी इसी किले में स्थित हैं। 
  • – धौलपुर के सिक्कों को तमचांशाही कहतें हैं। 
  • – इस किले में भारत का सबसे बड़ा घंटाघर हैं। 
  • – धौलपुर में कमलबाग हैं, जिसका बाबर की आत्मकथा बाबरनामा में जिक्र हैं। 
  • – राजस्थान, मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश की सीमाओं पर स्थित।

कोटा का किला:– (माधोसिंह, परकोटा) 

  • – जैत्रसिंह (बूंदी का राजा ने यहां एक गुलाब महल का निर्माण करवाया।) 
  • – कालान्तर में माधोसिंह ने इसे कोटा के किले के रूप में विकसित किया। 
  • – जेम्स टॉड के अनुसवार इस किले का परकोटा आगरा के किल’ बाद सबसे बड़ा हैं। 
  • – झाला हवेली- भित्ति चित्रो के लिए प्रसिद्ध हैं।

कांकणबाड़ी का किला:

  • – (अलवर, मिर्जा राजा जयसिंह) 
  • – अलवर जिले में स्थित मिर्जा राजा जयसिंह ने इसका निर्माण करवाया। 
  • – आरंगजेब ने दारा शिकोह (बड़े भाई) को यहां बंधक बना कर रखा था।

शाहबाद का किला:

  • – बारां जिले में स्थित। 
  • – मुकुटमणि देव चौहान ने इसका निर्माण करवाय था। 
  • – शेरशाह सूरी अपने कालिजर अभियान के दौरान इस पर अधिकार कर लेता हैं, व इसका नाम सलीमाबाद कर देता हैं। 
  • – इसमें एक बादल महल बना हुआ हैं। 
  • – इसमें नवलवान तोप रखी हुयी हैं।

चौमूं का किला:

  • – जयपुर जिले में स्थित। 
  • – इसे धारधारागढ़ रघुनाथगढ़, चौमुंहागढ़ भी कहते हैं। 
  • – इसका निर्माण करणसिंह ने करवाय था। 
  • – इसमें एक हवा मंदिर (आतिथ्य स्वागत) बना हुआ हैं।

दौसा का किला:

  • – देवगिरी पहाड़ी पर बना हुआ हैं। 
  • – छाजले की आकृति का बना हुआ हैं। 
  • – दौसा कछवाओं की पहली राजधानी थी।

माधोराजपुरा काकिला:

  • – जयपुर जिले में स्थित। (फागी तहसील के पास) 
  • – जयपुर महाराजा सवाई माधोसिंह ने मराठों पर जीत के उपलक्ष्य में बनवाया था। 
  • – यह किला किछवाहों की नरूका शाखा के अधीन रहा था। यहां का भारतसहि नरूका, अमीर खां पिण्डारी की बेगमों को बंधक बना कर लाता हैं।

फतेहपुर का किला:

  • – सीकर जिले में स्थित। 
  • – 1453 में फतेहपुर के नवाब फतेह खां कायमखानी ने निर्माण करवाया था। 
  • – पीर निजामुदीन की दरगाह बनी हुयी हैं। 
  • – सरस्वती पुस्तकालय- फुतेहपुर

नीमराणा का किला:

  • – अलवर जिले में स्थित। 
  • – इसे पंचमहल भी कहते हैं

कुचामन का किला:

  • – (निर्माण- मेड़तिया शासक जालिमसिंह) 
  • – नागौर जिले में स्थित। 
  • – इसे जागीरों किलों का सिरमौर कहते हैं।

नागौर का किला:– 

  • – इसका निर्माण चौहान शासक सोमेश्वर के सामन्त कैमास ने करवाया था। 
  • – इसे ‘अहिच्छत्रगढ़’ दुर्ग भी कहते हैं। 
  • – अमरसिंह राठौड़ की वीरता के लिए प्रसिद्ध हैं। 
  • – इसे 2013 का आगा खां अवार्ड दिया गया हैं।

– भैंसरोड़गढ़ का किला:

  • – (एक व्यापारी द्वारा निर्मित) 
  • – चम्बल व बामनी नदियों के संगम पर चित्तौड़गढ जिले में स्थित हैं। 
  • – इसे राजस्थान का वेल्लोर कहते हैं। (जल दुर्ग)

मालकोट का किला:

  • – मेड़ता (नागौर) के किले को मालकोट का किला कहते हैं। 
  • – निर्माण- मालदेव ने।

मोहनगढ़ का किला:

  • – जैसलमेर जिले मे स्थित। 
  • – निर्माण- जैसलमेर महाराजा जवाहरसिंह के समय। 
  • – भारत का अंतिम किला हैं।

तिमनगढ़ का किला:

  • त्रिभुवनगढ़ भी कहते हैं। 
  • – ननद- भौर्जा का कुआं
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