जैसलमेर के भाटियों का इतिहास ( History of Bhatis of Jaisalmer )

– भाटी भगवान श्रीकृष्ण के वंशज हैं। 

– भाटी यदुवंशी होते हैं, इसलिए जैसलमेर के राजचिन्ह में ‘छत्राला यादवपति’ लिखा हुआ हैं। 

– 285 ई. में भट्टी ने भटनेर को अपनी राजधानी बनाया। भट्टी को ‘भाटियों का आदिपुरूष’ या भाटी राज्य का संस्थापक कहा जाता हैं। 

– भटनेर के कारण ही भाटियों को ‘उत्तर भड़ किवाड’ । उत्तरी सीमा का प्रहरी कहा गया।

मंगलरावः 

– राजधानी – तनोट ।

देवराजः – देवराज ने पंवारो से लोद्रवा छीनकर, लोद्रवा को अपनी राजधानी बनाया। 

– मूमल महेन्द्र की प्रेम कहानी में महेन्द्र अमरकोट का राजकुमार था तथा मूमल लोद्रवा की राजकुमारी थी।

जैसल

– 12 जुलाई 1155 ई. को जैसलमेर की स्थापना करता हैं। व इसे अपनी राधानी बनाता हैं। 

मूलराज 

– अलाउदीन खिलजी ने जैसलमेर पर आक्रमण किया इस समय जैसलमेर का पहला साका हुआ।

दुर्जनसालः 

– 1352 ई. में फिरोज तुगलक ने जैसलमेर पर आक्रमण किया। इस समय जैसलमेर का ‘दुसरा साका’ हुआ। 

लूणकरण:

– 1550 ई. में कंधार के अमीर अली ने आक्रमण किया। इस समय केसरिया तो किया गया लेकिन जौहर

नहीं हो पाया। इसलिए इसे आधा साका कहा जाता हैं। 

मूलराज द्वितीय 

– इसने अंग्रेजों के साथ 1818ई. में संधि कर ली थी। 

जवाहरसिंह 

– आधुनिक जैसलमेर का निर्माता। 

– जैसलमेर में डाक-तार व रेल व्यवस्था लागू की। 

– जैसलमेर में ‘विण्डम पुस्तकालय’ बनवाया।

इन्हीं के समय स्वतंत्रता सेनानी सागरमल गोपा को जेल में जिंदा जलाकर मार दिया गया। सागरमल गोपा की हत्या की जाँच के लिए गोपाल स्वरूप पाठक आयोग स्थापित किया गया। 

– सागरमल गोपा की पुस्तकें:- 1. आजादी के दीवाने 2. जैसलमेर का गुडाराज 3. रघुनाथसिंह का मुकदमा

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