राजस्थान का एकीकरण (Integration of Rajasthan )

– 5 जुलाई 1947 को रियासती सचिवालय की स्थापना की गयी। 

– रियासती सचिवालय के अनुसार वे रियासतें जिनकी आय 1 करोड़ से अधिक हो व जनसंख्या 10 लाख से अधिक हो, अपना स्वतंत्र अस्तित्व रख सकती हैं। 

– उस समय राजस्थान में ऐसी 4 रियासतें थी।

1. जयपुर 2. जोधपुर 3. उयदपुर 4. बीकानेर 

– 18 जुलाई 1947 को धारा- 8 के तहत देशी रियासतों पर से ब्रिटिश सर्बोच्चता समाप्त कर दी गयी। (स्वतंत्रता अधिनियम के तहत) 

– आजादी के समय राजस्थान में 19 रियासतें, 3 ठिकाणे (1. लावा 2. नीमराणा 3. कुशलगढ़) व एक केन्द्र

शासित प्रदेश (अजमेर मेरवाड़ा) था। मेवाड़ महाराणा भूपालसिंह ने राजस्थान गुजरात व मालवा की रियासतों को मिलाकर राजस्थान यूनियन बनाने का प्रस्ताव रखा, इसके लिए 25, 26 जून 1947 को अधिवेशन भी बुलाया। इसमें 22 राजाओं ने भाग लिया, पर जयपुर , जोधपुर और बीकानेर के रियासतों के रूचि नहीं लेने के कारण यह निर्णय फलीभूत नहीं हो सका।

प्रथम चरणः मत्स्य संघ 

– भरतपुर, धौलपुर, अलवर व करौली रियासतों व नीमराणा ठिकाने को मिलाकर मत्स्य संघ बनाया गया। – मत्स्य संघ का नामकरण के. एम. मुंशी ने किया। 

– धौलपुर महाराजा उदयभानसिंह 

– राजप्रमुख – करौली महाराजा गणेशपालसिंह 

– उपराजप्रमुख – अलवर – राजधानी – भरतपुर – उद्घाटन 

– मत्स्य संघ का उद्घाटन 18 मार्च 1948 को भरतपुर के किले में केन्द्रीय खनिज मंत्री एन. वी. गाडविल ने किया।

– शोभाराम कुमावत (अलवर के) को मत्स्य संघ का प्रधानमंत्री बनाया गया। 

– जुगल किशोर चतुर्वेदी को उपप्रधानमंत्री बनाया गया। 

अलवर व भरतपुर रियासतों का नियत्रंण भारत सरकार ने पहले ही अपने कब्जे में ले लिया था।

द्वितीय चरणः राजस्थान संघ/ पूर्व राजस्थान 

– 9 रियासत + 1 ठिकाने को मिलाकर राजस्थान संघ को बनाया गया। 

– कोटा, बूंदी, झालावाड़, प्रतापगढ़, डुंगरपुर, बांसवाड़ा, किशनगढ़, टोंक , शाहपुरा, कुशलगढ़ (ठिकाना) 

– कोटा – राजधानी 

– कोटा महाराजा भीमसिंह – राजप्रमुख 

– बूंदी महाराजा बहादुरसिंह – वरिष्ठ उपराजप्रमुख 

– डुगरपुर के लक्ष्मणसिंह – कनिष्ठ उपराजप्रमुख

शाहपुरा के गोकुल लाल असावा 

– प्रधानमंत्री – 25 मार्च 1948 को एन. वी. गाडविल ने कोटा में उद्घाटन किया। 

– शाहपुरा व किशनगढ़ दो ऐसी रियासतें थी, जिन्हें तोपो की सलामी का अधिकार नहीं था। – बांसवाडा महारावल चनद्रवीरसिंह ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर करते हुए कहा था कि में अपने Death Warant पर हस्ताक्षर कर रहा हूं।

तृतीय चरण – संयुक्त राजस्थान 

– राजस्थान संघ + मेवाड़ 

– मेवाड़ राणा भूपालसिंह – राजप्रमुख 

– कोटा महाराजा भीमसिंह – उपराजप्रमुख 

– बूंदी महाराजा बहादुरसिंह – वरिष्ठ उपराजप्रमुख 

– डुंगरपुर महारावल लक्ष्मणसिंह – कनिष्ठ उपराजप्रमुख 

– 18 अप्रैल 1948 को उदयपुर में जवाहर लाल नेहरू ने उद्घाटन किया। 

– इसमें यह निर्णय लिया गया कि संयुक्त राजस्थान संघ का प्रतिवर्ष एक अधिवेशन कोटा में होगा और कोटा के विकास के लिए विशेष प्रयास किये जाएगें। 

– राजधानी – उदयपुर 

– मेवाड़ महाराणा भूपालसिंह को 20 लाख रू. सालाना (प्रिवी पर्स के रूप में) दिय जाने थे, जिनमें से 10 लाख रू. – प्रिवी पर्स।

5 लाख रू. – राजप्रमुख के रूप में वेतन

5 लाख रू. – धार्मिक कार्यो के लिए दिए गए। 

– प्रधानमंत्री _ – माणिक्य लाल वर्मा 

– उपप्रधानमंत्री – गोकुल लाल असावा 

– इसमें मंत्रिमंडल में सामन्तों को शामिल करने से गतिरोध उत्पन्न हो गया।

चतुर्थ चरणः वृहत् राजस्थान 

– संयुक्त राजस्थान संघ + बीकानेर, जोधपुर, जयपुर, जैसलमेर 

– मेवाड़ महाराणा भूपालसिंह – महाराजप्रमुख 

– जयपुर राज सवाई मानसिंह द्वितीय – राजप्रमुख 

– जोधपुर राजा हनवन्तसिंह – वरिष्ठ उपराजप्रमुख 

– कोटा महाराजा भीमसिंह – वरिष्ठ उपराजप्रमुख 

– बूंदी के बहादूरसिंह – कनिष्ठ उपराजप्रमुख 

– डुगरपुर के लक्ष्मणसिंह – कनिष्ठ उपराजप्रमुख 

– सत्यनारायण राव समिति की सिफारिश पर जयपुर को राजधानी बनाया। 

– 30 मार्च 1949 को वल्लभ भाई पटेल ने जयपुर में उद्घाटन किया। 

– इस दिन को ‘राजसथान दिवस’ के रूप में मनाया जाता हैं। – प्रधानमंत्री

– हीरालाल शास्त्री – जोधपुर

– हाई कोर्ट – बीकानेर

– शिक्षा विभाग। – भरतपुर

– कृषि विभाग। – कोटा

– वन एवं सहकारी विभाग। – उदयपुर

– खनिज विभाग। जयपुर के राजा को 18 लाख रू. PRIVI PURSE के रूप में दिए। 

– जोधपुर – 17.5 लाख रू. 

– बीकानेर – 17 लाख रू

पंचम चरणः संयुक्त वृहद राजस्थान 

– वृहद राजस्थान + मत्स्य संघ (15 मई 1949) 

– शोभाराम कुमावत को शास्त्री मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया गया। 

– शंकरराव देव समिति की सिफारिश के आधार पर मत्स्य संघ का विलय किया गया।

षष्ठम् चरण – राजस्थान 

– संयुक्त वृहद राजस्थान + सिरोही (आबू व देलवाड़ा को छोड़कर)

– 26 जनवरी 1950 

– आबू व देलवाड़ा सहित 89 गांव बॉम्बे राज्य में शामिल किए गए। गोकुल भाई भट्ट का हाथल गांव राजस्थान में शामिल किया गया। 

– हीरालाल शास्त्री – पहले मनोनीत मुख्यमंत्री

सप्तम चरण 

– फजल अली की अध्यक्षता में राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन किया गया था (तीन सदस्यीय) 

– के. एम. पणिक्कर (बीकानेर की तरफ से संविधान सभा में जाने वाले सदस्य) 

– हृदयनाथ कुजरू – इसकी सिफारिशों के आधार पर 1 नवम्बर 1956 को अजमेर-मेरवाड़ा का राजस्थान में विलय कर दिया गया। 

– अजमेर को राजस्थान का 26 वां जिला बनाया गया। 

– आबू व देलवाड़ा राजस्थान में मिलाये गए। 

– मध्यप्रदेश का सुनेल टप्पा राजस्थान में मिलाया गया। 

– राजस्थान का सिरोंज मध्यप्रदेश में मिलाया। गया। 

– इस समय राजस्थान के मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया थे। 

– राजप्रमुख का पद समाप्त कर दिया गया। (7वें संविधान संशोधन 1956 द्वारा) 

– सरदार गुरूमुख निहालसिंह को राजस्थान का पहला राज्यपाल बनाया गया।

अजमेर-मेरवाड़ा एक केन्द्रशासित प्रदेश था जिसमें 30 सदस्यों की धारा सभा होती थी। इसके मुख्यमंत्री हरिभाऊ उपाध्याय थे। 

इन्होंने अजमेर के राजस्थान में विलय का विरोध किया था।

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