राज्य विधानमंडल :-विधानसभा, विधान परिषद् (State Legislature)

  • संविधान के अनुच्छेद 168 में प्रत्येक राज्य के लिए एक विधानमंडल का प्रावधान किया गया है जो राज्यपाल तथा एक या दो सदनों को मिलाकर बनता है।
  • वर्तमान समय में सिर्फ छह राज्यों में ही दो सदनों की  व्यवस्था है। आंध्र प्रदेश, जम्मू कश्मीर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, बिहार 

राज्य विधानमंडल के ये दो सदन हैं

1. विधानसभा और 2. विधान परिषद्

विधानसभा

राज्यस्थान अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित स्थानअनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित स्थान
1. आन्ध्र प्रदेश2943915
2. अरुणाचल प्रदेश6039
3. असम126816
4. बिहार2434828
5. झारखण्ड81
6. गोवा401
7. गुजरात1821326
8. हरियाणा9017
9. हिमांचल प्रदेश68163
10. जम्मू कश्मीर1006
11. कर्नाटक224332
12. केरल110131
13. मध्य प्रदेश2304475
14. छत्तीसगढ़90
15. महाराष्ट्र2881822
16. मणिपुर6019
17. मेंघालय6059
18. मिजोरम 4039
19. नागालैंड6059
20. उड़ीसा1472234
21. पंजाब11729
22. राजस्थान2003324
23. सिक्किम 32212
24. तमिलनाडु234433
25. त्रिपुरा60717
26. उत्तर प्रदेश403921
27. उत्तरांचल (उत्तराखण्ड)70
28. पश्चिम बंगाल2945917

संघ राज्य क्षेत्र

1. पाण्डिचेरी305
2. दिल्ली70

नोट : जम्मू-कश्मीर में विधान सभा सदस्यों की संख्या 100 है, लेकिन 24 चुनाव क्षेत्र पाकिस्तान द्वारा अधिगृहित क्षेत्र में हैं।


रचना:

  • विधानसभा एक जनप्रतिनिधि सभा होती है जिसके सदस्यों का चुनाव प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र के आधार पर राज्य की जनता द्वारा किया जाता है। 
  • किसी राज्य की विधानसभा में अधिकतम 500 और न्यूनतम 60 सदस्य हो सकते हैं। सिक्किम (32), गोवा (40), और मिजोरम (40) की विधान सभा में इससे कम की संख्या नहीं हो सकती।
  • सबसे अधिक सदस्य संख्या उत्तर प्रदेश की विधानसभा का है जबकि सिक्किम विधानसभा के सदस्यों की संख्या सबसे कम है। 
  • राज्यपाल के मत में यदि आंग्ल भारतीय समुदाय के सदस्यों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है तो वह आंग्ल भारतीय समुदाय को एक सदस्य को राज्य विधानसभा में मनोनित कर सकता है।

 विधानसभा का सदस्य बनने के लिए आवश्यक है कि व्यक्ति

  • 1. भारत का नागरिक हो 
  • 2. कम से कम 25 वर्ष की आयु का हो 
  • 3. भारत सरकार अथवा राज्य सरकार के अधीन कोई। लाभ का पद न धारण किया हो। 
  • 4. विकृतचित्त अथवा दिवालिया न हो 
  • कोई व्यक्ति एक ही समय में राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों या एक से अधिक विधानमंडलों का सदस्य नहीं हो सकता है। 
  • राज्य विधानमंडल का कोई सदस्य सदन की अनुमति के बिना 60 दिन तक अधिवेशनों से दूर रहता है, तो सदन द्वारा उसका स्थान रिक्त घोषित किया जा सकता है। 

अवधि:

  • विधानसभा की अवधि उसकी पहली बैठक से लेकर 5 वर्षों तक की होती है।
  •  आपातकाल में विधानसभा की अवधि एक वर्ष के लिए बढ़ायी जा सकती है 
  • किन्तु आपातकाल की समाप्ति के पश्चात् किसी भी स्थिति में 6 माह से अधिक नहीं बढ़ायी जा सकती। 
  • जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है। वहाँ की विधानसभा में राज्यपाल 2 महिलाओं का मनोनयन करता है।

विधानसभा के पदाधिकारी 

  • लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की भाँति राज्य विधानसभा में भी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष होते हैं। 
  • अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव विधानसभा के सदस्य अपने ही सदस्यों में से करते हैं।
  • अध्यक्ष या उपाध्यक्ष की विधानसभा की सदस्यता समाप्त हो जाने पर उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ता है। 
  • वे त्यागपत्र देकर भी पदमुक्त हो सकते हैं। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष अपना त्यागपत्र एक-दूसरे को देते हैं। 
  • यदि विधानसभा अपने सदस्यों के बहुमत से अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष को हटाये जाने का संकल्प पारित कर दे तो उन्हें अपना पद त्यागना पड़ता है।
  • ऐसे संकल्प को पारित करने के लिए 14 दिन पहले सूचना देना आवश्यक होता है। 
  • जब अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष को उनके पद से हटाये जाने से संबंधित प्रस्ताव पर सदन में विचार हो रहा होता है तो वे सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते।
  • विधानसभा भंग हो जाने पर अध्यक्ष द्वारा अपना पद रिक्त नहीं कर दिया जाता, अपितु नयी विधानसभा द्वारा अपना अध्यक्ष चुन लिये जाने तक वह अपने पद पर बना रहता है। 
  • अध्यक्ष का प्रमुख कार्य विधानसभा की बैठकों की अध्यक्षता करना तथा उसकी कार्यवाहियों को विनियमित करना होता है। 
  • सदन में किसी मसले पर वाद-विवाद के दौरान वह व्यवस्था बनाये रखता है तथा सदन के नियमों की व्याख्या करता है। 
  • सदन में पेश किया गया विधेयक धन विधेयक है अथवा नहीं इसे प्रमाणित करने की शक्ति अध्यक्ष के ही पास होता है। 
  • अध्यक्ष की अनुपस्थिति अथवा पद रिक्तता की दशा में सदन की अध्यक्षता उपाध्यक्ष करता है। 
  • अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों का पद रिक्त हो जाये तो सदन द्वारा नियुक्त सदस्य अध्यक्ष के रूप में कार्य करता है।

विधान परिषद्

रचना:

  • किसी राज्य में विधान परिषद् की स्थापना अथवा उसके उत्पादन का दायित्व राज्य की विधानसभा पर छोड़ा गया है। 
  • यदि किसी राज्य की विधानसभा अपने कुल सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत द्वारा संकल्प पारित कर दे तो संसद विधि बनाकर उस राज्य में विधान परिषद का सृजन तथा विद्यमान विधान परिषद् अंत कर सकती है। 
  • भारत में 7 राज्यों में विधान परिषदों का अस्तित्व हैउत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आन्ध्रप्रदेश, तमिलनाडु और जम्मू-कश्मीर । 
  • नवीन विधान परिषद् के सृजन अथवा विद्यमान विधान परिषद् की समाप्ति से संबंधित प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 169 में किया गया है। 
  • विधान परिषद् में उस राज्य के विधान सभा के एक तिहाई से अधिक सदस्य नहीं हो सकते, लेकिन किसी भी दशा में विधान परिषद् की सदस्य संख्या 40 से कम नहीं हो सकती। 

विधान परिषद् के सदस्यों का चुनाव निम्नलिखित ढंग से होता है

  • 1. एक तिहाई सदस्यों का चुनाव नगरपालिका, जिला परिषद् तथा स्थानीय निकाय के सदस्यों द्वारा किया जाता है।
  • 2. एक तिहाई सदस्यों का चुनाव राज्य विधानसभा के सदस्यों द्वारा किया जाता है। 
  • 3. 1/12 सदस्यों का चुनाव माध्यमिक शिक्षा संस्थाओं के सेवारत शिक्षकों द्वारा किया जाता है। 
  • 4. 1/12 सदस्यों का चुनाव कम से कम 3 वर्ष पूर्व के स्नातकों द्वारा किया जाता हैं .
  • 5. 1/6 सदस्यों का मनोनयन राज्यपाल द्वारा साहित्य, विज्ञान, कला, समाज सेवा तथा सहकारिता आंदोलन के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त व्यक्तियों में से किया जाता है। 

विधान परिषद् राज्यसभा की ही तरह स्थायी सदन है। अतः इसे भंग नहीं किया जा सकता है। प्रति दो वर्ष बाद इसके एक तिहाई सदस्य सेवा निवृत्त हो जाते हैं। इस प्रकार विधान परिषद् के प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है।

विधान परिषद् का सदस्य चुने जाने के लिए आवश्यक है कि व्यक्ति

  • 1. भारत का नागरिक हो 
  • 2. न्यूनतम 30 वर्ष की आयु का हो 
  • 3. केन्द्र अथवा राज्य सरकार के अंतर्गत किसी लाभ के पद पर न हो 
  • 4. विकृतचित्त अथवा दिवालिया न हो

पदाधिकारी 

  • सभापति और उपसभापति विधान परिषद् के दो महत्वपूर्ण पदाधिकारी है। 
  • सभापति और उपसभापति का चुनाव विधान परिषद के सदस्यों द्वारा अपने ही सदस्यों में से किया जाता है। 
  • उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय उपराष्ट्रपति की तरह विधान परिषद् का कोई पदेन सभापति नहीं होता है। 
  • यदि विधान परिषद् के सदस्य अपने बहुमत से सभापति अथवा उपसभापति को उनके पद से हटाये जाने का संकल्प पारित कर दें तो उनहें अपना पद त्यागना पड़ता है। 
  • सभापति अथवा उपसभापति को उन्हें उनके पद से हटाये जाने संबंधी प्रस्ताव पेश करने की सूचना 14 दिन पूर्व दे देनी आवश्यक होती है। 
  • सामान्य विधेयक के सम्बन्ध में गतिरोध पैदा होने पर विधानमण्डल (विधान सभा और विधान परिषद) की संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नहीं है। साधारण विधेयक को विधान परिषद मात्र 3 माह तक रोक सकती है और धन विधेयक को वह 14 दिन तक रोक सकती है।

संघशासित क्षेत्रों का प्रशासन 

  • भारत में राज्यों के अतिरिक्त कुछ संघशासित प्रदेश भी हैं, जिनका प्रशासन केन्द्र द्वारा किया जाता है। 
  • भारत में सात केन्द्र शासित प्रदेश है। दिल्ली, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादर ओर नगर हवेली, दमन और द्वीव, लक्षद्वीप, पांडिचेरी और चंडीगढ़ 
  • अनुच्छेद 239 के अनुसार संघ शासित क्षेत्रों का प्रशासन राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है। राष्ट्रपति संघशासित क्षेत्रों का प्रशासन अपने द्वारा नियुक्त प्रशासक के माध्यम से करता है। 
  • राष्ट्रपति संघ शासित क्षेत्रों में प्रशासन के लिए किसी पड़ोसी राज्य के राज्य पाल को भी नियुक्त कर सकता है। 
  • राष्ट्रपति द्वारा संघ शासित क्षेत्रों के प्रशासन की शक्ति संसद द्वारा बनायी गयी विधि के अधीन होती है। 
  • अनुच्छेद 239(क) के अनुसार संसद विधि बनाकर किसी संघ शासित प्रदेश के लिए विधानमंडल तथा मंत्रिपरिषद् का उपबंध कर सकती है। 
  • वर्तमान में पांडिचेरी और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के लिए विधानमंडल और मंत्रिपरिषद् का उपबंध किया जा चुका है। 
  • राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त प्रशासक मंत्रिपरिषद् के सलाह के बिना संसद द्वारा बनायी गयी विधि के अनुसार संघ शासित क्षेत्र का प्रशासन करता है।
  • राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त प्रशासक को उप-राजयपाल अथवा मुख्य आयुक्त नाम दिया गया है। 
  • संघ शासित क्षेत्रों से संबंधित विधि बनाने की शक्ति संसद को प्राप्त है।
  • उन राज्यों के अतिरिक्त जहाँ कि विधान मंडल है, अन्य सभी संघ शासित क्षेत्रों के लिए राष्ट्रपति को नियम बनाने की शक्ति प्राप्त है। 
  • राज्यों के राज्यपालों की भाँति संघ शासित क्षेत्रों के प्रशासकों को भी अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्राप्त हैं 
  • अनुच्छेद-241 में संसद को यह शक्ति प्रदान की गई है कि वह विधि बनाकर किसी संघशासित क्षेत्र के लिए उच्च न्यायालय का गठन कर सकती है। 
  • वर्तमान में दिल्ली एकमात्र ऐसा संघ शासित प्रदेश है जिसके लिए उच्च न्यायालय का गठन किया गया है।

अन्तर्राज्यीय परिषद (अनु. 263) : • 

अन्तर्राज्यीय परिषद का गठन 1990 में प्रधानमंत्री बी. पी. सिंह के कार्यकाल में किया गया था। 

वित्त आयोग (अनु. 280) :

  • इसका गठन राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है। इसमें एक अध्यक्ष और 4 अन्य सदस्य होते हैं। आयोग के अध्यक्ष को सार्वजनिक मामलों में पर्याप्त अनुभव होना चाहिए।
  • आयोग के पहले अध्यक्ष के. सी. नियोगी (1952-57) थे। 

संघ की भाषा : • 

संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की भाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी लेकिन संविधान के प्रवर्तन के 15 वर्षों बाद अर्थात 1965 तक संघ के भाषा के रूप में अंग्रेजी का प्रयोग किया जाना था। पहला राजभाषा आयोग 1955 में बी. जी. खेर की अध्यक्षता में गठित किया गया था। 

1. असमिया 2. बंग्ला 3. गुजराती 4. हिन्दी 5. कन्नड़ 6. कश्मीरी 7. कोंकणी  8. मलयालम 9. मणिपुरी 10. मराठी 11. नेपाली 12. उड़िया 13. पंजाबी 14. संस्कृत  15. सिन्धी 16. तमिल 17. तेलुगु  18. उर्दू  19. बोडो  20. मैथिली, 21. डोंगरी  22. संथाली 

नोट : मूल संविधान में आठवीं अनुसूची में केवल 14 भाषायें थीं।

Share this page

Leave a Comment