भारत की प्राकृतिक वनस्पति (Natural vegetation of india)

भारत में निम्नलिखित प्रकार के वन पाये जाते हैं

वनस्पति क्षेत्रवर्षाक्षेत्रवनस्पति की विशेषताएँवृक्ष
उष्ण कटिबन्धीय आर्द्र सदाबहार वनवार्षिक वर्षा 250 सेमी. से अधिक पूरे वर्ष अधिक तापमान एवं नमी वाला क्षेत्र900 मी. से नीचे वाले वृक्ष क्षेत्र में। पश्चिमी घाट, तमिलनाडु, कर्नाटक,केरल, पश्चिम बंगाल के छोटे-छोटे भाग, तटीय उड़ीसा,
अन्दमान-निकोबार और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र।
अपने पत्ते कभी एक साथ नहीं गिराते और तीन और चार स्तरों में व्यवस्थित रहते हैं।मुख्यतः कठोर लकड़ी वाले वृक्ष-राजवुड, महोगनी, इबोनी, एबनोस, बाँस, रबर, सीन्कोना, चन्दन आदि।
उष्ण कटिबन्धीय अर्द्ध सदाबहार वन200 से 250 सेमी वार्षिक वर्षाअसम, पश्चिम बंगाल,तटीय उड़ीसा, और पश्चिम घाट में सदाबहार वन के पूर्वी यह सीमा पर संकीर्ण पट्टी का निर्माण करता हैवृक्ष वितान कम घने होते हैं और तलाओं और (epiphytes) की | । | प्रमुखता होती है। वनस्पति सदापर्णी वृक्ष और पर्णपाती वृक्ष के
बीच संक्रमण है।
मुख्य वृक्ष- कदम रोजवुड, कान्जू, चम्पा और आम
उष्ण कटिबन्धीय पर्णपाती वनवर्षा 200 सेमी. से कम जिसमें 156–200 सेमी. वर्षा युक्त मानसून वन <156 सेमी. वर्षा युक्त उष्ण कटिबन्धीय शुष्क पर्णपाती वन कहलाता
है।
पश्चिम बंगाल, उड़ीसा छोटानागपुर का पठार,पश्चिमी घाट का पूर्वी ढलान और हिमालय का निचला भागग्रीष्म में वृक्ष छह से आठ सप्ताह तक पत्ते गिरते रहते हैं, ग्रीष्म में वृक्ष वाष्पोत्सर्जन को कम करने के लिएउत्तर में साल, मध्य तथा पश्चिमी भाग में टीक, दक्षिणोत्तर भाग में चंदन। सीसो,महुआ, नीम खैर आदि
उष्ण कटिबन्धीय काँटेदार वन50-75 सेमी. वर्षा आंतरिक पठारी भाग, पूर्वी राजस्थान, पूर्वी और उत्तरी पंजाब,उत्तरी गुजरात, |आन्ध्रप्रदेश के कुछ भाग।झड़ने वाले छोटे काँटेदार वृक्ष जो 10 मी. तट ऊँचाई वाले होते हैं।ऐकेशिया,बबूल,इयूफोरबिया, खैर,खजूर आदि
मरुस्थलीय वनस्पतिवार्षिक वर्षा 10-50 सेराजस्थान के पश्चिमी भाग।झाड़ियाँ दूर-दूर फैले रहते हैं।कैकटस, काँटेदार झाड़ियाँ आदि।
हिमालय वनस्पतिवर्षा 75 सेमी. से 125 सेमी. के बीचहिमालय के पहाड़ी क्षेत्र, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश।ऊँचाई के साथ वनस्पति में परिवर्तन होता हैचौड़े पत्ते और कोणीय आकार के वृक्षमुख्य, वनस्पति हैं।जैसे-पाइन, ओक,चीड़, देवदार, ब्लू पाइन, सिल्वर फर आदि (पश्चिम हिमालय में) और ओक, लॉरेल
और चेस्टनट (पूर्वी हिमालय क्षेत्र में)।

दलदली गरान (Mangrove) वनस्पतिऔसतन 40 से 200 सेमी. वर्षा वाले क्षेत्र कुछ स्थानों पर बहुत घना-पश्चिमी घाट,गंगा, महानदी, कृष्णा,कावेरी और गोदावरी डेल्टा। सन्दरवन उपर्युक्त उदाहरण।ज्वार के कारण खारा पानी स्वच्छ पानी से निचले तटीय क्षेत्र में मिलकर ऐसे वनस्पति सबसे | के उपजने में मदद करते हैं जिनमें
अवस्तम्भ जड़ें (Stilt Root) और जो असंख्य आरोही लतायें युक्त होती हैं।
सुन्दरी, नारियल,पाइन, केवड़ा, बेंत, क्रू आदि
उपोष्ण आर्द्र पहाड़ी वनवर्षा 150-300 से. मी के बीचपूर्वी हिमालय में 900 मी. से ऊपर और पश्चिमी हिमालय वाले क्षेत्र।कोणधारी वृक्ष और पृथुपर्णी वृक्ष का मिश्रित वन पाइन और ओक
शीतोष्ण वन1830 मी. से अधिक ऊँचाई पर पूर्वी | हिमालय में और 1500 मी. से अधिक ऊँचाई पर पश्चिमी हिमालय वाले क्षेत्र में।सदाबहार कोणधारी वनदेवदार, भारतीय
चेस्टनट, मैगनोलिया, ब्लू पाइन, ओंक और हेमलॉक।
अल्पाइन वनपूर्वी हिमालय में 3650 मी. ऊँचाई तकपौधे इतने छोटे और एक दूसरे से इतने सटे हुए होते हैं कि वे मुलायम कालीन की तह लगाते हैं।स्यूस, फर, वर्च, | जूनिपर और रोडोडेन्ड्रॉन अल्पाइन वनस्पति और घास की वनस्पति के ऊपर पथरीले भाग में मिलते हैं जहाँ कुछ काई और कुछ जड़ी बूटियाँ मिलती है जब तक कि स्थायी हिम रेखा नहीं पहुँच जाती है।

नोट :- राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार देश के 33.3% क्षेत्र पर वन होने चाहिए। 

वन सम्बन्धी तथ्य 

12वीं वन स्थिति रिपोर्ट-2011 के अनुसार कुल वन क्षेत्रफल 692027 वर्ग किमी. है। (कुल भू–भाग का 21.05%) 

देश में सर्वाधिक वन क्षेत्रफल वाले राज्य

  • 1. मध्य प्रदेश 
  • 2. अरुणाचल प्रदेश 
  • 3. छत्तीसगढ़ 
  • 4. महाराष्ट्र

देश में न्यूनतम वन क्षेत्रफल वाले राज्य

  • 1. हरियाणा 
  • 2. पंजाब
  • 3. गोवा
  • 4. सिक्किम 

भौगोलिक क्षेत्र के प्रतिशत की दृष्टि से सर्वाधिक वन वाले राज्य/संघीय क्षेत्र (अपने भौगोलिक क्षेत्र के सापेक्ष)

  • 1. मिजोरम (90.28%) 
  • 2. लक्षद्वीप (84.38%) 
  • 3. अ.नि.वी.स. (81.51%) 
  • 4. अरुणाचल प्रदेश (80.50%)

सबसे बड़े मैंग्रोव क्षेत्र वाले राज्य/संघीय क्षेत्र

  • 1. प. बंगाल (2152 वर्ग किमी.) 
  • 2. गुजरात (1064 वर्ग किमी.) 
  • 3. अ.नि.द्वी.स. (615 वर्ग किमी.) 

देश में सबसे ज्यादा बांस के वन वाले राज्य

  • 1. अरुणाचल प्रदेश 
  • 2. मध्य प्रदेश 
  • 3. महाराष्ट्र 

राष्ट्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान केन्द्र, झाँसी (उ.प्र.) में स्थित है। 

केन्द्रीय मरुक्षेत्र अनुसंधान संस्थान, जोधपुर (राजस्थान) में स्थित है।

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